

श्रोत १: आचार्य जी, एक प्रश्न इसके अनुवाद में था, लिखा था, कोई उसकी शक्ति का गुणगान करे, ये शक्ति किसके पास है?
आचार्य जी: नहीं, वो ठीक है। वो अनुवाद में गलती नहीं है। नानक कह रहें हैं कि जिसको मिलता है, वो गाता है। वो सबको दे रहा…

हुकमीहोवनिजिअ
~ जपुजी साहिब
वक्ता: “हुकमीहोवनिजिअ,“

सालाही सालाहि एती सुरति न पाईआ
-नानक
अनुवाद: बिना बोध के सराहने से सुरति न सधेगी|

वक्ता: खिंथा कालु कुआरी काइआ जुगति डंडा परतीति|
मौत को हमेशा याद रखो| मौत की स्मृति को ऐसे पहनो, जैसे तुम अपना पैबंद लगा लिबास पहनते हो| अपने कुंवारेपन को, लिये-लिये जियो| वही रास्ता है तुम्हारा| रास्ते पर चलने का सहारा, जो डंडा लेकर के चलते हो, रास्ते पर चलने…

वक्ता: जो तुधु भावै साई भली कार ||
जो तुझे भाता है, वही भला है| जो तुझे भाता है, सो ही भला है|
क्या भाता है उसे? क्या भाता है उसे?

वक्ता: जानो कि तुम जो भी कुछ कह रहो, ‘उसी’ का कह रहे हो, ‘उसी’ को कह रहे हो और ‘उसी’ में कह रहे हो। तुम जब गाय की बात कर रहे हो तो वास्तव में तुम गाय की नहीं ‘उसकी’ बात कर रहे हो| तुम जब यहाँ से इस…


श्रोता १: कॉनशसनेस (चेतना)।
वक्ता: जीव का अर्थ होता है – वो, जो संसार को संसार देखे; सो…
dfbjdsh

अब देखिएगा, क्या हो रहा है। कोई कृतज्ञ कब अनुभव करेगा? जब पहले उसकी हालत ख़राब हो और कोई बचाए। आपके भीतर अभी यह इच्छा शेष है कि आप कृतज्ञ अनुभव करती रहें और कृतज्ञता अनुभव करने के लिए ज़रूरी है कि कुछ गड़बड़ हो और फिर उस गड़बड़ से आप उबार ली जाएँ। तो फिर आप कृतज्ञ अनुभव करेंगी कि, अरे, मेरा सौभाग्य कि मुझे किसी ने बचा लिया।

कृष्ण का खुद ऊँचा होना, कृष्ण के पूरे जीवनवृत्त में, उनकी ज़िंदगी की जो पूरी कहानी है उसमें और श्री कृष्ण की प्रेमकथा में एक सूत्र है जो साझा पिरोया हुआ है। गीता की ऊँचाई, कृष्ण के जीवन की ऊँचाई, और कृष्ण के प्रेम की ऊँचाई तीनों एक हैं। ऐसा नहीं हो सकता कि कृष्ण बहुत ऊँचे हों और उनका प्रेम निचले तल का हो जाए। ये संभव नहीं है।

श्रद्धावान् लभते ज्ञानं तत्पर: संयतेन्द्रिय: | ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति || ४, ३९ || जितेन्द्रिय, साधनापरायण और श्रद्धावान मनुष्य ज्ञान को प्राप्त होता है तथा ज्ञान को प्राप्त होकर वह बिना विलम्ब के तत्काल ही भगवत्प्राप्तिरूप शान्ति को प्राप्त हो जाता है। —श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय ४, श्लोक ३९प्रश्नकर्ता: आचार्य जी,…

पारस में अरु संत में, बड़ो अन्तरो जान। वो लोहा कंचन करे, ये कर दे आप समान।।~कबीर साहब प्रश्नकर्ता: जैसा कि आप कहते हैं, कि जितना जल्दी हो सके अपने को पूरा अर्पण कर दो, या ख़त्म कर दो, पर यदि इसे समझेंगे और करेंगे, तो अपने अपूर्ण स्थिति…

