Literature

Not allowing the soul to manifest is suicide: Acharya Prashant
Not allowing the soul to manifest is suicide: Acharya Prashant
1 min
Acharya Prashant says:\n“If you wouldn’t call this foeticide, then what would you call it? When an unborn child is killed in the womb, you consider it wrong—you call it a sin, a crime. But what do you call the way we are killing ourselves from within? Not allowing the self to manifest is suicide.”\n
Celebrating Jesus Christ
Celebrating Jesus Christ
4 min

Jesus stands for the Truth and Truth is omnipresent.

He is present here, and right now, in the hearts of those who love him.

Jesus is not a mere mortal. Jesus is the source of light; the root of all flowers and beauty. In one form, he disappears. In another,

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Test sanity article
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“माँसाहार गरीबों के लिए वरदान है क्योंकि माँसाहार के माध्यम से गरीबों को सस्ता प्रोटीन मिल जाता है।“ १ ग्राम प्रोटीन अगर आप मटन से लेते हैं तो लगते हैं ३ रुपये। उतना ही प्रोटीन, १ ग्राम, अगर आप अंडे से लेते हैं तो लगते हैं १ रुपय ३० पैसे, उतना ही प्रोटीन, १ ग्राम, अगर आप चिकन से लेते हैं तो लगता हैं १ रुपया।
What is Prarabdha ?
What is Prarabdha ?
1 min

Prarabdha refers to the sum total of (apparent)movements in time and space that have resulted in the (apparent) formation of the jiva – the human being, or any other being.Everything that the being appears to be is prarabdha. And prarabdha is all past.

So,– having 5 fingers is prarabdha

Life
Life
1 min
कर्ण के कवच का रहस्य || नीम लड्डू
कर्ण के कवच का रहस्य || नीम लड्डू
1 min

प्रेम कोमलता की बात है? नहीं, प्रेम के लिए तो लोहा चाहिए! “जो ज़रा मुलायम दिल के लोग होते हैं, प्रेम तो उनकी बात है।” – नहीं! जो ये कोमल और मुलायम होते हैं यह तो बचेंगे ही नहीं कहीं प्रेम में, एकदम नष्ट हो जाएँगे।

प्रेम उनके बूते की,

क्या बच्चे भगवान का रूप होते हैं? || पंचतंत्र पर (2018)
क्या बच्चे भगवान का रूप होते हैं? || पंचतंत्र पर (2018)
21 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, अगर शांति के लिए कोई कर्तव्य या वादा तोड़ना पड़े, तो उससे क्या कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता?

आचार्य प्रशांत: शांति के लिए वादे रखने भी पड़ सकते हैं।

प्र: जैसे मैं भीष्म की बात कर रहा हूँ।

आचार्य: हाँ, ठीक है। शांति इतनी ऊँची चीज़ है कि

कभी भी अन्याय मत करो || पंचतंत्र पर (2018)
कभी भी अन्याय मत करो || पंचतंत्र पर (2018)
5 min

प्रश्नकर्ता: अन्याय को सहना कितना ग़लत है जब पता हो कि अन्याय हो रहा है और मजबूरी है कि आवाज़ नहीं उठा सकते?

आचार्य प्रशांत: 'न्याय' शब्द समझिएगा। 'न्याय' शब्द का अर्थ होता है, साधारण भाषा में, जिस चीज़ को जहाँ होना चाहिए, उसका वहीं होना। जो चीज़ जहाँ हो,

मगरमच्छ की दुविधा || (2018)
मगरमच्छ की दुविधा || (2018)
5 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। आपके सान्निध्य में आने के बाद एक नए का जन्म हुआ है। मैं बदला हूँ। अब इस नई रोशनी में पहले जैसा मैंने जीवन जीया, उसके प्रति निष्पक्ष और बेपरवाह हो रहा हूँ। पुराने ढर्रे हल्के हैं, लेकिन कभी-कभी उनके प्रभाव में कुछ और हो जाता

