प्रश्नकर्ता: पिछली बार चंडीगढ़ तरफ़ से आया था जी, आपसे जुड़ा था। तब मैं अकेला आया था, बिलकुल हताश, परेशान था। आज मेरी साथ श्रीमती जी भी आई हैं। मेरा प्रश्न यह है जी, जैसे संतों ने कहा है—
"प्रेम-गली अति सांकरी, तामे दो न समाहिं। जब मैं था तब… read_more
**ਅਉਧ ਘਟੈ ਦਿਨਸੁ ਰੈਣਾਰੇ ॥ ਮਨ ਗੁਰ ਮਿਲਿ ਕਾਜ ਸਵਾਰੇ ॥ ਰਹਾਉ ॥
a-oDh ghatai dinas rainaaray. man gur mil kaaj savaaray. rahaa-o.
The life passes day and night. My mind, meet the Guru so that he sets things right: meet the Guru so that he attaches you… read_more
प्रश्नकर्ता: मन में हमेशा एक ऐसा विचार आता है, मतलब कई बार; पिछले बार कई बार पढ़ा उसके हिसाब से, कि अगर कहते हैं, "होइहै वही जो राम रचि राखा", तो क्या मतलब ये अध्यात्म में ऐसा मानें कि आत्मा-परमात्मा अलग रहे बहुकाल? तो ये ऐसा होता ही है मतलब… read_more
Acharya Prashant: (Reading, Salok Mahalla 9 Guru Teg Bahadur)
“One who is not affected by pleasure and pain, who looks upon friend and enemy alike, says Nanak, listen mind, know that such a person is liberated."
(Hindi- “harsh, shok vyape nahin bairi meet saman”).
(Reading question) "If friendship and… read_more
Questioner (Q): Dear Acharya Ji, Pranaam!
For three months we have been studying Guru Granth sahib, and my mind is filled with love for God, his name, and devotion for Guru. Today is the last class, so I wished to conclude all that I have learned and listened to so… read_more
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, सांसारिक दृष्टि से, श्रीकृष्ण को सोलह गुणों का धनी माना जाता है और श्रीराम को बारह गुणों का धनी माना जाता है, ऐसा क्यों? उनमें क्या कोई भेद है?
आचार्य प्रशांत: राम ने मर्यादा के चलते, अपने ऊपर आचरणगत कुछ वर्जनाएँ रखीं, कृष्ण ने नहीं रखीं है।… read_more
हमरी करो हाथ दै रक्षा॥
पूरन होइ चित की इछा॥
तव चरनन मन रहै हमारा॥
अपना जान करो प्रतिपारा॥
~ चौपाईसाहब (नितनेम)
अर्थात, हे! अकाल पूरक, अपना हाथ देकर मेरी रक्षा करो। मेरी मन की यह इच्छा आपकी कृपा द्वारा पूरी हो कि मेरा मन सदा आपके चरणों में जुड़ा… read_more
रामहि डरु करु राम सों ममता प्रीति प्रतीति।
तुलसी निरुपधि राम को भएँ हारेहूँ जीति।।
~ संत तुलसीदास
आचार्य प्रशांत: ध्यान देना होगा! कुछ ऐसा है यहाँ पर जो आपको चौंका सकता है।
राम से ही डरो! हो राम से ही ममता-प्रीत और राम ही हों सर्वत्र प्रतीत। तुलसी निरुपधि… read_more
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, चीज़ें समझ में आ रही हैं लेकिन फिर भी ऐसा लगता है कि बीच में फँसा हुआ हूँ, खींचा हुआ सा महसूस करता हूँ, ऐसी हालत में क्या होगा?
आचार्य प्रशांत: कुछ टूटेगा। या इधर टूटेगा या उधर टूटेगा।
पर हम बड़े होशियार लोग हैं, जैसे स्ट्रैटजी… read_more
राम आज ज़्यादातर लोगों को क्यों पसंद आएँगे? देखो हर युग, उस युग के मूल्यों के हिसाब से अपने आदर्शों को, नायकों को चुनता है। चुनता भी है, गढ़ता भी है। तो जिस युग के जो मूल्य होते हैं, जो वैल्यूज़ होती हैं उसी के हिसाब से उस युग के… read_more
प्रश्नकर्ता: ज्योति दिये की दूजे घर को सजाए का क्या अर्थ है?
आचार्य प्रशांत: बिल्कुल सही जगह उंगली रखी है यही सवाल पूछने लायक है। बढ़िया!