प्रश्नकर्ता: नमस्कार, सर। आज का सबसे पहला प्रश्न जो है वह सनातन के ऊपर है कि सनातन माने क्या? और ऐसा क्या है जिसको वास्तविक रूप में सनातन कहा जा सकता है?
आचार्य प्रशांत: देखिए, सनातन का अर्थ होता है वो जो काल की सीमाओं से के बाहर का हो।…

प्रसंग:
भारत या इंडिया? इंडिया से नाम बदलकर भारत रखना चाहिए क्या? क्या इंडिया नाम विदेशियों ने दिया है? क्या है इंडिया और भारत का इतिहास? क्या देश का नाम बदलना आवश्यक है? कॉलोनाइजेशन और डी-कॉलोनाइजेशन क्या हैं? क्यों कहा जाता है कि भारत का कॉलोनाइजेशन हुआ है? भारत को…

◾ एक ही जाति होती है - वह है "बल"। बल विकसित करो अपने भीतर।
◾ आत्मा का इस पूरे देह व्यापार से कोई लेना देना ही नहीं।
◾ मिथ्याचारी वह है जो आगे के लालच में अच्छा काम करता है।
◾ आत्मा का विकृत सिद्धांत ही भारत की दुर्दशा…


प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, जो आत्मबल है उसमें आत्म का तो पता है, पर यह बल कहाँ से आएगा?
आचार्य प्रशांत: आत्मा का बल कभी आत्मा स्वयं प्रदर्शित करने नहीं आती। वो अपना बल किस पर प्रदर्शित करे, उसके अतिरिक्त तो कुछ है नहीं। तो आत्मा कभी स्वयं नहीं आएगी अपने…

यदा नाहं तदा मोक्षो
यदाहं बन्धनं तदा।
मत्वेति हेलया किंचिन्-
मा गृहाण विमुंच मा॥८- ४॥
अनुवाद: जब तक 'मैं' या 'मेरा' का भाव है तब तक बंधन है, जब 'मैं' या 'मेरा' का भाव नहीं है तब मुक्ति है। यह जानकर न कुछ त्याग करो और न कुछ ग्रहण ही…

भारतीयों को शायद यह लगता है कि हिंदुस्तान से बाहर जहाँ कहीं कोई मिलेगा वह ‘अंग्रेज़ी’ ही बोल रहा होगा। एक तो यह बहुत बड़ी ग़लतफ़हमी है – बाहर जैसे ही हम निकलेंगे वैसे ही जो मिल रहा होगा अंग्रेज़ी ही बोल रहा होगा। हिंदुस्तान बेचारा बस पिछड़ा हुआ है,…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, जैसे मैं पहले किसी सत्संग में जाती थी, वहाँ पर कुछ बातें बतायी जाती थीं। अष्टावक्र गीता पर आपने बताया कि आज यहाँ पर उसकी उपयोगिता नहीं है। और अष्टावक्र जी ने जैसे बताया है कि ब्रह्म-ही-ब्रह्म है, आत्मा-ही-आत्मा है। तो अभी कुछ दिन पहले मैं अपने…

प्रश्नकर्ता: प्रणाम, आचार्य जी। बहुत बहुत धन्यवाद। आपके कोर्सेज़ को मैं यूट्यूब पर भी सुने हैं। कुछ मैंने ऑनलाइन सत्र भी अटेंड किए है।
मेरा जो प्रश्न है वो ये है कि मेरा मोटिवेशन लेवल बहुत फ्ल्कचुएट(ऊपर-नीचे) होता है। दिन में ही कई बार बहुत डिप (नीचे) में भी…

