श्रद्धावान् लभते ज्ञानं तत्पर: संयतेन्द्रिय: | ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति || ४, ३९ || जितेन्द्रिय, साधनापरायण और श्रद्धावान मनुष्य ज्ञान को प्राप्त होता है तथा ज्ञान को प्राप्त होकर वह बिना विलम्ब के तत्काल ही भगवत्प्राप्तिरूप शान्ति को प्राप्त हो जाता है। —श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय ४, श्लोक ३९प्रश्नकर्ता: आचार्य जी,… read_more
You were once a girl; you would have read mathematics, history, science, geography, languages. Didn’t you find inspiring figures there? Didn’t those books arouse fantastic ideas in you?
I am sure that when you were younger, you thought of excellence, didn’t you? You would have had dreams. In your dreams,… read_more
यही जीवन जीने की कला है, मौज करो, मस्ती करो! गंभीर मत हो जाना। बिलकुल हल्के रहो, क्योंकि रखा क्या है?
आज तुम जिस बात को गंभीरता से लेते हो, कल वो तुम्हारे लिए दो पैसे की हो जाएगी। याद है, जब चौथी-पाँचवी में रिज़ल्ट आया था तो तुम कैसे… read_more
Questioner (Q): Acharya Ji, you once said that motivation and ambitions are symptoms of suffering but I think if one lives with ambition, the journey will teach him a lot. Life will become disarrayed. Please explain.
Acharya Prashant (AP): Don’t you see an obvious contradiction in what you are saying?… read_more
Questioner: You advise us to have a purposeless, aimless life. But if we will not aim for anything, then how will I crack my exams? In your younger days, you too prepared for exams like MBA, IIT JEE, Civil services, etc. But now you say having aims is no good.… read_more
Questioner: If I make a goal in life then how do I stick to it? How do I keep myself focused towards the goal?
Acharya Prashant: Choose the goal properly. Let the goal be so compelling that the goal itself is a defense against distractions. If you choose a goal… read_more
प्रश्नकर्ता: एक विचार बरक़रार ही रहता है कि 'क्या लोग सोचते हैं या क्या है छवि?' कभी थोड़ा कम दिखता है पर रहता ही है। फिर ये क्यों है, ऐसा सब के साथ तो नहीं है, जैसे अभी कोई छोटा कुत्ता है, तो उसके लिए तो मैं नहीं सोच रहा… read_more
आचार्य प्रशांत: (प्रश्न पढ़ते हुए) "नाम तो मेरा लक्की है पर मैं बहुत अनलक्की हूँ। मैं पिछले नौ साल से यू.पी.एस.सी. की तैयारी कर रहा हूँ। चार बार फ़ेल हो चुका हूँ, नौ साल से घर से बाहर हूँ और अब घर लौटने में डर लगता है। यू.पी.एस.सी. के अलावा… read_more
प्रश्नकर्ता: मैं जब अपनी ज़िन्दगी के बीते सालों को देखता हूँ तो दिखता है कि बहुत कुछ किया जा सकता था पर दूसरे क्या सोचेंगे, क्या कहेंगे, ये ख़्याल कर-करके मैंने कुछ किया नहीं। और आपका जीवन देखता हूँ तो पाता हूँ कि आपने सब कुछ लीग (संघ) से हटकर… read_more
प्रश्नकर्ता: मैं अपने जीवन में हारा हुआ महसूस करता हूँ और जीवन की असफलताओं से बहुत अधिक परेशान हो जाता हूँ। इससे कैसे बाहर निकलूँ?
आचार्य प्रशांत: एक-से-एक चोटियाँ हैं चढ़ने के लिए, आई-आई-टी का एग्जाम क्लियर नहीं हुआ बहुत छोटी चोटी है वह। हजारों लोग हर साल करते हैं… read_more
प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी, “जवानी अकेली दहाड़ती है शेर की तरह”—आपकी यह पंक्ति जब से सुनी है, तब से ख़ुद को युवा कहने में शर्म आती है। मुझ में उत्साह की कमी है। वो धार नहीं है जो इस उम्र में होनी चाहिए। किसी भी कर्म में डूबने की कोई… read_more
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, अपने लक्ष्य को कैसे हासिल करें?
