
सही लक्ष्य की खातिर जियो। दिल में एक सही उद्वेश्य होना चाहिए। उसके बाद किसी पॉजिटिव थिंकिंग की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। ये चीज़ इतनी ज़बरदस्त मिल गई है, प्यार हो गया है इससे, अब मजबूर हैं इसके सामने। अब चाहें भी पीछे हटना तो हट नहीं सकते। जब ऐसा हो…

प्रश्नकर्ता: सर नमस्ते, मुझे ये समझने में बड़ी समस्या होती है कि किस पर भरोसा करूँ और किस पर न करूँ।
आचार्य प्रशांत: किसी पर भी भरोसा करने का निर्णय तुम ही करोगे न? और भरोसा नहीं करने का भी निर्णय तुम ही करोगे। तो अंततः तुमने भरोसा किस पर…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आपने अपने एक संवाद में कहा है कि व्यक्तित्व की बात हम इसीलिए करते हैं क्योंकि हम मूलतत्त्व से अनभिज्ञ रहते हैं। मेरा प्रश्न है कि – हम दूसरों के मूलतत्त्व को कैसे देखें?
और दूसरा प्रश्न है कि – किसी के मूलतत्त्व को देखने की कोशिश…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, जब कोई कुछ बोलता है, तो न चाहते हुए भी ‘ना’ नहीं बोल पाता हूँ।
आचार्य प्रशांत: ‘ना’ तो तुम बोलते हो, ऐसा तो नहीं है कि ‘ना’ नहीं बोल पाते।
ऐसा नहीं है। ‘ना’ तो हम बोलते हैं, वहाँ हमारा गणित होता है। हमें अच्छे से

आचार्य प्रशांत: सूफी था एक, उसके घर खाने को ज्यादा रहता नहीं था | बस उतना कि अपना, सुबह खा लिया अपना | शाम की ज्यादा फिकर नही, शाम को मिल गया तो अच्छा, नही मिला तो भी कोई बात नही और जो सूफी साधना है उसमें कम खाने पर…

आचार्य प्रशांत: अच्छा, आप ने एक चीज़ गौर करी है? यूँ ही, कहीं रहो, घर में, बाज़ार में, बोलना आसान होता है। यहाँ आते हैं, शुरुआत में, बोलना थोड़ा सा अटक जाता है और फिर कुछ देर बाद, या आधे घंटे बाद, यहाँ भी बोलना आसान हो जाता है,…

आचार्य प्रशांत: सवाल ये है कि, मैंने कहा है कि जो कुछ भी आप तक पहुँच रहा है उसकी असलियत जानिये। उसका सत्य पहचानिए। सतह पर मत रह जाइए। चीज़ वास्तव में क्या है, इस तक जाइए। तो पूछ रही हैं कि ये कैसे हो? डिकोड (समझा) कैसे करें?…

श्रोता १: सर, मेरी लाइफ में बहुत सारे चिंता के विषय होते हैं जैसे मेरे परिवार में मेरे पेरेंट्स के बीच कुछ हो गया, झगड़ लिए हैं दोनों तो फिर उन दोनों को समझाना है पर वो समझ नहीं रहे । जैसे एक दोस्त है कि जा रहा है खाए…

प्रश्न: अभी हम लोग कार में आ रहे थे तो उसमें ओशो के वचन चल रहे थे। उसमें उन्होंने कहा कि जब आप कभी ज़्यादा सोचते हो, तो आप कहीं नहीं पहुँच पाते। आप जब भी किसी चीज़ को बहुत ज़्यादा सोचोगे, तो आप किसी भी दिशा में आगे कहीं…

प्रश्न : विश्वास क्या है?
वक्ता : विश्वास का अर्थ है- मानना । विश्वास का अर्थ है कहना कि ‘ऐसा है’ । ये जो वाक्य है, ‘ऐसा है’, इसको तीन-चार अलग अलग तलों पर कहा जा सकता है । सबसे नीचे का जो तल है, वो है *‘अंधविश्वास’*। उसके ऊपर…