लड़का-लड़की पंद्रह साल के हुए नहीं कि माँ-बाप बन सकते हैं, फिर? बहुत अक्ल आ जाएगी उनमें? और फिर जो बच्चा पैदा हो उसको सिखाएँ कि, “यह देवी-देवता हैं, हमने पैदा किया है।“ वह देवी-देवता ने नहीं पैदा किया है, वह पैदा इसलिए हो गया था क्योंकि देवी जी बहकी…

ना ब्रह्म से मतलब, ना गीता से मतलब, ना उपनिषदों से मतलब। अंधविश्वासों से मतलब है, कुट्टू के आटे से मतलब है।
"क्या चबा रही हो भाभी?" कहेंगी, "ये फलाहारी लड्डू हैं।" ये फलाहारी लड्डू कौन-से होते हैं? अब यह धार्मिकता का प्रमाण दिया जा रहा है कि, "हम फलाहारी…

“ओ ले-ले-ले! मेला शोमू कितना स्टुपिड है!" अरे! स्टुपिड (मूर्ख) है तो यह बोलने के लिए भी काहे को रुकी कि शोमू स्टुपिड है? भाग! जान बचाकर भाग। पर शोमू क्यूट ही इसीलिए है क्योंकि वह स्टुपिड है। अजीब बात है! तुमको पता है वह स्टुपिड है पर तुम तब…

अभी एक पिक्चर देखी ‘छिछोरे’, आईआईटी बॉम्बे पर आधारित है वो। कैंपस में चालीस लड़कों पर एक लड़की है। लेकिन वो जो लड़की है उसका कहानी में जो कुल योगदान है वो यही है कि वो सुंदर-सुंदर है और सब लड़के उसके पीछे पड़े हैं।
तो पूरी कहानी में लड़कों…

देखिए यही एकमात्र तरीका है ये अपनी छोटी-सी ज़िंदगी सही तरीके से जीने का – जो सही है वो करना। हथियार डाल दो, मजबूर हो जाओ, बिलकुल समर्पण कर दो कि जो सही काम है वो तो करना ही है, अंजाम क्या होगा ना हम जानते हैं, ना हमें परवाह…

तुम्हारे सामने पहलवान खड़ा हो लड़ाई के लिए, और तुम उस वक़्त कहो कि, “मैं अब ज़रा दंड-बैठक करता हूँ, शरीर बनाता हूँ”, तो तुम पिटोगे ही नहीं, बहुत बुरी तरह पिटोगे!
एक सज्जन थे, उन्हें सलाह दी गई थी कि, ‘साहब! आपका कॉलेस्ट्रॉल बहुत बढ़ गया है, तो आप…

आज से १ लाख वर्ष पीछे जाओ तो अरबों-खरबों जानवर थे, हज़ारों-लाखों प्रजातियों के; और मनुष्य थे कुछ लाख, अधिक-से-अधिक। अब आदमी हो गए हैं ८ अरब और जानवर बचे हैं (हाथों से कम मात्रा दर्शाते हुए) इतने से!
साहब!
जानवर भी कौन से बचे हैं बताइए? जो मनुष्य के…

बहुत लोग मिलेंगे कहेंगे, "अरे, अरे! बहुत बड़ी बातें मत करो, हमें समझ में नहीं आती हैं। यह तुम क्या गीता उपनिषद् लेकर बैठ जाते हो, भइया! हम बड़े सीधे, सरल आदमी हैं, हमें यह सब बातें समझ में नहीं आती; आलू, टिंडा बताओ न?"
जो कोई तुमसे यह बोले…

नकली चीज़ों का बाज़ार देखो, कई बार असली वस्तु से ज़्यादा गर्म होता है। और जो ख़रीदने वाले हैं वह जानते हैं कि मामला नकली है पर ख़रीदते हैं। भारत में रे-बैन के असली चश्मे कितने बिकते हैं, मुझे नहीं पता, नकली घर-घर में हैं। और ऐसा थोड़े-ही है कि…