गहरा ये भेद कोई मुझको बताए
किसने किया है मुझपर अन्याय
जिसका ही दीप वो बुझ नहीं पाए
ज्योति दिये की दूजे घर को… read_more
जानें जानन जोइए
बिनु जाने को जान।
तुलसी यह सुनि समुझि हियँ
आनु धरें धनु बान।।
आचार्य प्रशांत: जान कर के जान जाएँगे आप और बिना जाने कौन जानेगा? तुलसी खेल रहे हैं, मानो चुनौती-सी दे रहे हैं। कह रहे हैं- अब ये सुनो और समझो और… read_more
प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, दिवाली के अवसर पर देशभर से लोग यहाँ पर आपके साथ दीवाली मनाने के लिए उपस्थित हैं। उन्होंने अपने प्रश्न भेजे हैं। पहला प्रश्न है- प्रणाम आचार्य जी, कलयुग में रावण के मोक्ष का मार्ग क्या है? त्रेता में हरि के हाथों मृत्यु पाकर रावण पार… read_more
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आज दीवाली है, मेरे मन में ये प्रश्न आ रहा है कि क्या हम त्योहारों को उनके सही अर्थों में मनाते भी हैं या नहीं?
आचार्य प्रशांत: अगर धर्म वास्तव में ये है - ईमानदार, बोधपूर्ण, एकांत तो ये दिन (त्योहार) हमें और धार्मिक बनाते हैं या… read_more
प्रश्नकर्ता: पिछले बाईस वर्षों से मैं एक साधना कर रहा था। अब ऐसा लगता है कि मैं ग़लत रास्ते पर साधना कर रहा था। तो इस संबंध में एक चौपाई आयी है कि शिव जी कहते हैं कि,
उमा कहूँ मैं अनुभव अपना।
सत हरि भजन जगत सब सपना।।
आचार्य… read_more
आचार्य प्रशांत: मन को अगर कुछ भाएगा नहीं तो मन जाने के लिए, हटने के लिए तैयार नहीं होगा। मन हटता ही तभी है जब उसे ऐसा कोई मिल जाता है जो एक सेतु की तरह हो: मन के भीतर भी हो, मन उसे जान भी पाए, मन उसकी प्रशंसा… read_more
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मैं ध्यान नहीं करती। आँखें तो बंद हैं ही, और बंद करके क्या फ़ायदा? कोई साधना भी नहीं करती। साधना और साध्य यदि दो हैं तो गोल-गोल चक्कर काटने से क्या फ़ायदा? बस सत्संग देखना-सुनना, साहित्य पढ़ना, राम कथा, भागवत कथा भाव से सुनना-देखना—इन सब में शांति… read_more
ज्यों जग बैरी मीन को आपु सहित बिनु बारि। त्यों तुलसी रघुबीर बिनु गति आपनी बिचारि।। ~ संत तुलसीदास
आचार्य प्रशांत: तुलसी का अंदाज़ ज़रा नर्म है। वो इतना ही कह रहे हैं कि मीन का समस्त जग बैरी है, यहाँ तक कि वह स्वयं भी अपनी बैरी है। वो… read_more
नाम राम को अंक है, सब साधन है सून।
अंक गए कुछ हाथ नहिं, अंक रहे दस गून।।
आचार्य प्रशांत: तुमने अपनी ज़िंदगी में जो इकट्ठा किया है, सब ‘सून' है। अब सून को सूना मानो चाहे शून्य मानो—असल में दोनों एक ही धातु से निकलते हैं।… read_more
सुनहु राम स्वामी सन चल न चतुरी मोरि।
प्रभु अजहुँ मैं पापी अंतकाल गति तोरी।।
आचार्य प्रशांत: विचित्र लीला है। कहीं से आते नहीं हम और न कहीं को चले जाते हैं। मध्य में वो है जिसे हम कहते हैं कि 'हम' हैं। जन्म से पहले तुम… read_more
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, क्या प्रभु श्रीराम को भी सामान्य व्यक्ति की तरह दुःख का अनुभव होता था?
आचार्य प्रशांत: प्रश्न है कि अनेक कहानियाँ कहती हैं कि राम को भी चोट लगती थी। ख़ास तौर पर सीता के वन-गमन के पश्चात राम भी उदासी में जीने लगे थे। मानने वालों… read_more
जद्यपि जनमु कुमातु तें, मैं सठु सदा सदोस।
आपण जानि न त्यागहहिं, मोहि रघुबीर भरोस।।
आचार्य प्रशांत: कोई-कोई ही नहीं होता जिसका जन्म कुमाता से होता है। अगर आप इस श्लोक को सिर्फ प्रकरण के संदर्भ में देखेंगे तो आपको ऐसा लगेगा जैसे कि किसी पात्र-विशेष ने… read_more
आचार्य प्रशांत: इतना तो हम सभी जानते हैं कि राम के स्पर्श ने रामबोला को तुलसीराम और तुलसीराम को तुलसीदास बना दिया। लेकिन याद रखना होगा कि जैसा भक्त होता है, वैसा ही उसका भगवान भी होता है। भगवान तो भक्त को रचता ही है, भक्त के हाथों भी भगवान… read_more
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, जब सीता और हनुमान दोनों ही राम तक पहुँचने के मार्ग हैं, तो इनमें मूलभूत रूप से क्या अंतर है?
