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Acharya Prashant

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\n\n29 अप्रैल से 1 मई, 2022 तक आयोजित हुए वेदांत महोत्सव के एक प्रतिभागी की प्रेरणास्पद कहानी\n\nमेरा नाम राकेश कुमार है। मैं कानपुर नगर से हूँ। पिछले चार माह से मैं हर शिविर में एक श्रोता और एक स्वयंसेवक के रूप मे भाग लेता रहा हूँ। \n\nहर बार की तरह इस बार भी मैं शिविर में भाग लेने के लिए 29 अप्रैल को सुबह 5 बजे कानपुर से दिल्ली के लिए निकला। सुबह 10:30 के आस पास मैं यमुना एक्सप्रेसवे पर जेवर टोल प्लाजा के पास था तभी मुझे नींद की कुछ झपकियाँ आने लगी। मैंने सोचा आगे कहीं पेड़ की छाया में गाड़ी रोक कर थोड़ा रुक जाऊँगा क्योंकि धूप बहुत तेज थी। \n\nयह सब दिमाग़ मे चल ही रहा था तभी नींद की एक झपकी और आ गई और ये घटना बहुत बड़ी दुर्घटना में बदल गई। मैंने किसी तरह खुद को तो बचा लिया पर गाड़ी को क्षतिग्रस्त होने से नहीं बचा पाया। \n\nइस दुर्घटना के बाद अब मेरे पास दो ही विकल्प थे। या तो मैं गाड़ी छोड़ कर शिविर में जाऊँ या फिर शिविर छोड़ कर गाड़ी के पास रहूँ क्योंकि गाड़ी की जिम्मेदारी भी मेरी ही है। \n\nमेरे लिए आचार्य जी का एक योद्धा होने के नाते आचार्य जी के शिविर में जाना बड़ी जिम्मेदारी थी। तब मैंने अपनी दोनों जिम्मेदारियों को पुरा करने के लिए तीसरे विकल्प का चुनाव किया। पहले मैंने गाड़ी को एक्सप्रेस वे से हटाकर वापस कानपुर पहुँचाया और फिर वापस दिल्ली आ कर शिविर में भाग लिया।\n\nमेरे लिए शिविर मे भाग लेना मतलब एक सार्थक कार्य मे सहयोग करने जैसा है। और ऐसा करने मे जो आनंद है, वो मुझे आगे और ऐसे करने के लिए प्रेरित करता है।\n\nगाड़ी भले ही टूट गई हो पर शिविर में भाग लेकर मन की टूट फुट ठ

This article has been created by volunteers of the PrashantAdvait Foundation from transcriptions of sessions by Acharya Prashant
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