प्रश्नकर्ता: अंडा तो वेजिटेरियन (शाकाहारी) ही है, अंडा से तो होता है नॉन- फर्टीलाइज़्ड, चूजा तो निकलेगा नहीं।
आचार्य प्रशांत: बात ये थोड़े ही है कि वह पेड़ पर लटका मिला कि नहीं लटका मिला। यह भी तो देखो वह अंडा आया कहाँ से, मुर्गी स्वेच्छा से आकर के…

लोग कहते हैं सच्चा प्यार मिलता नहीं, मैं कहता हूँ सच्चा प्यार तुमसे बर्दाश्त होता नहीं। मिल तो आज जाए, झेल लोगे? बड़े अफ़साने लिखे जाते हैं, शायरों की दूकान ही चल रही हैं इसी बात पर कि ‘हम तो बड़े क़ाबिल थे पर कमबख़्त ज़िंदगी ने धोखा दे दिया,…

यह एक बड़ा भ्रम कि जल्दी से शादी कर लो और शादी करने से दूसरा व्यक्ति ज़िम्मेदार हो जाएगा। जो माँ-बाप कहते हैं, “ये बड़ा उद्दण्ड है, लड्डू। गाँव भर में लुढ़कते फिरता है लड्डू। तो लड्डू को ज़िम्मेदार बनाने के लिए लड्डू की शादी कर देते हैं।” घर में…

चेतना ना बचे उसके बाद देह का हश्र भी देखा है? दो दिन पुराना मुर्दा भी देखा है, कैसा हो जाता है? यह है इस देह की औक़ात। बड़ी सुंदरता निखारते फिरते हो! यह जितने प्रेमी घूम रहे हैं, देह के, यह पास आने से घबराएँगे।
मर जाओगे उसके ४…

यह जगत तो लाभ का सौदागर है। वो आप से नहीं प्रेम करता; आपसे जो मिल रहा है उसे से प्रेम करता है। और इस बात का बड़ा कड़वा अनुभव आपको तब होता है जब आप देना बंद कर देते हैं। आप तो यही सोचते रह गए कि उस व्यक्ति…

लड़के अगर बेरोज़गार हों और शादी के लिए लालायित हो जाएँ तो तुम कहोगे, “छी! कमाता ना धमामा, शादी करने चला है!”
और लड़कियों से यह बात तुम बोलते नहीं। क्योंकि लड़कियाँ तो गाय हैं, उन्हें कमाना-धमाना थोड़े ही है। उन्हें तो घर में बैठकर बछड़े जनने हैं।
जब बहन…

हार मोतियों का हज़ार बार भी टूटेगा तो उसे तुम हज़ार बार जोड़ोगे, बार-बार जोड़ो! सुजन अगर रूठ जाएँ, तो बार-बार मनाओ क्योंकि उनसे प्यास बुझती है।
पर जिससे प्यास बुझती ना हो, उससे बस आदतवश जुड़े हो, भ्रमवश, धारणावश जुड़े हो, इसलिए जुड़े हो कि बीस साल से जुड़े…

आप खाना खा रहे हों, कोई आ जाए कहे, “खाना दे दो।“ आप उसको आधा भी मत दीजिए, पूरा ही दे दीजिए। पर कोई आ करके आपसे आपकी आज़ादी ही माँगने लग जाए तो इतनी-सी भी मत दीजिएगा। थाली और आज़ादी में कुछ तो अंतर होगा।
आपके पास चार रोटी…

ये ब्रेकअप होता क्या है? तुम्हें अगर प्रेम है तो क्या तुम तय करके किसी से दूर हो सकते हो? कर कैसे लोगे? ये बात तो हृदय की होती है, आत्मा की होती है। तुम तय थोड़े ही करोगे कि कल से इससे बात नहीं करनी है क्योंकि हमारा ब्रेकअप…

प्रश्नकर्ता: अगर दूध का आप बहिष्कार करते हैं तो गाय की बिलकुल ही बेकद्री हो जाएगी।
आचार्य प्रशांत: ये बात पता नहीं क्यों हमारे दूध पीने वाले भाई-बहन सोचते ही नहीं बिलकुल कि जिस दिन गाय ने दूध देना बंद कर दिया उस दिन वो गाय पालने वाले के लिए,…

