Dreams

इन्द्रियों पर विजय कैसे प्राप्त करें? कर्म और अकर्म क्या?
इन्द्रियों पर विजय कैसे प्राप्त करें? कर्म और अकर्म क्या?
16 min

श्रद्धावान् लभते ज्ञानं तत्पर: संयतेन्द्रिय: | ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति || ४, ३९ || जितेन्द्रिय, साधनापरायण और श्रद्धावान मनुष्य ज्ञान को प्राप्त होता है तथा ज्ञान को प्राप्त होकर वह बिना विलम्ब के तत्काल ही भगवत्प्राप्तिरूप शान्ति को प्राप्त हो जाता है। —श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय ४, श्लोक ३९प्रश्नकर्ता: आचार्य जी,

Pradip Test Hindi
Pradip Test Hindi
1 min
Searching for a relationship || Neem Candies
Searching for a relationship || Neem Candies
1 min

You were once a girl; you would have read mathematics, history, science, geography, languages. Didn’t you find inspiring figures there? Didn’t those books arouse fantastic ideas in you?

I am sure that when you were younger, you thought of excellence, didn’t you? You would have had dreams. In your dreams,

मौज करो, गंभीर मत हो जाना || नीम लड्डू
मौज करो, गंभीर मत हो जाना || नीम लड्डू
1 min

यही जीवन जीने की कला है, मौज करो, मस्ती करो! गंभीर मत हो जाना। बिलकुल हल्के रहो, क्योंकि रखा क्या है?

आज तुम जिस बात को गंभीरता से लेते हो, कल वो तुम्हारे लिए दो पैसे की हो जाएगी। याद है, जब चौथी-पाँचवी में रिज़ल्ट आया था तो तुम कैसे

The perils of being goal-oriented || (2016)
The perils of being goal-oriented || (2016)
11 min

Questioner (Q): Acharya Ji, you once said that motivation and ambitions are symptoms of suffering but I think if one lives with ambition, the journey will teach him a lot. Life will become disarrayed. Please explain.

Acharya Prashant (AP): Don’t you see an obvious contradiction in what you are saying?

Purposeful life, or purposeless? || (2020)
Purposeful life, or purposeless? || (2020)
6 min

Questioner: You advise us to have a purposeless, aimless life. But if we will not aim for anything, then how will I crack my exams? In your younger days, you too prepared for exams like MBA, IIT JEE, Civil services, etc. But now you say having aims is no good.

How to stay focused towards my goal in life?
How to stay focused towards my goal in life?
4 min

Questioner: If I make a goal in life then how do I stick to it? How do I keep myself focused towards the goal?

Acharya Prashant: Choose the goal properly. Let the goal be so compelling that the goal itself is a defense against distractions. If you choose a goal

सुन्दर लड़की के सामने छवि बनाने की कोशिश
सुन्दर लड़की के सामने छवि बनाने की कोशिश
5 min

प्रश्नकर्ता: एक विचार बरक़रार ही रहता है कि 'क्या लोग सोचते हैं या क्या है छवि?' कभी थोड़ा कम दिखता है पर रहता ही है। फिर ये क्यों है, ऐसा सब के साथ तो नहीं है, जैसे अभी कोई छोटा कुत्ता है, तो उसके लिए तो मैं नहीं सोच रहा

जवानी जलाने का पूरा और पक्का इंतज़ाम -2
जवानी जलाने का पूरा और पक्का इंतज़ाम -2
13 min

आचार्य प्रशांत: (प्रश्न पढ़ते हुए) "नाम तो मेरा लक्की है पर मैं बहुत अनलक्की हूँ। मैं पिछले नौ साल से यू.पी.एस.सी. की तैयारी कर रहा हूँ। चार बार फ़ेल हो चुका हूँ, नौ साल से घर से बाहर हूँ और अब घर लौटने में डर लगता है। यू.पी.एस.सी. के अलावा

दूसरे क्या सोचेंगे, दुनिया क्या कहेगी?
दूसरे क्या सोचेंगे, दुनिया क्या कहेगी?
43 min

प्रश्नकर्ता: मैं जब अपनी ज़िन्दगी के बीते सालों को देखता हूँ तो दिखता है कि बहुत कुछ किया जा सकता था पर दूसरे क्या सोचेंगे, क्या कहेंगे, ये ख़्याल कर-करके मैंने कुछ किया नहीं। और आपका जीवन देखता हूँ तो पाता हूँ कि आपने सब कुछ लीग (संघ) से हटकर

जो सामने है, उसपर ध्यान दो
जो सामने है, उसपर ध्यान दो
7 min

प्रश्नकर्ता: मैं अपने जीवन में हारा हुआ महसूस करता हूँ और जीवन की असफलताओं से बहुत अधिक परेशान हो जाता हूँ। इससे कैसे बाहर निकलूँ?