आचार्य प्रशांत: एक है अपने को मिटा देना, और दूसरा है अपने को मिला देना।
मिटा देना ऐसा है कि जैसे कोई सपने से उठ गया हो,… read_more
तव माय बस फिरऊॅं भुलाना ।
ताते मैं नहिं प्रभु पहिचाना ।।
आचार्य प्रशांत: "तव माय", तुम्हारी माया। "बस फिरऊॅं भुलाना", उसी के वश होकर भूला-भूला सा, भटका-भटका सा फिर रहा हूँ। "ताते", उस कारण। "मैं नहिं प्रभु पहिचाना", मैं प्रभु को पहचान नहीं पाया।
हास्य है… read_more
नामु राम को कलपतरु, कलि कल्यान निवासु।
जो सिमरत भयो भाँग ते तुलसी तुलसीदास।।
आचार्य प्रशांत: राम का नाम 'कल्पतरु' है, कल्पवृक्ष; माँगे पूरी करने वाला, मन चाहा अभीष्ट देने वाला। और कल्याण निवास है, "कल्यान निवासु" – वहाँ पर तुम्हारा कल्याण बसता है। “जो सिमरत भयो"… read_more
तुलसी राम कृपालु सों, कहिं सुनाऊँ गुण दोष।
होय दूबरी दीनता, परम पीन संतोष।।
आचार्य प्रशांतः कृपालु राम के आगे अपने सारे गुण-दोष खोल कर रख दो, कह दो, सुना दो। इससे जो तुम्हारी दीनता है, जो तुम्हारी लघुता है, जो तुम्हारी क्षुद्रता है, वो दूबरी हो… read_more
भगत हेतु भगवान प्रभु राम धरेउ तनु भूप। किए चरित पावन परम प्राकृत नर अनुरूप।।
आचार्य प्रशांत: भक्तों के हित की ख़ातिर ही, राम-ब्रह्म (ब्रह्म-राम) ने मनुष्य राम का शरीर-रूप धारण किया, और धरती पर मनुष्य-संबंधी, मनुष्य के तल पर बहुत सारी लीलाएँ करीं।
खोट मत ढूँढने… read_more
तुलसी ममता राम सों सकता सब संसार।
राग न द्वेष न दोष दु:ख दास भए भव पार।।
आचार्य प्रशांत: राम से ममता, संसार में समता।
संसार में कुछ ऐसा नहीं जो कुछ दे सकता है, और कुछ ऐसा नहीं जो कुछ ले सकता है, तो यहाँ तो… read_more
प्रश्नकर्ता: सर नमस्कार! रामायण और महाभारत में जो कहानियाँ हैं, क्या वो सत्य घटनाओं पर आधारित हैं?
आचार्य प्रशांत: घटनाएँ सत्य या असत्य नहीं होतीं, घटनाएँ तथ्य कहलाती हैं। ठीक है?
उदाहरण के लिए - कोई एक घर से निकला और सड़क का इस्तेमाल करके आधे किलोमीटर दूर किसी दूसरे… read_more
प्रश्नकर्ता: जीवन में राम को भुला देने से क्या आशय है?
आचार्य प्रशांत: राम को भूलने से आशय हैं - बहुत कुछ और याद कर लेना।
राम को भूलने से यह आशय है कि –(कमरे की ओर इशारा करते हुए) ये कक्ष है छोटा सा, आपने इसको चीज़ों से इतना… read_more
sir sir rijak sambaahay thaakur kaahay man bha-o kari-aa.
~ Rehraas Sahib, Fifth Mehala (Nitnem)
The Lord and provides sustenance to everyone, then why should you worry my mind?
सिर सिर रिजक सम्बाहयठाकुर कहाय मन भाओ करीआ
~ रहरास साहिब, पाँचवा महला… read_more
जे मोहाका घरु मुहै घरु मुहि पितरी देइ ॥Je mohākā gẖar muhai gẖar muhi piṯrī ḏee.The thief robs a house, and offers the stolen goods to his ancestors.
