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\n\n29 अप्रैल से 1 मई, 2022 तक आयोजित हुए वेदांत महोत्सव के एक प्रतिभागी की प्रेरणास्पद कहानी\n\nमेरा नाम राकेश कुमार है। मैं कानपुर नगर से हूँ। पिछले चार माह से मैं हर…

आदमी यूँ ही नहीं सिगरेट, शराब पीता; उसे कुछ चाहिए जो उसे मिल नहीं रहा इसलिए वो सिगरेट से क्षुधापूर्ति करना चाहता है। एक सिगरेट से बात बनती नहीं इसलिए दूसरी सिगरेट पीता है, दूसरी सिगरेट से भी बात बनती नहीं तो तीसरी पीता है, चौथी पीता है, पीता ही…

हम इज़्ज़त को बहुत बड़ी बात समझ बैठते हैं। हमारे जीवन का, समय का, ऊर्जा का, ध्यान का न-जाने कितना बड़ा भाग सिर्फ़ दूसरों की नज़रों में अपनी छवि चमकाने में लग जाता है, है न?
हमारी एक-एक भावना अन्ततः सिर्फ़ एक उद्देश्य के लिए है – इस शरीर को…

जिस आदमी के पास स्वार्थ नहीं है वो बहुत ख़तरनाक हो जाता है, क्योंकि अब उसे मजबूर किया नहीं जा सकता; तुम उसकी जान ले सकते हो, उसे मजबूर नहीं कर सकते हो। जिसे मजबूर किया जा सकता हो, जिसे ग़ुलाम बनाया जा सकता हो; जान लो कि ऐसे ही…

मैं जितने भी कपटी लोगों से मिलता हूँ, उनकी धूर्तता की कोई सीमा नहीं। उनका दिमाग चल रहा है। वो महत्वकांक्षी हैं। वो कुछ भी कर दिखाने को तैयार हैं। उनमें ऊर्जा पूरी है, वो दुनिया पर छा जाने के लिए हौसला रख रहे हैं। उनका आत्मविश्वास देखो!
और मैं…

आपका साथी कैसा है, वो आपको नहीं पता चलेगा जब तक वह आपके साथ है। उसको जानना चाहते हैं तो उस दिन जानिएगा जिस दिन वह आपको छोड़ता है। फिर देखिएगा उसका चेहरा!
जब किसी का आपसे कोई स्वार्थ ना बचे और फिर भी वह आप के प्रति सद्भावना रखे,…

यहाँ तक बताना सबको अच्छा लगता है, “हमें भी आईएएस बनना है”। उसके आगे जैसे ही पूछो न, “क्यों बनना है?” बताने में फिर एक दिक़्क़त हो जाती है । फिर मेरे जैसा हाल हो जाएगा, मुझे पता चल गया था कि क्यों बनना है। तो फिर मैंने हाथ खींच…

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, मैं अनुशासित नहीं रह पाता और मेरे मन में कामुक विचार छाए रहते हैं। अभी आपने जो बताया कि उलझना ही ठीक नहीं, तो मुझे ये समझ नहीं आता कि अगर मैं इन कामुक विचारों से न उलझूँ, तो मुझे फिर मुक्ति कैसे मिलेगी?
आचार्य…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी प्रणाम। जीवन में आगे बढ़ने के लिए मन बहुत कुछ पाना चाहता है; मूलतः इसमें आर्थिक लाभ भी छुपा होता है। लेकिन पाँच-छह महीने कुछ करा और फिर कुछ और करने को मन चाहता है। मन को समझने का प्रयास किया, आप के कुछ वीडियोज़ (चलचित्र) देखे।…

प्रश्नकर्ता: क्या सफ़लता सब कुछ होती है समाज के लिए? क्या हमें सिर्फ सफ़लता से ही मतलब होना चाहिए।
आचार्य प्रशांत: समाज तो यही चाहता है! समाज तो यही चाहता है कि तुम एक पूर्व निर्धारित राह पर चलो और उस राह पर जो जितनी ज़ोर से चले और जितनी…

प्रश्नकर्ता: सर, एकाग्रता की कमी क्या है?
आचार्य प्रशांत: बेटा, जहाँ भी एकाग्रता है न, वहाँ विकर्षण पहले ही मौजूद है। तुम किस को विकर्षण बोलती हो? जब एक वस्तु की ओर मन को केन्द्रित करना चाहती हो और मन दूसरी और दिशाओं में भाग रहा है, तो तुम क्या…

