प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। बच्चों को लेकर चिंतित रहती हूँ। क्या औरत को सिर्फ़ घर में एक चूल्हे में सिमट जाना चाहिए? वो आगे बढ़ने की कोशिश करे या परिवार के दायित्व में बंध कर रह जाए? और बच्चे भी उसी में उलझ गए हैं, वो आगे बढ़ने की कोशिश बहुत करते हैं मगर उनको असफलता मिलती है। जिस से उनका भी मन भटक जाता है।
आचार्य प्रशांत: किस चीज़ में मन भटक जाता है?
प्र: पढ़ाई-लिखाई में मन भटक जाता है।
आचार्य जी: बच्चे कौन सी परीक्षाएँ दे रहे हैं?
प्र: बच्चा पीसीएस की तैयारी कर रहा है। और किसी विभाग की वैकेंसी के इंटरव्यू में छँट गया।
आचार्य जी: मैं उनसे पूछूँ कि आप जो तैयारी कर रहे हो, वो क्यों कर रहे हो, यही नौकरी क्यों चाहते हो, तो वो मुझे साफ समझा पाएँगे? उनसे मैं पूछूँ कि ये जिन भी परीक्षाओं में बैठ रहे हो, जो नौकरियाँ पाना चाहते हो, इसके पीछे क्या उद्देश्य है, साफ-साफ गहराई से समझा पाएँगे?
प्र: जी नहीं।


