अगर आँसू सच्चे हैं तो उनका संबंध उत्सव और आनंद से है, उनका संबंध जाते हुए दुःख से है। आँसुओं के अर्थ ये नहीं है कि तुम दुखी हो, आँसुओं का अर्थ भी हो सकता है कि तुम आनंदित हो। मुक्त अनुभव कर रहे हो, भीतर की जकड़ को छोड़ने के लिए।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
अगर आँसू सच्चे हैं तो उनका संबंध उत्सव और आनंद से है, उनका संबंध जाते हुए दुःख से है। आँसुओं के अर्थ ये नहीं है कि तुम दुखी हो, आँसुओं का अर्थ भी हो सकता है कि तुम आनंदित हो। मुक्त अनुभव कर रहे हो, भीतर की जकड़ को छोड़ने के लिए।
जैसे किसी ने कलेजा भींच रखा हो, और फिर जरा तुम तनाव मुक्त हो जाओ, जरा तुम आश्वस्त और स्वतंत्र अनुभव करो। और जिस चीज़ ने भींच रखा है, उसको तुम छोड़ दो, या वो तुम्हें छोड़ दे। ऐसा है आँसुओं का निकलना। तनाव में शरीर भी कैसा अकड़ जाता है। पाँव का अंगूठा यूँ मुड़ जायेगा, मुट्ठियाँ भिंच जाएँगी। और जब तनाव जाता है, एक सहज सुरक्षा की आश्वस्ति उठती है, तो वो सारी जकड़ खुल जाती है, जरा विश्राम मिल जाता है।
अस्तित्वगत रूप से खूबसूरत बात है आँसुओं का बहना। तुम्हारी मनुष्यता का प्रतीक है, पशु नहीं रोते। लेकिन सांस्कृतिक रूप से रोना एक वर्जना है, अस्तित्व नहीं कहता कि मत रोओ। समाज कहता है, संस्कृति कहती है। कि मत रोओ। और फिर चूंकि वो कहती है मत रोओ, तो रोने के विपरीत जो उसको लगता है उसपर महत्व रखती है।
समाज कहता है कि हर समय, तुम मुस्कुराते नजर आओ। और ये बात भारतीय भी नहीं है, तुम राम को, कृष्ण को मूर्तियों में भी मुस्कुराता नहीं पाओगे। ये बात बड़ी पाश्चात्य है। इन्होंने मुस्कान चिपका रखी होती है। क्योंकि ये डरे हैं, आतंकित हैं, इन्हें रोने से बहुत डर लगता है। और वह रो भीतर रहे हैं। उस रूदन को, उस क्रंदन को, छुपाने के लिए वह मुस्कुराहट का चोला ओढ़ते हैं।