आचार्य प्रशांत: जो तुम उपलब्ध करना चाहते हो, अपने-आप को बार-बार याद दिलाओ कि वो तुम क्यों उपलब्ध करना चाहते हो, और वो उपलब्ध करके क्या मिलेगा। उपलब्धि से पहले की प्रेरणा क्या है, इंस्पिरेशन क्या है – ये अपने-आप को… read_more
Questioner (An engineering student): Acharya Ji, what made you inclined towards Spirituality, after education from premier institutions like IIT-D and IIM-A?
Acharya Prashant (AP): A couple of decades ago, I was on that side where you all are sitting now, in another engineering college, IIT-Delhi. We too used to… read_more
प्रश्न: आचार्य जी, बीस साल से जिन ढर्रों पर चलता आ रहा था, आपने आकर बोल दिया कि वो ठीक नहीं हैं। तो अब मैं उन्हें ठीक करने की कोशिश करूँगा। दो-चार दिन चलूँगा, फिर पाँचवें दिन लगेगा सब ऐसे ही चल रहे हैं तो ठीक है रहने दो, मैं… read_more
प्रश्न: आचार्य जी, हम जीवन में संकल्प करते हैं और पाते हैं कि जल्द ही फीका पड़ने लगता है। ऐसा क्यों?
आचार्य प्रशांत: सही बात तो ये है कि जो काम शुरू किया, वो शुरू ही इसलिए नहीं किया कि ख़ुद समझ आई थी कोई बात, वो शुरू इसलिए… read_more
आचार्य प्रशांत: कुंदन ने बात कही है एक कि अगर यह स्पष्ट ही दिखने लग जाए कि दुनिया कैसी है तो क्या इस दिखने के बाद दुनिया वैसी ही रह जाती है?
नहीं, बिलकुल भी नहीं!
क्योंकि दुनिया रूप और आकर से ज़्यादा नाम और धारणा है, एक बार आपकी… read_more
प्रश्न: अपने अतीत से कैसे बचें? कुछ बातें कभी कभी आ जाती हैं जिनसे हम काफ़ी परेशान हो जाते हैं ।
~ शशांक
आचार्य प्रशांत: वो बातें तो आती ही रहेंगी अगर खाली जगह देखेंगी । मन ऐसा ही है जैसे ट्रेन का जनरल डिब्बा । सीट अगर… read_more
आचार्य प्रशांत: एक कहानी सुना रहा हूँ, ठीक है? इसको तार्किक तरीके से मत सुनना, इसका भाव समझने की कोशिश करना। कहते हैं, कि एक बार एक फ़कीर आया एक राजा के यहाँ पर। बड़ा राजा था, राजा से बोलता है एक छोटा सा कुछ चाहिये, मिलेगा? थोड़ा सा… read_more
आचार्य प्रशांत: क्या है आलस्य?
हम चीज़ों को, उनके लक्षणों के आधार पर भ्रमित कर लेते हैं। हम चीज़ को उसके नाम से भ्रमित कर लेते हैं। अच्छा, दाल क्या है? दाल का नाम है दाल? क्या दाल का नाम है दाल?
मैं कहूँ, “पानी”, तो इससे प्यास बुझ… read_more
आचार्य प्रशांत: सब कुछ तो सिर्फ़ जानना है न? खुद जानना। बस सुन नहीं लेना। किसी ने बोल दिया कि इंजीनियरिंग कर लो, तो कर ली। अब किसी ने बोल दिया कि चलो सॉफ्टवेयर वाली जॉब ले लो, तो ले ली। फिर किसी ने बोल दिया कि अब ये है,… read_more
श्रोता: एक बात मन में आती है कि जब अवेयरनैस (जागरुकता) है, तब अवेयरनैस है, आप नहीं हैं। तो जब तक इस शरीर में हैं, तब तक मस्तिष्क भी है, स्मृति भी है। जब अवेयरनैस है, तो स्मृति का क्या होता है? क्या वो कार्य नहीं करती?