खोदा पहाड़ निकली चुहिया || पंचतंत्र पर (2018)
खोदा पहाड़ निकली चुहिया || पंचतंत्र पर (2018)
34 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। जीवित गुरु का क्या अर्थ है? संतजन जीवित गुरु को अधिक महत्व देते हैं, पर कभी-कभी ये भी कहते हैं कि ये हवाएँ, ये जल, ये पर्वत, ये जानवर, ये सब भी मेरे गुरु हैं। आप भी कहते हैं, “ये तुमने क्या कर दिया, तुमने मुझको

बन्दर और मगरमच्छ की दोस्ती || पंचतंत्र पर (2018)
बन्दर और मगरमच्छ की दोस्ती || पंचतंत्र पर (2018)
30 min

आचार्य प्रशांत: पंचतंत्र में एक कहानी आती है, छोटी-सी, सरल, साधारण, उसको आधार बनाकर प्रश्न पूछा है। कहानी है बंदर और मगरमच्छ की। कहानी कहती है कि एक जामुन के पेड़ पर नदी किनारे बंदर रहता था। बंदर को नाम भी दे दिया गया है, ‘रक्तमुख’। लाल-लाल मुँह था न,

घर-घर की वही कहानी! || पंचतंत्र पर (2018)
घर-घर की वही कहानी! || पंचतंत्र पर (2018)
24 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, देखने पर पाता हूँ कि सुख से गहरा लगाव है और फिर शायद इसी वजह से किसी विशिष्ट स्थिति का इंतज़ार करता रहता हूँ।

आचार्य प्रशांत: विशिष्ट स्थिति क्या है? सुख का इंतज़ार कर रहे होगे।

प्र: इस लगाव से कैसे उबर सकता हूँ?

आचार्य: उबरने की

लालच बहुत आता है, क्या करूँ? || पचतंत्र पर (2018)
लालच बहुत आता है, क्या करूँ? || पचतंत्र पर (2018)
3 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। आप कहते हैं कि पंचतंत्र की सारी कहानियाँ स्वार्थ की हैं, तो हम स्वार्थ से ऊपर कैसे उठें? कृपया समझाएँ।

आचार्य प्रशांत: ये जो अभी तुमने सवाल करा, ये काफ़ी है। स्वार्थ के अपने ना प्राण होते हैं, ना पाँव होते हैं, स्वार्थ तुम्हारे सहारे पर

अक़्ल बड़ी कि भैंस? || पंचतंत्र पर (2018)
अक़्ल बड़ी कि भैंस? || पंचतंत्र पर (2018)
11 min

प्रश्नकर्ता: पहले ‘मोगली’ का चरित्र हुआ करता था, इसका मतलब वो हम लोगों से बेहतर था?

आचार्य प्रशांत: ये पूरा शिविर तुम्हारे लिए सार्थक हो गया अगर ये ख़्याल तुम्हें उठा है। तुम भूल जाना चार दिन क्या हुआ, अगर इस एक बात को भी तुम अपने साथ रख सको।

हमसे अच्छा तो हमारा डॉगी है || पंचतंत्र पर (2018)
हमसे अच्छा तो हमारा डॉगी है || पंचतंत्र पर (2018)
9 min

आचार्य प्रशांत: बुद्धि अगर आध्यात्मिक नहीं है, अगर समर्पित नहीं है, तो उसे काट मार जाता है; वो चलती तो है, पर आत्मघाती दिशा में। ख़ूब चलती है बुद्धि, अपना ही नुकसान करने के लिए ख़ूब चलती है।

तुम मिलो किसी आदमी से जो अपना ही ख़ूब नुकसान किए जा

लालच करोगे तो डर लगेगा || पंचतंत्र पर (2018)
लालच करोगे तो डर लगेगा || पंचतंत्र पर (2018)
9 min

आचार्य प्रशांत: मैं आईआईटी में था, उन दिनों रैगिंग हुआ करती थी ज़बरदस्त। ये जो फ़स्ट यिअर (प्रथम वर्ष) के लड़के आएँ नए-नए, इनको नाम दिया जाता था 'फच्चा'; फ़स्ट यिअर का बच्चा यानी फच्चा। इनको डरा दिया जाए। रैगिंग का अर्थ ही यही था, उसके साथ दुर्व्यवहार हो रहा

आदिमानव ने तो खूब मज़े किये || पंचतंत्र पर (2018)
आदिमानव ने तो खूब मज़े किये || पंचतंत्र पर (2018)
26 min

आचार्य प्रशांत: कल हम बात कर रहे थे कि प्रकृति से तो परमात्मा भी छेड़खानी नहीं करता, तुम्हारी छोटी-सी बुद्धि उससे क्या छेड़खानी कर लेगी! क्यों उसके साथ दाँव खेलते हो?