(दिवस 1)
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम।
मेरा नाम निधीश है। शुरू से ही मैं निर्णय लेने में बहुत कमज़ोर रहा हूँ। मैंने इंजीनियरिंग करने का निर्णय भी दूसरों के प्रभाव में लिया था। इंजीनियरिंग ख़त्म हो चुकी है और अब मुझे आगे के करियर का चुनाव करना है। आप से…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। बच्चों को लेकर चिंतित रहती हूँ। क्या औरत को सिर्फ़ घर में एक चूल्हे में सिमट जाना चाहिए? वो आगे बढ़ने की कोशिश करे या परिवार के दायित्व में बंध कर रह जाए? और बच्चे भी उसी में उलझ गए हैं, वो आगे बढ़ने की कोशिश…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आपकी सफलता के पीछे क्या राज़ है?
आचार्य प्रशांत: राज़ कुछ भी नहीं है। बात सिर्फ इतनी सी थी कि सक्सेस (सफलता) वगैरह का कभी बहुत सोचा नहीं। हर कदम पर जो उचित लगा वो करता गया, उसी से अगला कदम निकलता चला गया। सक्सेस की बात…

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, मुझे अपने कैरियर के प्रति उलझाव सा रहता है। जो काम मुझे करना पसंद है, वह मैं कर रहा हूँ। लेकिन उस काम में जॉब सिक्योरिटी मुझे नहीं दिखती। और इस कारण मैं हमेशा ही चिंतित रहता हूँ। कृपा करके इसका समाधान बताएँ।
आचार्य प्रशांत: ये…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, क्या सफलता सिर्फ़ कठोर परिश्रम (हार्ड-वर्क) कर के ही पाई जा सकती है?
आचार्य प्रशांत: देखो, ये प्रश्न बहुत अच्छा उदाहरण है ऐसे सभी सवालों का जिसमें बहुत सारी चीज़ें मान ली गई हैं।

प्रश्नकर्ता: मैं एक जिला-स्तरीय क्रिकेट खिलाड़ी हूँ। मेरे जीवन में ढर्रे हैं और वो मुझे खेल में आगे बढ़ने से बहुत रोक रहे हैं। तो एक युवा होने के नाते किस तरीके से मैं आगे अनुशासन के साथ इस खेल में उतर सकता हूँ? मैं देश के लिए खेलना चाहता…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी मैं पढ़ नहीं पा रहा हूँ, और हमेशा बेचैन रहता हूँ। क्या नहीं पढ़ना ही मेरी बेचैनी का कारण है? या कोई और कारण है जिसे मैं समझ नहीं पा रहा हूँ?
आचार्य प्रशांत: पढ़ाई तो आप करते ही नहीं आए हो न। और आप इंजीनियरिंग में…

प्रश्नकर्ता: आदर्श जीवन के लिए क्या परिभाषा है एक व्यक्ति के लिए कि उसके जीवन में ये ये हुआ था और वो आदर्श जीवन जिया?
आचार्य प्रशांत: तो बड़ी सुविधा हो जाएगी न? तुम्हें बता दिया है कि ऐसा है आदर्श जीवन, अब तुम्हें कुछ विचार नहीं करना। अब तुम्हें…

प्रश्नकर्ता: सर, हर प्रयास के साथ हम कुछ-न-कुछ उम्मीद क्यों लगाए रहते हैं?
आचार्य प्रशांत: ऐसा है नहीं। फिर वही पूछूँगा — प्रेम में होते हो, किसी से गले मिल रहे हो, तो कुछ उम्मीद भी रख रहे हो क्या?

द लास्ट शाल बी फर्स्ट, एंड द फर्स्ट लास्ट फॉर मानी बी कॉल्ड बट फ्यू चोज़न।
(मैथ्यू.XX.16)
वक्ता: नियति सबकी एक ही है, क्योंकि हम सब एक ही हैं। चूंकि हम में, मूल रूप से कोई अंतर नहीं है, इसीलिए हमारी नियति भी एक ही है। जो हम हैं,

वक्ता: जिसे तुम विश्वास कह रहे हो वह दो तरह का होता है: पहला, विश्वास और दूसरा श्रद्धा, और इन दोनों में ज़मीन आसमान का अंतर है। इसको ध्यान से समझिएगा। विश्वास का अर्थ होता है कि मैंने जाना नहीं है। विश्वास जो है, दो तरह का होता है, पहले…