आचार्य प्रशांत: एक-से-एक चोटियाँ हैं चढ़ने के लिए, आई-आई-टी का एग्जाम क्लियर नहीं हुआ बहुत छोटी चोटी है वह। हजारों लोग हर साल करते हैं

आओ तुम्हें जवानी सिखाएँ || आचार्य प्रशांत (2020)
आओ तुम्हें जवानी सिखाएँ || आचार्य प्रशांत (2020)
22 min

प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी, “जवानी अकेली दहाड़ती है शेर की तरह”—आपकी यह पंक्ति जब से सुनी है, तब से ख़ुद को युवा कहने में शर्म आती है। मुझ में उत्साह की कमी है। वो धार नहीं है जो इस उम्र में होनी चाहिए। किसी भी कर्म में डूबने की कोई

अपने लक्ष्य को कैसे हासिल करें? || युवाओं के संग (2019)
अपने लक्ष्य को कैसे हासिल करें? || युवाओं के संग (2019)
3 min

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, अपने लक्ष्य को कैसे हासिल करें?

आचार्य प्रशांत: जो तुम उपलब्ध करना चाहते हो, अपने-आप को बार-बार याद दिलाओ कि वो तुम क्यों उपलब्ध करना चाहते हो, और वो उपलब्ध करके क्या मिलेगा। उपलब्धि से पहले की प्रेरणा क्या है, इंस्पिरेशन क्या है – ये अपने-आप को

An IIT - IIM education must widen your choices, not limit them || Acharya Prashant, with youth(2018)
An IIT - IIM education must widen your choices, not limit them || Acharya Prashant, with youth(2018)
9 min

Questioner (An engineering student): Acharya Ji, what made you inclined towards Spirituality, after education from premier institutions like IIT-D and IIM-A?

Acharya Prashant (AP): A couple of decades ago, I was on that side where you all are sitting now, in another engineering college, IIT-Delhi. We too used to

अतीत के ढ़र्रे तोड़ना कितना मुश्किल? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2013)
अतीत के ढ़र्रे तोड़ना कितना मुश्किल? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2013)
5 min

प्रश्न: आचार्य जी, बीस साल से जिन ढर्रों पर चलता आ रहा था, आपने आकर बोल दिया कि वो ठीक नहीं हैं। तो अब मैं उन्हें ठीक करने की कोशिश करूँगा। दो-चार दिन चलूँगा, फिर पाँचवें दिन लगेगा सब ऐसे ही चल रहे हैं तो ठीक है रहने दो, मैं

संकल्प पूरे क्यों नहीं कर पाते? || आचार्य प्रशांत, छात्रों के संग (2014)
संकल्प पूरे क्यों नहीं कर पाते? || आचार्य प्रशांत, छात्रों के संग (2014)
8 min

प्रश्न: आचार्य जी, हम जीवन में संकल्प करते हैं और पाते हैं कि जल्द ही फीका पड़ने लगता है। ऐसा क्यों?

आचार्य प्रशांत: सही बात तो ये है कि जो काम शुरू किया, वो शुरू ही इसलिए नहीं किया कि ख़ुद समझ आई थी कोई बात, वो शुरू इसलिए

आँख खोल के देखो, दुनिया दूसरी हो जाएगी || आचार्य प्रशांत (2014)
आँख खोल के देखो, दुनिया दूसरी हो जाएगी || आचार्य प्रशांत (2014)
2 min

आचार्य प्रशांत: कुंदन ने बात कही है एक कि अगर यह स्पष्ट ही दिखने लग जाए कि दुनिया कैसी है तो क्या इस दिखने के बाद दुनिया वैसी ही रह जाती है?

नहीं, बिलकुल भी नहीं!