वक्ता: नहीं, रहती… read_more
प्रश्न: सर, ये कहा जाता है कि ‘कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है’, ये कहाँ तक सही है?
वक्ता: ‘कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है’, जिस प्रकार से ये कही गई है, वैसे लगता है कि जीवन व्यापार है और उसमें अगर सफलता पानी है, तो… read_more
Questioner: What is daydreaming?
Speaker: The ones who coined this word ‘daydreaming’ used it as a kind of a pejorative, as a condemnation. Their assumption was that, dreaming befits only the sleeping state of consciousness and in the waking state, dreaming must not happen; that dreaming must not be… read_more
वक्ता: क्या इस बात को समझ रहे हो? इस पल में जो है, उसी से तो अगला निकलता है। अगर ये पल ठीक नहीं है तो क्या अगला ठीक हो सकता है?
श्रोता १: उसका कोई कारण भी तो होना चाहिए?
वक्ता: जिसको तुम आगे जाना कह रहे हो, उसका… read_more
वक्ता: सवाल है, ‘करें क्या’?
देखो बेटा सवाल है क्या इसको ध्यान से समझना। अक्सर मैं देखता हूँ कि छात्र यही बातें करते आते हैं कि हम समझ गए हैं कि ये ठीक है, ये नहीं । ये जान गए कि हम डरे हुए हैं, ये भी जान गए कि… read_more
Questioner: Sir, how to get rid of the problem of daydreaming?
Acharya Prashant: Are you day dreaming and knowing that it is day dreaming?
No! It’s not possible. You know that you have been dreaming only after the dreaming ceases. Right?
Now you are obviously helpless when the process of… read_more
प्रश्नकर्ता: सर, हम मुक्त होते हुए भी मुक्त क्यों नहीं हैं?
आचार्य प्रशांत: कुछ सवाल महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन मैं कहता हूँ कि ये बहुत महत्वपूर्ण सवाल है। मुझे ये भी नहीं पता है कि ये जो सवाल पूछा गया है क्या उसे ये पता भी है कि उसने पूछा… read_more
वक्ता: जहाँ कहीं भी तुम परम लक्ष्य बनाओगे, उससे चाहते तो तुम एक प्रकार की ख़ुशी ही हो। यही तो चाहते हो और क्या चाहते हो? परम लक्ष्य नही होता है। परम ये होता है कि उसी ख़ुशी में रह कर तुम ने अपने बाकी सारे काम करे। छोटे- बड़े,… read_more
प्रश्नकर्ता: सर, कहा जाता है कि कोई भी काम करने से पहले उसमें सोचना-विचारना ज़रूरी है। लेकिन मेरी ऐसी आदत है कि जो भी मैं सोचता हूँ, उसे कर देता हूँ। ये हमारे लिए अच्छा होगा या बुरा?
आचार्य प्रशांत: दोनों हो सकते हैं, निर्भर करता है कैसे। अगर मुद्दा… read_more
वक्ता: सपने क्यों? आंख खोलो और जियो! सपने तो इस बात की निशानी हैं कि आंख बंद है।
क्यों, किसलिए? पर मैं समझ रहा हूँ कि तुम कहाँ से आ रहे हो। तुम आ रहे हो वहाँ से जहाँ पर बड़े-बड़े लोगों ने कई बार तुमको ये कहा है कि… read_more
वक्ता: सवाल अच्छा है। ईमानदार सवाल है, ध्यान से देखेंगे इसे। सतीश कह रहे हैं कि ये सब बातें ठीक हैं पर जीवन का एक सत्य ये है कि हम सब अपनी परिस्तिथियों की पैदाइश हैं। बच्चा छोटा होता है, उसे वो ग्रहण करना ही होता है जो उसके आसपास… read_more
प्रश्न: सर सफलता कैसे पाएँ?
वक्ता: तुम मुझे बताओ कि सफलता क्या है?
