प्रश्न: सफलता क्या है?
वक्ता: प्रश्न है कि सफलता क्या है। और कितने लोग हैं जिनके मन में यह सवाल उठता है?
(श्रोतागण हाथ खड़े करते हैं)
तो यह सिर्फ अरविन्द का नहीं, बहुत सारे लोगों का प्रश्न है। सभी ध्यान से सुनेंगे।
जब आप लोग लक्ष्य बनाते हैं, और उसको आप पा लेते हैं, तो आप कहते हैं, “मैं सफल हो गया हूँ।” ऐसा ही है न? लक्ष्य कहाँ से आते हैं? मन से। मन है जो लक्ष्यों का निर्धारण करता है। जो हमारा यह मन है, यह पूर्णतः बाहरी प्रभावों से बनता है, इसका अपना कुछ होता ही नहीं है। इसके पास वही सब कुछ होता है, जो समय ने इसको दिया है, जो दूसरों ने इसको दिया है। बात समझ में आ रही है?
मन और मस्तिष्क का बड़ा गहरा संबंध है यह जो आपका मस्तिष्क है- ब्रेन, यह सदियों की विकास यात्रा का परिणाम है। उन सब अनुभवों ने इसको जो दे दिया है, वही यह जानता है। उन्हीं सब अनुभवों के फलस्वरूप- आपके हाथ में पांच उंगलियाँ हैं, आपके चेहरे का एक ख़ास रंग है, आपका हृदय एक ख़ास गति से धड़कता है- ये सारे काम मस्तिष्क करता है। यह तो आप जानते ही हैं। मस्तिष्क ने यह सब कहाँ से सीखा? मस्तिष्क को कैसे पता कि आँखों को कितनी देर तक झपकाना है, या खाना पचाने की प्रक्रिया क्या है? यह सब होता रहता है न? यह सब मस्तिष्क ही करता रहता है।
मस्तिष्क को यह सब उसकी विकास यात्रा ने सिखाया है-


