Description enwcoiew fkwsc J. Krishnamurti.
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
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ग्रेटर नोएडा। जीबीयू में आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे आचार्य प्रशांत ने कहा कि महाशिवरात्रि केवल अनुष्ठान का पर्व नहीं, बल्कि यह मनुष्य को अपने भीतर झांकने के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि शिव को केवल मूर्ति या रूप में सीमित कर देना उनकी व्यापकता को संकुचित करना…



प्रश्नकर्ता: कृष्णमूर्ति साहब सभी वृत्तियों, विचारों, भावनाओं वगैरह को बिना निर्णय के देखने को कहते हैं। ये मुझे असंभव लगता है। किसी भी विचार या भावना के उठते ही मैं या तो उसके पक्ष में हो जाता हूँ या विपक्ष में। कृपया समझाएँ।

सुबह उठते ही, "जानू उठ गई? जानू टट्टी कर ली, ब्रश कर लिया? नाश्ते में क्या खा रही हो? क्यों खा रही हो? खा ही क्यों रही हो, पी क्यों नहीं रही? जानू पैरों से चल रही हो? सर के बल क्यों नहीं चल रही?"

प्रश्नकर्ता: कृष्णमूर्ति कहते हैं कि “हम ‘*अननोन*’ (अज्ञात) से तो डरते ही हैं, और तो और, हम ‘*नोन*’ (ज्ञात) से भी डरते हैं।”
ऐसा क्यों?
आचार्य प्रशांत: वास्तव में जो अननोन भी है, वो है तो मानसिक ही न। मन, अननोन भी जब कहता है तो अननोन की एक छवि…

प्रश्नकर्ता: गिरते हुए समाज में मेरा सही कर्म क्या है?
आचार्य प्रशांत: समाज या दुनिया क्या है? हम हैं, आप हैं; जैसे हम हैं, आप हैं, वैसा ही संसार है। अगर आप समाज को और संसार को गिरता हुआ पाते हैं, तो उसका कारण यही है कि इंसान गिर रहा…

सब प्रेमियों की निशानी है – दो-दो, चार-चार घण्टे लगे हुए हैं फ़ोन पर। और फ़ोन पर नहीं तो आमने-सामने बैठकर एक-दूसरे का भेजा चबा रहे हैं। और मजाल है कि उधर से कचरा फेंका जा रहा है और तुम इधर से फ़ोन काट दो। बेवफ़ा कहलाओगे। कितना मज़ा आता…

तुम अभी नये-नये किसी नौकरी में लगे हो और जहाँ तुम्हारी कोई हैसियत नहीं, औकात नहीं, आमदनी नहीं, तुमने अभी कुछ सीखा नहीं, कोई तरक्की नहीं करी, कोई पहचान नहीं बनायी, ना ज्ञान अर्जित किया। ना तुम अभी सामाजिक दृष्टि से कुछ हो, ना आंतरिक, आध्यात्मिक दृष्टि से कुछ हो…