अगै वसतु सिञाणीऐ पितरी चोर करेइ ॥Agai vasaṯ siñāṇīai piṯrī cẖor karei.In the world hereafter, this is recognized,… read_more
ऊडे ऊडि आवै सै कोसा तिसु पाछै बचरे छरिआ ॥Ūde ūd āvai sai kosā ṯis pācẖẖai bacẖre cẖẖariā.The crane flies hundreds of miles, leaving its young one behind.
तिन कवणु खलावै कवणु चुगावै मन महि सिमरनु करिआ ॥३॥Ŧin kavaṇ kẖalāvai kavaṇ cẖugāvai man mėh simran kariā. ||3||… read_more
गोबिंद मिलण की इह तेरी बरीआ ॥Gobinḏ milaṇ kī ih ṯerī barīā.This is your chance to meet the Lord of the Universe.
अवरि काज तेरै कितै न काम ॥Avar kāj ṯerai kiṯai na kām.Other efforts are of no use to you.
मिलु साधसंगति भजु केवल नाम… read_more
एह वसतु तजी नह जाई नित नित रखु उरि धारो ॥
Ėh vasaṯ ṯajī nah jāī niṯ niṯ rakẖ ur ḏẖāro.
This thing can never be forsaken; keep this always and forever in your mind.
Raag Mundaavanee, Fifth Mehl
Rahras Sahib, Nitnem (Guru Granth Sahib, Page 1429)
Question: Pranaam… read_more
अउध घटै दिनसु रैणारे ॥मन गुर मिलि काज सवारे ॥१॥ रहाउ ॥जा कउ आए सोई बिहाझहु हरि गुर ते मनहि बसेरा ॥
~ राग गौरी पूरबी, पाँचवा महला, सोहिला साहिब
Translation:
The life passes day and night.My mind, meet the Guru so that he sets things right.… read_more
घड़ीआ सभे गोपीआ पहर कंन्ह गोपाल ॥Gẖaṛīā sabẖe gopīā pahar kanĥ gopāl.All the hours are the milk-maids, and the quarters of the day are the Krishnas.
गहणे पउणु पाणी बैसंतरु चंदु सूरजु अवतार ॥Gahṇe pauṇ pāṇī baisanṯar cẖanḏ sūraj avṯār.The wind, water and fire are the… read_more
Dhhoop Malaaanalo Pavan Chavaro Karae Sagal Banaraae Foolanth Jothee ||1||
The fragrance of sandalwood in the air is the temple incense, and the wind is the fan.
All the plants of the world are the altar flowers in offering to You,
O Luminous Lord. ||1||
~Aarti, Guru Granth Sahib
Questioner:… read_more
ए मन चंचला चतुराई किनै न पाइआ ॥चतुराई न पाइआ किनै तू सुणि मंन मेरिआ ॥एह माइआ मोहणी जिनि एतु भरमि भुलाइआ ॥माइआ त मोहणी तिनै कीती जिनि ठगउली पाईआ ॥कुरबाणु कीता तिसै विटहु जिनि मोहु मीठा लाइआ ॥कहै नानकु मन चंचल चतुराई किनै न… read_more
He himself acts, and he himself contemplates.He Himself is the Master of both worlds. He plays and He enjoys; He is the Inner-knower, the Searcher of hearts. As He wills, He causes actions to be done. Nanak sees no other than Him. ||2||
Tell me – what can a… read_more
Mortals wander lost and confused through countless lifetimes; their fear of death is never removed. Says Nanak, vibrate and meditate on the Lord, and you shall dwell in the Fearless Lord. ||33||
I have tried so many things,but the pride of my mind has not been dispelled.I am engrossed in… read_more
In good times, there are many companions around, but in bad times,there is no one at all.Says Nanak, vibrate, and meditate on the Lord;He shall be your only Help and Support in the end. ||32||
~ Guru Tegh Bahadur Ji, Salok Mahalla
Guru Granth Sahib Ji, Ang… read_more
People make all sorts of efforts to find peace and pleasure, but no one tries to earn the pain.
Says Nanak, listen, mind: whatever pleases God comes to pass. ||39||
Guru Granth Sahib Ji, Ang 14128
Question: Acharya Ji, please clarify what is… read_more
Question: Acharya Ji, Pranaam! While reading and meditating on Nitnem, something happened within me which is difficult to explain. And this happening is same while we were reading Ashtavakra Gita and Upanishads.
These words do not create any images, but they take away my chains and cut me down. Whatever… read_more
जो किछ कराय सो भला कर माने-ई हिकमत हुक्म हुक्म चुकाइये
~ तिलांग, पहला महला, शब्द हज़ारे (नितनेम)
Those God-Oriented people will tell that to attain God, we should accept as good whatever He does, and stop our own cleverness and will.
~ Tilang, 1st Mehla, Shabad Hazare (Nitnem)
Question:… read_more