आपने शक्कर की बात करी है। दो बीमारियाँ, मधुमेह और ओबेसिटी (मोटापा) पिछले सौ साल की हैं, पहले भी

Consciousness and the material || On Mundaka Upanishad (2021)
Consciousness and the material || On Mundaka Upanishad (2021)
14 min

तस्माच्च देवा बहुधा संप्रसूताः साध्या मनुष्याः पशवो वयांसि । प्राणापानौ व्रीहियवौ तपश्च श्रद्ध सत्यं ब्रह्मचर्यं विधिश्च ॥

tasmācca devā bahudhā saṃprasūtāḥ sādhyā manuṣyāḥ paśavo vayāṃsi prāṇāpānau vrīhiyavau tapaśca śraddha satyaṃ brahmacaryaṃ vidhiśca

And from Him have issued many gods, and demigods and men and beasts and birds, the main breath

बुद्धि तो घास ही चरेगी || पंचतंत्र पर (2018)
बुद्धि तो घास ही चरेगी || पंचतंत्र पर (2018)
13 min

प्रश्नकर्ता: प्रणाम, आचार्य जी। मैं अभी कानपुर में जिनके घर रुकी हूँ, उनका चार साल का एक लड़का है जिसके दोनों पैरों में एलर्जी और त्वचा की कुछ समस्याएँ हैं। काफ़ी इलाज के बावजूद भी उसे कोई लाभ नहीं मिल पाया है।

मैंने बच्चे की माँ को समझाया कि बच्चे

गुस्सा करना बुरी बात है || पंचतंत्र पर (2018)
गुस्सा करना बुरी बात है || पंचतंत्र पर (2018)
3 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, जैसे शक आता है या जलन उठती है तो हम घुटने टेक देते हैं, इन सब पर तो हमारा वश ही नहीं होता। घुटने टेकने की हमारी बहुत गंदी आदत है, तो उसे कैसे रोका जाए?

आचार्य: नहीं, घुटने टेकने तक भी ठीक है, उसके आगे के

अरे, पढ़ाई में क्या रखा है! || पंचतंत्र पर (2018)
अरे, पढ़ाई में क्या रखा है! || पंचतंत्र पर (2018)
11 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, सत्र में आने से मेरी जो ग्रोथ (प्रगति) की डिटर्मिनेशन (दृढ़ संकल्प) होती है, वो कम हो जाती है। मुझे लगता है, सब सही तो है, तो क्यों ग्रोथ करना? लेकिन आज की दुनिया में ग्रोथ तो ज़रूरी है, ख़ासकर मैं जिस क्षेत्र से हूँ उसमें, और

शक़ करना अच्छी बात है || पंचतंत्र पर (2018)
शक़ करना अच्छी बात है || पंचतंत्र पर (2018)
7 min

प्रश्नकर्ता: मैं जब ग्रंथों, गुरुओं और बुद्धपुरुषों के पास जाता हूँ, तो मेरे मन में तत्काल श्रद्धा जग जाती है, मन एकदम से चिल्ला उठता है कि यही हैं सच्चे गुरु, पर बाद में यही एहसान-फ़रामोश मन संदेह करने लगता है।

आचार्य जी, मेरी मनोस्थिति आपके सामने है। कृपया मार्गदर्शन

दूसरों की बुराई नहीं करनी चाहिए || पंचतंत्र पर (2018)
दूसरों की बुराई नहीं करनी चाहिए || पंचतंत्र पर (2018)
4 min