प्रश्न: सर, अपना लक्ष्य निर्धारित करते हैं भविष्य के लिये। तो वो कैसे करते हैं?
वक्ता : कल्पना कर कर के।
श्रोता : कल्पना तो कुछ नहीं है।

उद्धरण: आपका काम है ये जान लेना कि मैं नकली में फँसा हुआ हूँ और उसके आगे पूर्णविराम। अब इसके आगे का हम नहीं जान सकते। इसके आगे का, जानने के क्षेत्र में आता ही नहीं तो हम जान कहाँ से लेंगे। हमने जान लिया कि ‘गड़बड़ है!’ और इस…

प्रश्नकर्ता: सर, लोग मेरी बातों को उलटा समझ लेते हैं। और मैं इस बात से दो सालों से परेशान हूँ। लोग मेरी बात का उलटा अर्थ लेते हैं और मैं परेशान हूँ।
आचार्य प्रशांत:: परेशान लोगों के खातिर हो या अपने खातिर हो? परेशानी क्यों है? परेशानी इसलिए है…

बूड़ा था पै ऊबरा, गुरु की लहरि चमंकि । भेरा देख्या जरजरा, (तब) ऊतरि पड़े फरंकि ।। ~ संत कबीर
प्रश्न: हमारी उम्मीदें क्यों कभी पूरी नहीं होतीं?

प्रश्न: सफलता क्या है?
वक्ता: प्रश्न है कि सफलता क्या है। और कितने लोग हैं जिनके मन में यह सवाल उठता है?
(श्रोतागण हाथ खड़े करते हैं)

कबिरा रण में आइ के, पीछे रहे न सूर | साईं के सन्मुख रहे, जूझे सदा हुजूर ||
-कबीर
प्रश्न: जूझने की बात क्यों की जा रही है ? जब सारी साधना विश्राम की और शांति की है, तो जूझने की बात क्यों की जा रही है?

आचार्य प्रशांत: आओ बात करें। मैंने सुना है आप लोगों को बात करना पसंद है। तो आओ थोड़ा और बात करें। हम पहले मिल चुके हैं?
प्रश्नकर्ता: हाँ, सर।


इन सब से मुक्ति का एक ही तरीका है, वो बचो ही नहीं जो मूर्ख जाकर के दुनिया से, जगत से, प्रकृति से कामना पूर्ति की आशा रखता था, वो बचो ही नहीं। उसके अलावा और तुम कितने भी हथकंडे लगा लो, अतीत तो लौट-लौट के बार-बार आएगा और सर पर चढ़ेगा ही चढ़ेगा।




यदा नाहं तदा मोक्षो
यदाहं बन्धनं तदा।
मत्वेति हेलया किंचिन्-
मा गृहाण विमुंच मा॥८- ४॥

देखिए यही एकमात्र तरीका है ये अपनी छोटी-सी ज़िंदगी सही तरीके से जीने का – जो सही है वो करना। हथियार डाल दो, मजबूर हो जाओ, बिलकुल समर्पण कर दो कि जो सही काम है वो तो करना ही है, अंजाम क्या होगा ना हम जानते हैं, ना हमें परवाह

दिल में जिसको बैठाना था उसकी जगह और बहुत कुछ बैठा लिया। अब सरकारी नौकरी का लालच बैठा हुआ है दिल में, क्यों? सब जानते हैं क्यों! गाड़ी मिल जाएगी, सरकारी बंगला मिल जाएगा, कोई निकाल नहीं सकता। कोई निकाल नहीं सकता बड़ा आनंद रहता है, अज़ीम-ओ-शान-शहंशाह। ग्यारह बजे जाओ,…

सबसे पहले यह समझो कि दूसरे तुम में कमज़ोरी देख रहे हैं न, इसीलिए तुम पर चढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। अगर वह तुममे कमज़ोरी देखेंगे ही नहीं तो तुम पर चढ़ने की कोशिश भी नहीं करेंगे। बात यह नहीं है कि उसने जो भी कहा है वह सही…

लड़का पच्चीस साल का, तीस साल का है और कुल एक भाई एक बहन है। अकसर माँ-बाप कार्यरत रहे थे, दोनों ही कमाते थे तो बचत है घर में। मकान अपना है। लड़का अगर पच्चीस-तीस साल का है तो माँ-बाप कितने साल के हैं?
साठ-पैंसठ।
अभी-अभी रिटायर (सेवानिवृत) हुए हैं,

