समय, साधना और सुरति || आचार्य प्रशांत, गुरु नानकदेव पर (2014)

वक्ता: खिंथा कालु कुआरी काइआ जुगति डंडा परतीति|
मौत को हमेशा याद रखो| मौत की स्मृति को ऐसे पहनो, जैसे तुम अपना पैबंद लगा लिबास पहनते हो| अपने कुंवारेपन को, लिये-लिये जियो| वही रास्ता है तुम्हारा| रास्ते पर चलने का सहारा, जो डंडा लेकर के चलते हो, रास्ते पर चलने का सहारा रहे- उसकी निरंतर प्रतीति| संतों के कहने का तरीका है, लाक्षणिक बातें हैं| मीठी बोली है|
जिन शब्दों पर ध्यान देना है, वो हैं कि “मृत्यु का स्मरण सदा बना रहे”, पहला| दूसरा, “तुम्हारा कुंवारापन अछूता रहे”| तीसरा, “सदैव उसकी प्रतीति होती रहे”| इन्हीं तीन को पकड़ो| पहले को लेते हैं,
मृत्यु का स्मरण सदा बना रहे|
क्या है ये बात कि ‘मृत्यु का स्मरण’ बना रहे? संसार देह से बंधा हुआ है| संसार और तुम्हारा नाता, देह का नाता है| ठीक है ना? जो वस्तुएं दिखती हैं, वो देह के समकक्ष हैं| जो विचार उठते हैं, संसार को देख कर, वो मन के समकक्ष हैं| संसार क्या है? वस्तु, और विचारों का विषय| तो देह और मन| मूलतः देह का नाता है| तुम संसार से बहुत आसक्त तभी हो सकते हो, जब तुम देह की प्रकृति को भूल जाओ| ज्यों ही तुम्हें ये याद आएगा कि ये देह ही लगातार विनष्टि की यात्रा पर है, ये देह ही ख़त्म होने को तैयार खडी है, तब संसार कैसे आकर्षित कर पाएगा तुमको? तब तो तुम्हें सत्य के करीब ही जाना पडेगा कि हकीकत क्या है, मामला क्या है असली| चाह कर भी, ये कष्ट भुला नहीं पाओगे कि जिस देह के माध्यम से सारे मेरे सुख, सारी मेरी रोमांचक कल्पनाएं हैं, वो देह बस मेहमान है कुछ दिनों की| अब गई, तब गई|
नानक हों, फरीद हों, कबीर हों, कहते ही रहें हैं कि मौत को याद रखो| कबीर कभी कहते हैं उड़ जाएगा हंस अकेला| कभी कहते हैं कि आया है, सो जाएगा| कभी कहते हैं कि जम के दूत, बड़े मजबूत| बार-बार कहते हैं, बार-बार याद दिलाते हैं| समझना चाहिये हमको कि संतों ने क्यों लगातार मौत की बातें की हैं| क्या वो जीवन विरोधी हैं? क्या संतों को जीवन से कुछ शिकायत है? क्यों हर संत मौत की बात करता ही करता है? इसलिये करता है कि तुम उसमें ना अटक जाओ, जो तुम्हें निराशा के अतिरिक्त और कुछ नहीं दे सकता| जब मौत की बात करते हैं तो उसको हटाते हैं, जो क्षणभंगुर है| जब मौत की बात करते हैं, तो तुम्हें उसके करीब ले आते हैं, जो नित्य है| ज्यों ही देखोगे कि क्या नहीं रहने वाला है, त्यों ही उसकी तलाश शुरू होगी, जो समय की मार से अछूता रह जाएगा, जिसका समय कुछ नहीं बिगड़ सकता, जो अविनाशी है|