प्रश्नकर्ता: कुछ दिन पहले आपका एक सत्र देख रहा था, उसमें अपने बोला था कि आज के साधक को संसार से उतना ख़तरा नहीं है, जितना समकालीन, आज के गुरुओं से है। मेरे कुछ दोस्त भी कुछ समकालीन गुरुओं के पास जाते हैं। कृपा करके इस विषय पर थोड़ा और

जानवरों से दोस्ती करके तो देखो || पंचतंत्र पर (2018)
जानवरों से दोस्ती करके तो देखो || पंचतंत्र पर (2018)
12 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, सादर प्रणाम। आप जानवरों की कथाएँ पढ़वा रहे हैं, और मेरी समस्या ये है कि मुझे तो छोटे-छोटे जीवों से भी डर लगता है। कैसे इनसे डरना बंद करूँ? क्या मुझमें शरीर बोध ज़्यादा है?

आचार्य प्रशांत: शुरुआत कर लो। जिससे प्यार हो जाता है, जिससे दिल

हँस लो, रो लो, मज़े करो || पंचतंत्र पर (2018)
हँस लो, रो लो, मज़े करो || पंचतंत्र पर (2018)
8 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, कैसे पता करूँ कि अगर कोई मुझे कुछ समझा रहा है, तो वो मेरे लिए ठीक है या नहीं? कैसे पता करूँ कि मेरी ज़िंदगी अंधेरे की तरफ़ बढ़ रही है, या रोशनी की तरफ़?

आचार्य प्रशांत: बात सीधी है। नज़र साफ़ होने लगी हो, बेहतर दिखाई

धूर्त जुलाहा और राजकुमारी || पंचतंत्र पर (2018)
धूर्त जुलाहा और राजकुमारी || पंचतंत्र पर (2018)
10 min

आचार्य प्रशांत: जिज्ञासा आई है, पंचतंत्र की एक कहानी है, उसको आधार करके प्रश्न भेजा है। कहानी मैं पहले सुना देता हूँ।

कहानी है कि एक जुलाहे को एक राजकुमारी के रूप से आसक्ति हो जाती है। वो जानता है, राजकुमारी है, उस तक उसके हाथ पहुँच नहीं सकते, तो

परिवार से मोह || महाभारत पर (2018)
परिवार से मोह || महाभारत पर (2018)
44 min

प्रश्नकर्ता: नमन, आचार्य जी। मुझे समस्या आती है वैराग्य को अपने पारिवारिक जीवन के साथ जीने में। जैसे भीष्म और गुरु द्रोणाचार्य ने ज्ञानी होकर भी कुछ ग़लत निर्णय लिये, वैसे ही मैं भी स्वार्थी और असमर्थ हो जाता हूँ परिवार के सामने। परिवार के सामने सारा ज्ञान विलुप्त हो

जीवन के हर मुद्दे को समस्या मत बना लेना || महाभारत पर (2018)
जीवन के हर मुद्दे को समस्या मत बना लेना || महाभारत पर (2018)
6 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। मुझे कई बार अजीब-सी स्थिति अनुभव होती है, उस समय मन में कोई हलचल या बेचैनी इत्यादि नहीं होती है, साँस भी तब बहुत स्थिर और लयबद्ध हो जाती है, दिल की धड़कनें स्पष्ट अनुभव होती हैं और उस समय बस पड़े रहना अच्छा लगता है।

ऋण चुकाने में ही जीवन बिताना है? || महाभारत पर (2018)
ऋण चुकाने में ही जीवन बिताना है? || महाभारत पर (2018)
7 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आपने कहा था कि पहले अपने सारे ऋण चुका लो, फिर मेरे पास आना। पर ऋण चुकाने के प्रयास में मैं सांसारिक चीज़ों में उलझ करके समय व्यतीत कर रहा हूँ। परिस्थितियाँ मेरी बड़ी जटिल हैं, मेरे भीतर एक चिड़चिड़ापन है। मैं इस चक्रव्यूह से कैसे निजात

वर्णन तो हमेशा असत्य का ही होगा || महाभारत पर (2018)
वर्णन तो हमेशा असत्य का ही होगा || महाभारत पर (2018)
4 min