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\n\n29 अप्रैल से 1 मई, 2022 तक आयोजित हुए वेदांत महोत्सव के एक प्रतिभागी की प्रेरणास्पद कहानी\n\nमेरा नाम राकेश कुमार है। मैं कानपुर नगर से हूँ। पिछले चार माह से मैं हर…

प्रसंग:
भारत या इंडिया? इंडिया से नाम बदलकर भारत रखना चाहिए क्या? क्या इंडिया नाम विदेशियों ने दिया है? क्या है इंडिया और भारत का इतिहास? क्या देश का नाम बदलना आवश्यक है? कॉलोनाइजेशन और डी-कॉलोनाइजेशन क्या हैं? क्यों कहा जाता है कि भारत का कॉलोनाइजेशन हुआ है? भारत को…

◾ एक ही जाति होती है - वह है "बल"। बल विकसित करो अपने भीतर।
◾ आत्मा का इस पूरे देह व्यापार से कोई लेना देना ही नहीं।

प्रश्नकर्ता: मन, आत्मा और मैं, जैसे कि मैं अतृप्त आत्मा हूँ, हम बोलते हैं या मैं बोलता हूँ तो उसमें से, मैं और अतृप्त चेतना हूँ तो…।
आचार्य प्रशांत: सब पता है क्यों मुस्कुरा रहे हैं? क्योंकि अभी मैं गया भी नहीं, और आपने कहानियाँ बना लीं।

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, जैसे मैं पहले किसी सत्संग में जाती थी, वहाँ पर कुछ बातें बतायी जाती थीं। अष्टावक्र गीता पर आपने बताया कि आज यहाँ पर उसकी उपयोगिता नहीं है। और अष्टावक्र जी ने जैसे बताया है कि ब्रह्म-ही-ब्रह्म है, आत्मा-ही-आत्मा है। तो अभी कुछ दिन पहले मैं अपने…


नकली चीज़ों का बाज़ार देखो, कई बार असली वस्तु से ज़्यादा गर्म होता है। और जो ख़रीदने वाले हैं वह जानते हैं कि मामला नकली है पर ख़रीदते हैं। भारत में रे-बैन के असली चश्मे कितने बिकते हैं, मुझे नहीं पता, नकली घर-घर में हैं। और ऐसा थोड़े-ही है कि…

चेतना ना बचे उसके बाद देह का हश्र भी देखा है? दो दिन पुराना मुर्दा भी देखा है, कैसा हो जाता है? यह है इस देह की औक़ात। बड़ी सुंदरता निखारते फिरते हो! यह जितने प्रेमी घूम रहे हैं, देह के, यह पास आने से घबराएँगे।
मर जाओगे उसके ४…

सुबह उठते ही, "जानू उठ गई? जानू टट्टी कर ली, ब्रश कर लिया? नाश्ते में क्या खा रही हो? क्यों खा रही हो? खा ही क्यों रही हो, पी क्यों नहीं रही? जानू पैरों से चल रही हो? सर के बल क्यों नहीं चल रही?"
अभी हॉट है मामला भई!…

आप खाना खा रहे हों, कोई आ जाए कहे, “खाना दे दो।“ आप उसको आधा भी मत दीजिए, पूरा ही दे दीजिए। पर कोई आ करके आपसे आपकी आज़ादी ही माँगने लग जाए तो इतनी-सी भी मत दीजिएगा। थाली और आज़ादी में कुछ तो अंतर होगा।
आपके पास चार रोटी…

जितनी ज़िन्दगी जी चुके हैं ये देखा है कैसे पालक झपकते बीत गयी है? अभी स्कूल में थे, कॉलेज में थे, और अभी बच्चे थे आप, यूँ ही मैदान में, गलियों में दौड़-भाग रहे थे। अभी-अभी! ये जो समय बीता है ये कैसे बीता है? ये चुटकी बजाते बीता है।…