जिनके दिल नहीं टूटते उनके लिए जीवन में कोई प्रगति संभव नहीं है। जो अपनी असफलता को भी चुटकुला बनाए घूमते हैं, जिन्हें लाज ही नहीं आती, उनके लिए जीवन में कोई उन्नति, उत्थान संभव नहीं है।
इंसान ऐसा चाहिए जो लक्ष्य ऊँचा बनाए। और लक्ष्य फिर ना मिले तो…

जिस साल मेरा चयन हुआ था, पाँच लाख बैठे थे और सीट थी मुश्किल से, मेरे ख्याल से, ढाई-सौ, तीन-सौ। वो जो पूरी प्रक्रिया है वो बनी ही ऐसी है कि उसमें से हज़ार में से नौ-सौ-निन्यानवे लोग अचयनित ही निकलेंगे और यह बात तुमको पहले से पता होती है…

जब सड़क पर निकलो न तो अपनी कमियाँ पता चलती हैं। जो व्यक्ति घर में ही बैठ गया वो बड़ा दम्भी, घमंडी, अहंकारी हो जाता है क्योंकि उसे अपनी कमियों का पता भी नहीं होता। अकसर गृहिणियों की अकड़ बिलकुल लाजवाब होती है। “मैं ही बेग़म हूँ, मैं ही रानी…

दुनिया के सामने इंसान की तरह खड़े होना सीखो भाई! केंचुए की तरह थोड़े ही कि किसी के भी पाँव के नीचे आ गए। इस चेहरे पर तेज होना चाहिए, आँखों में ताक़त झलकनी चाहिए, कुछ बोलो तो उसमें साहस और संकल्प हो, आवाज़ काँपे नहीं, थरथराए नहीं। एक ज़िंदगी…

अगर आप अपने लक्ष्यों में बार-बार असफलता पाते हैं तो इसकी वजह संकल्पशक्ति, विल पावर इत्यादि का अभाव नहीं है। इसकी वजह ये है कि आपके लक्ष्य हैं ही ग़लत। सही लक्ष्य तो प्रेम-प्रसंग की तरह होता है, वह पकड़ लेता है, आप उसे फिर छोड़ना भी चाहोगे वो आपको…

कल की सुबह अलग हो सकती है अगर आप आज की रात बदल डालें। आज की रात तो बदलने में कोई रुचि दिखा नहीं रहे, कल की सुबह यूँही अलग कैसे हो जाएगी भाई? कैसे?
बिलकुल एक नया भविष्य आ सकता है अगर तुम वो ना रह गए हो जो…

स्वामी विवेकानंद अनूठे हैं, बहुत कम तुमने साधु-संत-सन्यासी देखे होंगे जो इतने सुघटित सुडौल शरीर के हों, जितने विवेकानंद थे।
खेल की, कसरत की उनकी दिनचर्या में बंधी हुई जगह थी। और यही नहीं कि बस व्यक्तिगत रुप से खेलते थे, अपने साथियों से कहें – व्यायाम आवश्यक है।
जिस

अच्छे-अच्छे लोग आप देखोगे, खूब कमा रहे होंगे, उनसे पूछो, “क्वालिटी ऑफ लाइफ? रिचनेस इंडेक्स? (जीवन की गुणवत्ता? समृधि सूचक?)” शून्य! “गाना आता है?” नहीं! “तैरना आता है?” नहीं! “संगीत सीखा कुछ?” नहीं! “कुछ और भाषाएँ सीखीं?” नहीं! “दिनभर करते क्या हो?” “कमाता हूँ, कमाता हूँ, कमाता हूँ!” अरे!…

ना किसी पैसे के प्रदर्शन के आगे दबो, झुको, ना किसी की ताक़त के आगे दबो, झुको। और किसी की अंग्रेज़ियत के आगे तो बिलकुल दबना, झुकना नहीं है। और किसी के सौंदर्य के आगे भी दबना, झुकना नहीं है। कि सुंदर लड़की आ गई या हैंडसम लड़का आ गया…

ना किसी के पैसे के प्रदर्शन के आगे दबो-झुको, ना किसी के ताक़त के प्रदर्शन के आगे दबो-झुको, और किसी की अंग्रेजियत के आगे तो बिलकुल दबना-झुकना नहीं है। और किसी के सौंदर्य के आगे भी दबना-झुकना नहीं है कि सुंदर लड़की आ गयी कि हैंडसम लड़का आ गया और…
जब आप लोग लक्ष्य बनाते हैं, और…
वक्ता: ‘विश्राम’, ‘शांति’…
(लगभग सभी हाथ उठाते हैं)
लगभग सभी,…