प्रश्नकर्ता: प्रणाम, आचार्य जी। यह सवाल मुझे बहुत परेशान करता है कि अगर चेतना ख़ुद को नहीं देख सकती, तो जानने वालों ने किसको जाना? कहते हैं कि सत्य को जाना नहीं जा सकता, शून्यता को ही परमसत्य कहा गया है। वहाँ ना कोई बोलने वाला है, ना कोई सुनने

अंतर है सत्य और धर्म में || महाभारत पर (2018)
अंतर है सत्य और धर्म में || महाभारत पर (2018)
7 min

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥

हे भारत! जब-जब धर्म की हानि होती है तथा अधर्म का अभ्युत्थान होता है, तब-तब मैं स्वयं का सृजन करता हूँ अर्थात् जन्म लेता हूँ।

~ श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय ४, श्लोक ७

प्रश्नकर्ता: वह धर्म ही क्या जिसे किसी की रक्षा की

कृष्ण तो कर्ण को भी उपलब्ध थे || महाभारत पर (2018)
कृष्ण तो कर्ण को भी उपलब्ध थे || महाभारत पर (2018)
11 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। कर्ण जैसी ही भावनाएँ मेरे मन में भी चलती रहती हैं, लगता है कि अर्जुन से ऊपर चले जाएँ, अर्जुन बन जाएँ, अर्जुन से जीत जाएँ। इस हालत में श्रीकृष्ण जैसे सारथी या मित्र की ज़रूरत महसूस होती है, लेकिन मिल जाते हैं शल्य या दुर्योधन

जीव हो, तो डर तो लगेगा ही || महाभारत पर (2018)
जीव हो, तो डर तो लगेगा ही || महाभारत पर (2018)
6 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, जब कोई बुरी घटना होती है, जैसे कि किसी की मौत, तो फिर उससे सम्बंधित विचार मुझे बार-बार सताता रहता है, रात को नींद भी नहीं आती है। उसे कैसे भूल सकते हैं, और वो क्यों आते हैं?

आचार्य प्रशांत: बेटा, ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हम

मन को केवल सत्य की ग़ुलामी भाएगी || महाभारत पर (2018)
मन को केवल सत्य की ग़ुलामी भाएगी || महाभारत पर (2018)
4 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, ग़ुलामी क्या है? और ग़ुलामी में ही जीना अच्छा है, कि अपनी मर्ज़ी से जीना भी अच्छा है?

आचार्य प्रशांत: एक तो वो ग़ुलामी है जिससे तुम परिचित ही हो। वो ग़ुलामी है कि जब कोई दूसरा तुम पर दबाव बनाए इत्यादि। अभी उस दिन तुम कह

स्वयं सुधरो, दुनिया अपनेआप सुधर जाएगी || महाभारत पर (2018)
स्वयं सुधरो, दुनिया अपनेआप सुधर जाएगी || महाभारत पर (2018)
3 min

प्रश्नकर्ता: जब मेरा बुरा वक़्त था, तो मेरे साथ किसी ने बहुत अभद्र व्यवहार किया और मेरी तकलीफ़ बढ़ाई। और आज भी जब मेरी ज़िंदगी आगे बढ़ रही है, तो वह मुझे अप्रत्यक्ष रूप से ताना मार रहा है। दूसरों के सामने वह स्वयं को बहुत अच्छा दर्शाता है और

व्यर्थ का छूटना और सार्थक का बढ़ना सदा समानांतर होते हैं || महाभारत पर (2018)
व्यर्थ का छूटना और सार्थक का बढ़ना सदा समानांतर होते हैं || महाभारत पर (2018)
6 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, बेफ़िक्री और कामचोरी में क्या अंतर है? आपके सानिध्य के साथ बेफ़िक्री बढ़ी है, पर ऐसा लगता है कि कहीं कामचोरी भी तो नहीं बढ़ रही। कृपया स्पष्टता प्रदान करें।

आचार्य प्रशांत: जब सही काम चुन लिया जाता है तो मूर्खताओं को, दुनिया भर के तमाम झंझटों

माया को हराने का तरीका क्या है? || महाभारत पर (2018)
माया को हराने का तरीका क्या है? || महाभारत पर (2018)
10 min

प्रश्नकर्ता: कुंती ने अपने पुत्र कर्ण को पैदा होते ही नदी में क्यों बहा दिया?