औरतों से मुझे जितनी शिक़ायत है, उतना ही उनको लेकर के दुःख भी है। उनको देखता हूँ, बहुत दुःख लगता है। और शिक़ायत इस बात की है कि वो अपने दुःख का कारण स्वयं हैं। भावना को वो अपना हथियार समझती हैं। देह को वो अपनी पूंजी समझती हैं। देह…
◾ आत्मा का विकृत सिद्धांत ही भारत की दुर्दशा…
अभी एक पिक्चर देखी ‘छिछोरे’, आईआईटी बॉम्बे पर आधारित है वो। कैंपस में चालीस लड़कों पर एक लड़की है। लेकिन वो जो लड़की है उसका कहानी में जो कुल योगदान है वो यही है कि वो सुंदर-सुंदर है और सब लड़के उसके पीछे पड़े हैं।
तो पूरी कहानी में लड़कों…

स्वामी विवेकानंद अनूठे हैं, बहुत कम तुमने साधु-संत-सन्यासी देखे होंगे जो इतने सुघटित सुडौल शरीर के हों, जितने विवेकानंद थे।
खेल की, कसरत की उनकी दिनचर्या में बंधी हुई जगह थी। और यही नहीं कि बस व्यक्तिगत रुप से खेलते थे, अपने साथियों से कहें – व्यायाम आवश्यक है।
जिस…

सब प्रेमियों की निशानी है – दो-दो, चार-चार घण्टे लगे हुए हैं फ़ोन पर। और फ़ोन पर नहीं तो आमने-सामने बैठकर एक-दूसरे का भेजा चबा रहे हैं। और मजाल है कि उधर से कचरा फेंका जा रहा है और तुम इधर से फ़ोन काट दो। बेवफ़ा कहलाओगे। कितना मज़ा आता…

हवाई जहाज का टिकट बुक कराना है और आपका नाम है ‘अमित’ तो आपको 'AMIT' ही लिखना होगा। 'अमित' लिखकर आप हवाई जहाज में यात्रा करके दिखा दीजिए।
आप कह दीजिए कि, “'अ मि त' नाम है मेरा”, तो आप हवाई जहाज में यात्रा नहीं कर पाएँगे।
ट्रेवल बुकिंग, …

हम इज़्ज़त को बहुत बड़ी बात समझ बैठते हैं। हमारे जीवन का, समय का, ऊर्जा का, ध्यान का न-जाने कितना बड़ा भाग सिर्फ़ दूसरों की नज़रों में अपनी छवि चमकाने में लग जाता है, है न?
हमारी एक-एक भावना अन्ततः सिर्फ़ एक उद्देश्य के लिए है – इस शरीर को…

अजीब सी स्थिति ये है कि एक साधारण सी दिखनेवाली लड़की से शायद ज़्यादा मुश्किल है एक सुंदर लड़की की ज़िंदगी। क्योंकि उसके खरीददार बहुत ज़्यादा हैं, और उसे बहुत कुछ मिल जाएगा। और यह जो तुमको बहुत कुछ मिल जाएगा न अपनी सुंदरता के कारण, यही नर्क है तुम्हारा।…

जो भी लोग जीवन में तरक़्क़ी करने को उत्सुक हों, उनको एक बहुत छोटी सी बात बताए देता हूँ। सीढ़ी है, बस जो सामने पायदान है उसपर नज़र रखना। यह कोशिश तो करना ही नहीं कि ऊपर देख रहे हो, कि वह जो बिलकुल आख़िरी तल्ला है सीधे उसपर छलाँग…

बहुत तकलीफ़ हो रही है मुझे यह कहते हुए कि हमारे देश का औसत नौजवान, औसत लड़का, औसत लड़की एक अब औसत पॉर्नस्टार बन चुका है। और बहुत ज़िम्मेदारी के साथ मैं यह बात बोल रहा हूँ। और मैं कुछ गिने-चुने पॉर्नस्टार्स की बात नहीं कर रहा हूँ, मैं इस…

ये जो तुमको ताक़त दी जाती है जवानी में, ये इसलिए है कि इसका इस्तेमाल कर लो और उड़ जाओ। इस्तेमाल नहीं करोगे तो सज़ा ये मिलेगी कि अस्सी साल जीयोगे। अस्सी साल जीने से ज़्यादा भयानक कोई सज़ा हो सकती है? अस्सी चुसे हुए साल और हर बीतते साल…