श्रोता: परिश्रम करने से सफलता मिलती है।
वक्ता: तुम कहना चाहते हो कि परिश्रम करने से सफलता मिलती है। यह पंखा देखो। यह कितना परिश्रम कर रहा है, परिश्रम करते-करते गरम हो गया है।
श्रोता: यह पंखा… read_more
Listener: Sir, in the last session we were told that all dreams arise from past experiences. I agree that dreams arise from past but then how do I dream of something which is not at all present in my past? How do I dream of something that I have not… read_more
श्रोता: सर, कहा जाता है कि जो लोग सफल होते हैं वो अपने अवसर ख़ुद बनाते हैं! हम अपने अवसर ख़ुद कैसे बनायें?
वक्ता: बनाना क्यों है? है! अवसर अभी है!
और बनाओगे भी तो किस फैक्ट्री में बनाओगे जरा ये बताना? ये सारी बेकार की बातों पर क्यों ध्यान… read_more
Questioner(Q): What is the process of clarity? Is it just listening with immersion and no resistance? What is Truth? How we decide it?
Acharya Prashant (AP): Listening without effort, plus if there is Truth in what you hear, there is change and transformation, and that Truth becomes the master. We… read_more
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, एक तरफ़़ तो फ़िल्में हमें मनोरंजन देती हैं, हँसाती हैं, रुलाती हैं और दूसरी ओर उसी इंडस्ट्री से दुःखद और चौका देने वाली खबरें भी आती रहती हैं। कुछ कहिए।
आचार्य प्रशांत: सबसे पहले तो हमें इस धारणा से बाहर आना होगा कि फ़िल्में हमें मात्र मनोरंजन… read_more
Something is very wrong somewhere. The first thing in liberation is: do not be dependent on somebody, at least for your bread, for your basic sustenance. What kind of empowerment is this that happily accepts dependence on somebody else’s money on a date, and also for an entire lifetime? It… read_more
Text in the middle to test if 2nd image is considered in truncated. or not
\n\n29 अप्रैल से 1 मई, 2022 तक आयोजित हुए वेदांत महोत्सव के एक प्रतिभागी की प्रेरणास्पद कहानी\n\nमेरा नाम राकेश कुमार है। मैं कानपुर नगर से हूँ। पिछले चार माह से मैं हर… read_more
आचार्य प्रशांत: प्रकाश से आशय होता है — वस्तुओं का संज्ञान। प्रकाश न हो तो ऑंखें किसी भी वस्तु का संज्ञान नहीं ले सकतीं; और जब प्रकाश होता है तो प्रकाश स्वयं नहीं देखा जाता, प्रकाश में वस्तु देखी जाती है। तो जैसे हम हैं, हमारे लिए वस्तु तभी है… read_more
भारतीयों को शायद यह लगता है कि हिंदुस्तान से बाहर जहाँ कहीं कोई मिलेगा वह ‘अंग्रेज़ी’ ही बोल रहा होगा। एक तो यह बहुत बड़ी ग़लतफ़हमी है – बाहर जैसे ही हम निकलेंगे वैसे ही जो मिल रहा होगा अंग्रेज़ी ही बोल रहा होगा। हिंदुस्तान बेचारा बस पिछड़ा हुआ है,… read_more
कथं न ज्ञेयमस्माभिः पापादस्मानिवर्तितुम्। कुलक्षयकृतं दोषं प्रपश्यद्भिर्जनार्दन ॥३९॥
"तो कुल क्षय से होने वाले दोष को देख-सुन कर भी हम लोगों को इस पाप से निवृत्त होने का विचार क्यों नहीं करना चाहिए?"
~ श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय १, अर्जुन विषाद योग, श्लोक ३९
आचार्य प्रशांत: इसी आशय के तर्क आगे भी… read_more
When does one finish being a student? When the resistance to being a student is finished.
Who is the teacher? The teacher is the most obedient and voluntary of all students. The teacher is not a non-student; the teacher is the first student, the best student, the most voluntary student.… read_more
If you are someone who cannot take care of herself, how will you be sure that your presence, your company is not becoming an influence of sickness on the other person?
Be very, very alert about cohabitation. Just don’t start living with anybody. Be very, very conscious of your personal… read_more