क्योंकि दुनिया रूप और आकर से ज़्यादा नाम और धारणा है, एक बार आपकी

अतीत को पीछे कैसे छोड़ें? || आचार्य प्रशांत (2018)
अतीत को पीछे कैसे छोड़ें? || आचार्य प्रशांत (2018)
8 min

प्रश्न: अपने अतीत से कैसे बचें? कुछ बातें कभी कभी आ जाती हैं जिनसे हम काफ़ी परेशान हो जाते हैं ।

~ शशांक

आचार्य प्रशांत: वो बातें तो आती ही रहेंगी अगर खाली जगह देखेंगी । मन ऐसा ही है जैसे ट्रेन का जनरल डिब्बा । सीट अगर

आदमी की खोपड़ी कभी नहीं भरती || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
आदमी की खोपड़ी कभी नहीं भरती || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
9 min

आचार्य प्रशांत: एक कहानी सुना रहा हूँ, ठीक है? इसको तार्किक तरीके से मत सुनना, इसका भाव समझने की कोशिश करना। कहते हैं, कि एक बार एक फ़कीर आया एक राजा के यहाँ पर। बड़ा राजा था, राजा से बोलता है एक छोटा सा कुछ चाहिये, मिलेगा? थोड़ा सा

कल्पनाएँ ही आलस्य हैं || आचार्य प्रशांत, युवाओ के संग (2012)
कल्पनाएँ ही आलस्य हैं || आचार्य प्रशांत, युवाओ के संग (2012)
18 min

आचार्य प्रशांत: क्या है आलस्य?

हम चीज़ों को, उनके लक्षणों के आधार पर भ्रमित कर लेते हैं। हम चीज़ को उसके नाम से भ्रमित कर लेते हैं। अच्छा, दाल क्या है? दाल का नाम है दाल? क्या दाल का नाम है दाल?

मैं कहूँ, “पानी”, तो इससे प्यास बुझ

न इच्छाएँ तुम्हारी, न उनसे मिलने वाली संतुष्टि तुम्हारी || आचार्य प्रशांत, युवाओ के संग (2012)
न इच्छाएँ तुम्हारी, न उनसे मिलने वाली संतुष्टि तुम्हारी || आचार्य प्रशांत, युवाओ के संग (2012)
10 min

आचार्य प्रशांत: सब कुछ तो सिर्फ़ जानना है न? खुद जानना। बस सुन नहीं लेना। किसी ने बोल दिया कि इंजीनियरिंग कर लो, तो कर ली। अब किसी ने बोल दिया कि चलो सॉफ्टवेयर वाली जॉब ले लो, तो ले ली। फिर किसी ने बोल दिया कि अब ये है,

बोध में स्मृति का क्या स्थान है? || आचार्य प्रशांत (2015)
बोध में स्मृति का क्या स्थान है? || आचार्य प्रशांत (2015)
4 min

श्रोता: एक बात मन में आती है कि जब अवेयरनैस (जागरुकता) है, तब अवेयरनैस है, आप नहीं हैं। तो जब तक इस शरीर में हैं, तब तक मस्तिष्क भी है, स्मृति भी है। जब अवेयरनैस है, तो स्मृति का क्या होता है? क्या वो कार्य नहीं करती?

वक्ता: नहीं, रहती

कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2014)
कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2014)
5 min

प्रश्न: सर, ये कहा जाता है कि ‘कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है’, ये कहाँ तक सही है?

वक्ता: ‘कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है’, जिस प्रकार से ये कही गई है, वैसे लगता है कि जीवन व्यापार है और उसमें अगर सफलता पानी है, तो

The real meaning of daydreaming || Acharya Prashant (2015)
The real meaning of daydreaming || Acharya Prashant (2015)
20 min

Questioner: What is daydreaming?

Speaker: The ones who coined this word ‘daydreaming’ used it as a kind of a pejorative, as a condemnation. Their assumption was that, dreaming befits only the sleeping state of consciousness and in the waking state, dreaming must not happen; that dreaming must not be

सपने नहीं, समझ || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
सपने नहीं, समझ || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
4 min

वक्ता: क्या इस बात को समझ रहे हो? इस पल में जो है, उसी से तो अगला निकलता है। अगर ये पल ठीक नहीं है तो क्या अगला ठीक हो सकता है?

श्रोता १: उसका कोई कारण भी तो होना चाहिए?

वक्ता: जिसको तुम आगे जाना कह रहे हो, उसका

मत पूछो कि करें क्या? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2013)
मत पूछो कि करें क्या? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2013)
3 min

वक्ता: सवाल है, ‘करें क्या’?

देखो बेटा सवाल है क्या इसको ध्यान से समझना। अक्सर मैं देखता हूँ कि छात्र यही बातें करते आते हैं कि हम समझ गए हैं कि ये ठीक है, ये नहीं । ये जान गए कि हम डरे हुए हैं, ये भी जान गए कि

How to get rid of daydreaming? || Acharya Prashant, with youth (2013)
How to get rid of daydreaming? || Acharya Prashant, with youth (2013)
2 min

Questioner: Sir, how to get rid of the problem of daydreaming?

Acharya Prashant: Are you day dreaming and knowing that it is day dreaming?