आचार्य प्रशांत: क्योंकि हम सब बड़े डरपोक लोग होते हैं, प्यार भी करते हैं तो छुप-छुपकर। हमारा सब कुछ सामाजिक होता है; हमारा प्रेम भी सामाजिक होता है। वह समाज से अनुमोदन माँगता है। वह

संतुष्ट जीवन का राज़ || महाभारत पर (2018)
संतुष्ट जीवन का राज़ || महाभारत पर (2018)
6 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। पिछले सत्र में आपने ऐसी निर्ममता से चीर-फाड़ की कि मेरे सारे नक़ाब अस्त-व्यस्त हुए जा रहे हैं।

आज से दो साल पहले की बात है। मैंने किसी से पूछा, “यह अहंकार क्या होता है?” मुझे लगता था कि मुझमें तो अहंकार रत्ती भर भी नहीं

अर्जुन को कृष्ण मिले, हमें क्यों नहीं? || महाभारत पर (2018)
अर्जुन को कृष्ण मिले, हमें क्यों नहीं? || महाभारत पर (2018)
5 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। आप कहते हैं कि जीवन सुधारो। जो अभी है जीवन में, मैं उसे छोड़ना चाहती हूँ, जैसे अहंकार, क्रोध इत्यादि। ये सब तो छूट ही नहीं रहा है। जब समझ में आता है कि अहंकार है, तो भी क्रोध आ जाता है किसी बात पर। जब

तुम सत्य को नहीं, सत्य तुम्हें चुनता है || महाभारत पर (2018)
तुम सत्य को नहीं, सत्य तुम्हें चुनता है || महाभारत पर (2018)
3 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मैंने एक बार आपको कहते हुए सुना था कि, "तुम जो भी कुछ चुनोगे, ग़लत ही होगा", तो क्या सत्य का मार्ग चुनना भी ग़लत है? कृपया समझाएँ।

आचार्य प्रशांत: सत्य चुना नहीं जाता। सत्य की जब कृपा होती है, तो तुम झूठ को नहीं चुनते। सत्य

बेबसी का रोना मत रोओ, अपने स्वार्थ तलाशो || महाभारत पर (2018)
बेबसी का रोना मत रोओ, अपने स्वार्थ तलाशो || महाभारत पर (2018)
9 min

प्रश्नकर्ता: गुरु द्रोण की स्थिति और विवशता को मैं अपने जीवन से जोड़कर देख रहा हूँ। वे जानते हैं कि सच क्या है, फिर भी व्यक्तिगत आवश्यकताओं की पूर्ति एवं अन्य लोभों के कारण कौरवों के साथ हैं। युद्ध के समय जब दुर्योधन बार-बार उन्हें जली-कटी सुनाकर उकसाता है तो

पछतावा नहीं, प्रायश्चित || महाभारत पर (2018)
पछतावा नहीं, प्रायश्चित || महाभारत पर (2018)
6 min

प्रश्नकर्ता: प्रणाम, आचार्य जी। धृतराष्ट्र जब युद्ध में अपने पुत्रों की दुर्गति देखते हैं तो कहते हैं कि "काश! पांडवों को पाँच गाँव दे ही दिए जाते, पितामह और कृष्ण की बात मान ही ली जाती।" ऐसी ही स्थिति हमारी ही होती है जब हम अपने कर्मों का कुफल भुगतते

श्री कृष्ण के ह्रदय में अर्जुन के लिए इतना स्नेह क्यों? || महाभारत पर (2018)
श्री कृष्ण के ह्रदय में अर्जुन के लिए इतना स्नेह क्यों? || महाभारत पर (2018)
8 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। श्रीकृष्ण को अर्जुन से विशेष प्रेम था। अर्जुन के लिए श्रीकृष्ण ने भीष्म के विरुद्ध भी अस्त्र उठा लिये थे, तब जबकि उन्होंने युद्ध में अस्त्र न उठाने का वचन दिया था। सूर्य को सुदर्शन चक्र से छुपाकर कुछ देर के लिए सूर्यास्त जैसा वातावरण भी