तुम अभी नये-नये किसी नौकरी में लगे हो और जहाँ तुम्हारी कोई हैसियत नहीं, औकात नहीं, आमदनी नहीं, तुमने अभी कुछ सीखा नहीं, कोई तरक्की नहीं करी, कोई पहचान नहीं बनायी, ना ज्ञान अर्जित किया। ना तुम अभी सामाजिक दृष्टि से कुछ हो, ना आंतरिक, आध्यात्मिक दृष्टि से कुछ हो…

ज़िंदगी में इतनी बड़ी चुनौती अपनाकर तो देखो कि वो तोड़ ही डाले तुम्हें, और फिर पाओगे तुम कि टूटने के बाद भी बचे हो। कुछ है तुम्हारे भीतर जो ऐसा जुड़ा हुआ है कि टूटता नहीं। सबकुछ टूटने के बाद जो बचा रहता है वो असली है। उसका कुछ…

मैं तो ऐसा भी सुन चुका हूँ कि, ”सर मेरी गर्लफ़्रेंड मुझे छोड़ कर चली गई।“ क्यों? “वो मैं हफ़्ते भर से रात को गीता के श्लोक फॉरवर्ड किया करता था व्हाट्सएप पर, वो चाहती थी कि मैं कुछ और भेजूँ उसको रात में होटम-हॉट। मैंने भेज दिए गीता के…

कोई तुम्हें तुम्हारी ग़लती दिखाए और बुरा अगर तुम्हें लगता है, तो तुम जवान कभी-भी होने से रहे। जिसे जवान होना होता है वो अपनी ग़लतियों का सामना करता है। बहुत होते हैं मोटी खाल के बेशर्म टट्टू, उन्हें कोई फ़र्क ही नहीं पड़ता। उन्हें दिख रहा होगा कि ज़िंदगी…

प्रश्नकर्ता: ज़िंदगी में कोई प्रिय है, जिसे हम बहुत ज़्यादा चाहते हैं, उसे हम खो देते हैं – तो वो अच्छा कैसे हो सकता है फिर? आचार्य प्रशांत: वो आपको बताएगा कि आपको जो दुःख हो रहा है, वो आपके प्रिय के साथ आपका जो रिश्ता था, उसकी अपूर्णता का…

मैं वनडे(एक दिवसिय) देखता नहीं, टी-२० देखता नहीं, मैं सिर्फ़ टेस्ट मैच देखता हूँ; वह भी तब जब भारत जाता है – वो ही जो सेना कंट्रीज़ हैं चार, साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूज़ीलैंड, ऑस्ट्रेलिया – और उसमें भी तब देखता हूँ जब टीम की हालत बिलकुल ख़राब हो, क्योंकि…

कोई नहीं किसी पर चिल्ला सकता, कोई नहीं किसी पर हक़ जमा सकता, कोई नहीं किसी पर हाथ उठा सकता, आप ने कभी-न-कभी अधिकार उसको दिया है, और अधिकार तो हमेशा खरीदा ही जाता है। उसने अधिकार खरीदा है आपसे कुछ आपको दे करके। कुछ अधिकार ऐसे होते हैं जो…

तुम वही हो न जो रात में टिकटॉक पर बैठते हो और दो घण्टे लगा देते हो सोने से पहले? ये तुम्हारे समय की कीमत है! तुम्हारे समय की कीमत होती, तो तुम सोशल मीडिया पर इतना समय कैसे लगा रहे होते? तुम्हारे समय की कीमत होती तो तुम अपने…

युवा होने का अर्थ होता है कि सुडौल शरीर हो, चौंड़ी छाती, मज़बूत कंधे और विराट ह्रदय। दुनिया की समझ, दुनिया की सारी क्रांतियाँ जवान लोगों ने करी हैं। और ‘क्रांति’ से मेरा मतलब पत्थरबाजी और हुल्लड़ नहीं है। क्रांति बहुत समझदार लोगों का काम होती है, क्रांति का मतलब…