No! It’s not possible. You know that you have been dreaming only after the dreaming ceases. Right?

Now you are obviously helpless when the process of

पंख हैं पर उड़ान नहीं || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2013)
पंख हैं पर उड़ान नहीं || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2013)
12 min

प्रश्नकर्ता: सर, हम मुक्त होते हुए भी मुक्त क्यों नहीं हैं?

आचार्य प्रशांत: कुछ सवाल महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन मैं कहता हूँ कि ये बहुत महत्वपूर्ण सवाल है। मुझे ये भी नहीं पता है कि ये जो सवाल पूछा गया है क्या उसे ये पता भी है कि उसने पूछा

परम लक्ष्य सबसे पहले || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2014)
परम लक्ष्य सबसे पहले || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2014)
13 min

वक्ता: जहाँ कहीं भी तुम परम लक्ष्य बनाओगे, उससे चाहते तो तुम एक प्रकार की ख़ुशी ही हो। यही तो चाहते हो और क्या चाहते हो? परम लक्ष्य नही होता है। परम ये होता है कि उसी ख़ुशी में रह कर तुम ने अपने बाकी सारे काम करे। छोटे- बड़े,

करने से पहले सोचने की ज़रूरत || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2014)
करने से पहले सोचने की ज़रूरत || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2014)
2 min

प्रश्नकर्ता: सर, कहा जाता है कि कोई भी काम करने से पहले उसमें सोचना-विचारना ज़रूरी है। लेकिन मेरी ऐसी आदत है कि जो भी मैं सोचता हूँ, उसे कर देता हूँ। ये हमारे लिए अच्छा होगा या बुरा?

आचार्य प्रशांत: दोनों हो सकते हैं, निर्भर करता है कैसे। अगर मुद्दा

सपने नहीं, जागृति का उत्सव || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2013)
सपने नहीं, जागृति का उत्सव || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2013)
5 min

वक्ता: सपने क्यों? आंख खोलो और जियो! सपने तो इस बात की निशानी हैं कि आंख बंद है।

क्यों, किसलिए? पर मैं समझ रहा हूँ कि तुम कहाँ से आ रहे हो। तुम आ रहे हो वहाँ से जहाँ पर बड़े-बड़े लोगों ने कई बार तुमको ये कहा है कि

अतीत के बोझ का क्या करूँ? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2013)
अतीत के बोझ का क्या करूँ? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2013)
5 min

वक्ता: सवाल अच्छा है। ईमानदार सवाल है, ध्यान से देखेंगे इसे। सतीश कह रहे हैं कि ये सब बातें ठीक हैं पर जीवन का एक सत्य ये है कि हम सब अपनी परिस्तिथियों की पैदाइश हैं। बच्चा छोटा होता है, उसे वो ग्रहण करना ही होता है जो उसके आसपास

न तुम, न तुम्हारा श्रम || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2013)
न तुम, न तुम्हारा श्रम || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2013)
12 min

प्रश्न: सर सफलता कैसे पाएँ?

वक्ता: तुम मुझे बताओ कि सफलता क्या है?

श्रोता: परिश्रम करने से सफलता मिलती है।

वक्ता: तुम कहना चाहते हो कि परिश्रम करने से सफलता मिलती है। यह पंखा देखो। यह कितना परिश्रम कर रहा है, परिश्रम करते-करते गरम हो गया है।

श्रोता: यह पंखा

The difference between dream and vision || Acharya Prashant, with youth (2013)
The difference between dream and vision || Acharya Prashant, with youth (2013)
14 min

Listener: Sir, in the last session we were told that all dreams arise from past experiences. I agree that dreams arise from past but then how do I dream of something which is not at all present in my past? How do I dream of something that I have not

अवसर अभी है || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
अवसर अभी है || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)
2 min

श्रोता: सर, कहा जाता है कि जो लोग सफल होते हैं वो अपने अवसर ख़ुद बनाते हैं! हम अपने अवसर ख़ुद कैसे बनायें?

वक्ता: बनाना क्यों है? है! अवसर अभी है!

और बनाओगे भी तो किस फैक्ट्री में बनाओगे जरा ये बताना? ये सारी बेकार की बातों पर क्यों ध्यान

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Acharya Prashant (AP): Listening without effort, plus if there is Truth in what you hear, there is change and transformation, and that Truth becomes the master. We

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When does one finish being a student? When the resistance to being a student is finished.

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If you are someone who cannot take care of herself, how will you be sure that your presence, your company is not becoming an influence of sickness on the other person?

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