India
भारत या इंडिया? (और मानसिक गुलामी के 5 लक्षण) || आचार्य प्रशांत (2023)
प्रसंग:
This article has been created by volunteers of the PrashantAdvait Foundation from transcriptions of sessions by Acharya Prashant

◾ एक ही जाति होती है - वह है "बल"। बल विकसित करो अपने भीतर।
◾ आत्मा का इस पूरे देह व्यापार से कोई लेना देना ही नहीं।
◾ मिथ्याचारी वह है जो आगे के लालच में अच्छा काम करता है।
◾ आत्मा का विकृत सिद्धांत ही भारत की दुर्दशा…