आचार्य प्रशांत: सिर्फ़ इसलिए कि तुम्हें शरीर मिला है इंसान का तो तुम इंसान नहीं हो गए।
इंसान बस वो है जो चुनौतियों के सामने बिलकुल छाती खोल कर खड़ा हो जाए। कहे, “आओ!” जैसे सुबह हो गई हो, ऊर्जा आ गई हो शरीर में कि सामने चुनौती खड़ी हो…

अध्यात्म यह नहीं कहता कि तुम स्त्री को त्याग ही दो। अध्यात्म इस बात की अक्ल देता है कि कैसी स्त्री की संगति करनी है।
किसने कह दिया कि अध्यात्म ने पाबंदी लगा रखी है स्त्री सहवास पर? कृष्ण को नहीं देखा? राम को नहीं देखा? इतने ऋषि-मुनि थे, इनकी…

आचार्य प्रशांत: हिंदुस्तान में जानते हो न दस-लाख लोग आवेदन भरते हैं और चयन होता है दो-सौ का। ऐसे ही चलता है न? कितना प्रतिशत हुआ ये? प्रश्नकर्ता: एक-प्रतिशत भी नहीं हुआ। आचार्य: कितना हुआ? तुम्हें अध्यात्म की नहीं, मैथ्स (गणित) की ज़रूरत है। ऐसे नहीं किसी भी काम में…

जो लोग दस दरवाज़ों पर खटखटा रहे होते हैं न उन बेचारों की त्रासदी यही होती है, वह ऐसे होते हैं जैसे कि कोई दस जगह गड्ढा खोदे।
यह ग्रंथों का अपमान है कि उनको एक बार पढ़ कर के किनारे रख दो। “मैंने गीता पढ़ ली!” कि, “मैंने बाइबल…

आपका साथी कैसा है, वो आपको नहीं पता चलेगा जब तक वह आपके साथ है। उसको जानना चाहते हैं तो उस दिन जानिएगा जिस दिन वह आपको छोड़ता है। फिर देखिएगा उसका चेहरा!
जब किसी का आपसे कोई स्वार्थ ना बचे और फिर भी वह आप के प्रति सद्भावना रखे,…

जिसके हाथ में ताक़त नहीं, वो बस उपभोग की वस्तु होगा। आदमी कहाँ से निकला है? जंगल से। और जंगल में प्रेम नहीं होता। जंगल में शिकारी होता है, और शिकार होता है। या जंगल में हीर-राँझा होता है? जो बाहुबल में ऊँचा हो वो क्या हो जाएगा? शिकारी। जो…

आचार्य प्रशांत: आपका साथी कैसा है, वो आपको नहीं पता चलेगा जब तक वह आपके साथ है। उसको जानना चाहते हैं तो उस दिन जानिएगा जिस दिन वह आपको छोड़ता है। फिर देखिएगा उसका चेहरा!
जब किसी का आपसे कोई स्वार्थ ना बचे और फिर भी वह आप के प्रति…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी प्रणाम। कुछ चीज़ें हमें साफ़-साफ़ पता चलती हैं कि हम ग़लत कर रहे हैं। लेकिन कुछ ऐसी चीज़ें होती हैं जो व्यर्थ होती हैं लेकिन जब हम उस काम में मशगूल रहते हैं तो पता नहीं चलता कि व्यर्थ है, जैसे हम हँसी-मज़ाक और गपशप करते रहते…

आचार्य प्रशांत: ज्ञान बिना भक्ति असंभव है। जो ये सोचे कि ज्ञान नहीं होगा, समझेंगे नहीं, बोध नहीं होगा पर भक्त बन जाएँगे, वो आत्मप्रवंचना में है, *सेल्फ-डिसेप्शन*। उसकी भक्ति फिर ऐसी ही होगी, कैसी वाली? (आँखें बंद करके भजन करने का अभिनय करते हुए) ये वाली भक्ति होगी।
असली…