
आचार्य प्रशांत ने लोकदेश में लिखा है कि जैसे किसी ने कलेजा भींच रखा हो, और फिर जरा तुम तनाव मुक्त हो जाओ, जरा तुम आश्वस्त और स्वतंत्र अनुभव करो। आंसू अगर सच्चे हों तो भीतर आनंद ही आनंद है। उन्होंने यह बताने का प्रयास किया है कि वास्तविक भावनाएं और सच्ची भावुकता ही हमें आंतरिक शांति और सुख प्रदान कर सकती हैं। सच्चे आंसू एक ऐसी स्थिति को दर्शाते हैं जहां दिल हल्का होता है और मन को गहरा संतोष मिलता है।