इस युग का सबसे केंद्रीय प्रश्न है ये कि, “बीबा हॉट है कि शीबा?” और आप सही चुनाव कर सकें इसके लिए आपको दोनों की एक नहीं चालीस-चालीस तस्वीरें दिखाई जाएँगी। किसकी कमर कैसी है, किसकी जाँघें कैसी हैं, किसका वक्ष कैसा है, और नज़दीक से देखो ताकि तुम्हारा निर्णय…

ये तुम्हारी ज़िन्दगी को समझने की उम्र है। कहाँ तुम ये रिश्तेबाज़ी में फँस रही हो? उसके लिए बहुत समय पड़ा है। पहले थोड़ा मन को जान लो, जीवन को जान लो। समझ तो लो तुम्हारे भीतर वो कौन-सी वृत्ति बैठी है जो खिंची जा रही है लड़कों की ओर।…

जितनी ज़िन्दगी जी चुके हैं ये देखा है कैसे पालक झपकते बीत गयी है? अभी स्कूल में थे, कॉलेज में थे, और अभी बच्चे थे आप, यूँ ही मैदान में, गलियों में दौड़-भाग रहे थे। अभी-अभी! ये जो समय बीता है ये कैसे बीता है? ये चुटकी बजाते बीता है।…

बहुत सारा मेडिटेशन वगैरह वही है जो आपको झटका नहीं खाने देगा। ज़िन्दगी बर्बाद चल रही है, सबकुछ आपका ग़लत है, लेकिन सुधरने की कोई ज़रूरत नहीं। आधे-एक घण्टे बैठ करके गाइडेड मेडिटेशन कर लो, वहाँ तुमको गुरुजी कान में बता देंगे कि तुम एक सरोवर के किनारे बैठे हो,…

किसी की कदर तुम कर रहे हो किसी स्वार्थ की ख़ातिर, ठीक? इसको कहते हैं भाव देना। तुम उसे भाव दिए जा रहे हो, भाव दिए जा रहे हो और वो और ऐंठता जा रहा है, ऐंठता जा रहा है। एक बिंदु तो आता है जब तुम कहते हो, “धत्त…

हिंदुस्तान में अभी भी दो जगह हैं जहाँ पर लडकियाँ बहुत कम पायी जाती हैं – लड़कियाँ, स्त्रियाँ सब – एक, श्मशान घाट, दूसरा, सत्संग। दोनों ही जगहों पर सच दिख जाता है न, और दोनों ही जगहों पर देह की नश्वरता दिख जाती है न। समाज नहीं चाहता है…

हम दूसरे की ज़िंदगी में घुसकर के उसको शांत नहीं करते, जो थोड़ी बहुत शांति उसके पास रही भी होती है पहले से, हम उसकी वो शांति भी लूट लेते हैं; मैं इसलिए कह रहा हूँ कि मत घुसो दूसरे के जीवन में।
तुम अगर वाकई ईमानदारी से यह सोचते…

“बिलकुल एकदम बढ़िया आदमी हैं, रोज़ रात में सो जाते हैं दस बजे और सुबह ठीक पाँच बजे इनकी आँख खुल जाती है।“ करोगे क्या दस बजे सो कर और पाँच बजे आँख खोल कर? एक दिन तो ऐसा आएगा जब आँख खुलनी ही नहीं है। तब बता देना भैंसे…

सब पुरुषों के लिए निश्चित होना चाहिए कि स्त्रियों के ब्यूटी पार्लर में कम-से-कम तीन महीने काम करें। यह व्यवस्था बननी चाहिए। जाकर देखो तो कि जिस रूप-यौवन के पीछे तुम इतने पागल रहते हो उसकी हकीक़त क्या है। जितने फल और सब्जियाँ रसोई में नहीं पाए जाते उससे ज़्यादा…