दुर्योधन और कर्ण की दूषित मित्रता || महाभारत पर (2018)
दुर्योधन और कर्ण की दूषित मित्रता || महाभारत पर (2018)
10 min

प्रश्नकर्ता: दुर्योधन ने कर्ण को युद्ध में घसीटा था। क्या दुर्योधन कर्ता था जिसने कर्ण को युद्ध में घसीट लिया, क्या दुर्योधन केंद्रीय था? या फिर कर्ण की वजह से दुर्योधन युद्ध में गया था, कर्ण के भरोसे पर? तो क्या कर्ण केंद्रीय था?

आचार्य प्रशांत: सवाल समझ पा रहे

जब गुरु के प्रति कृतज्ञता काम होने लगे || महाभारत पर (2018)
जब गुरु के प्रति कृतज्ञता काम होने लगे || महाभारत पर (2018)
4 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, गुरु के प्रति कृतज्ञता अगर कम होने लगे तो क्या करना चाहिए? कृपया मार्गदर्शन करने की अनुकंपा करें।

आचार्य प्रशांत: अपनी ओर देख लेना चाहिए। गुरु के प्रति यदि कृतज्ञता अगर कम होने लगे तो अपनी हालत को देख लेना चाहिए। जैसे कोई ऊपर से लेकर नीचे

मन के विकारों के विरुद्ध कैसे लड़ें? || महाभारत पर (2018)
मन के विकारों के विरुद्ध कैसे लड़ें? || महाभारत पर (2018)
4 min

प्रश्नकर्ता: मन के विकार दिखते तो हैं कि झूठे हैं, पर मैं उनके प्रति हथियार नहीं उठा पाता। मेरे भीतर तो विकार, इच्छाएँ और डर भी सगे-संबंधी बनकर आते हैं।

आचार्य प्रशांत: क्या सेवा करूँ तुम्हारी? तुम्हारा युद्ध मैं लड़ूँ?

जब जान गए हो इतना कुछ, तो फिर अटक क्यों

जिसके दर्शन हो जाएँ वो कृष्ण नहीं || महाभारत पर (2018)
जिसके दर्शन हो जाएँ वो कृष्ण नहीं || महाभारत पर (2018)
6 min

प्रश्नकर्ता: परिवार में, नौकरी में, आदतों में, हर जगह मैं अर्जुन की तरह अपने-आपको दुविधाग्रस्त पाता हूँ। सत्य कई बार दिख भी रहा होता है, पर किसी मूर्खतावश उस पर चलने का साहस नहीं कर पाता। मेरी अपने भीतर बैठे कृष्ण तक पहुँच नहीं है, और आपकी कही युक्तियों पर

कृष्ण का वक्तव्य कृष्ण से ही सुनो || महाभारत पर (2018)
कृष्ण का वक्तव्य कृष्ण से ही सुनो || महाभारत पर (2018)
10 min

प्रश्नकर्ता: मेरा प्रश्न है कि युद्ध के मैदान में अर्जुन अपनों को सामने पाकर मोहवश उदास होता है, कहता है कि, "मैं अपने सगे-संबंधियों को कैसे मार सकता हूँ! यह उचित नहीं।" तो श्रीकृष्ण उससे कहते हैं कि जब सिद्धांतों की लड़ाई होती है, तब केवल कर्तव्यों का ही ध्यान

भीष्म का धर्म || महाभारत पर (2018)
भीष्म का धर्म || महाभारत पर (2018)
14 min

प्रश्नकर्ता: प्रतिज्ञा क्या है? अधर्म का साथ क्यों दे दिया? क्या प्रतिज्ञा पर आबद्ध होना अहंकार है? इच्छामृत्यु क्या है?

आचार्य प्रशांत: अपनी दृष्टि में अधार्मिक कोई नहीं होता। अपनी दृष्टि में धार्मिक सब होते हैं, बस लोगों का धर्म व्यक्तिगत होता है, पूर्ण नहीं होता, निरपेक्ष नहीं होता, निर्वैयक्तिक