
आजकल चलती है ‘*पाउटिंग*’!
डैडी डार्लिंग यूँ थुथुन निकालेंगे – पाऊट माने थुथुन, जैसे सुअर का होता है – तो डैडी डार्लिंग यूँ निकालेंगे और कैटी डार्लिंग निकालेंगी, “ऊँ!” और कैटी डार्लिंग अभी हैं कुल डेढ़ साल की, और फिर दोनों थुथुन से थुथुन मिलाएँगे।
और कांटेस्ट (प्रतिस्पर्धा) होगा! “*हू…

जो भी लोग अपने बच्चों को ये तर्क देते हों कि, “हम बताएँगे तुमको, हमने ज़िंदगी देखी है”, उन्हें तो सबसे पहले अस्पतालों में दाखिला नहीं मिलना चाहिए। बाहर लगा होना चाहिए, ‘जिन्होंने ज़िंदगी देखी हो वो अपना उपचार ख़ुद ही कर लें।‘ भाई तुम तो ज़िंदगी देख-देख कर ही…

देखिए, एक आदमी जो बिलकुल पढ़ा-लिखा नहीं है वो प्रभावित नहीं हो जाएगा, वो इम्प्रेस्ड नहीं हो जाएगा जब आप उससे कहेंगे – रेजोनेंस, और कंस्ट्रक्टिव इंटरफेरेंस, आयोनाइजेशन, वाइब्रेशन और *स्पेक्ट्रम*। उसके लिए तो काला अक्षर भैंस बराबर है। आप ये सब बातें बोलते रहिए वो सर…

प्रश्नकर्ता: आज एक, कुछ कथाएँ मिली थीं पढ़ने को। उनमें से सबसे पहली कथा जब पढ़ी थी तो उसका शायद संक्षेप ये था अंत में कि तुम्हें जो भी कर रहे हो उसके लिए तुम्हें किसी भी चीज़ का मोह या उसके प्रति आसक्ति या ऐसा कुछ नहीं होना चाहिए…

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, मैं तेईस साल का हूँ और अभी मैं यू.पी.एस.सी. में फॉरेस्ट सर्विसेज़ की परीक्षा की तैयारी कर रहा हूँ। अभी मैं घर पर बैठा हूँ और पापा से पैसे लेता हूँ। आपको मैं डेढ़ साल से सुन रहा हूँ, और जीवन में स्पष्टता आ रही है,…

आचार्य प्रशांत:
एक डायरी बनाओ, उसमें नियम से रोज़ रात को लिखा करो कि दिन के कितने मिनट मुक्ति के लिए बिताये। बिल्कुल साफ़ हिसाब। और उसमें लिखा करो कि कितने काम थे कि जो तुम्हें नहीं करने चाहिए थे पर प्रकृति करवा गई, ईमानदारी से। इन सारे कामों का…

प्रश्नकर्ता: कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन ने मुझे मेरे कई ढर्रों से आज़ाद कर दिया। बहुत कुछ जो छूट ही नहीं रहा था अपने आप छूट गया। पर कल से लॉकडाउन खुल सकता है, वैसे भी सब धीरे-धीरे नॉर्मल होता जा रहा है। मुझे ये लॉकडाउन हमेशा के लिए…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, हाल ही में मुझे अभी वॉलन्टीयरिंग (स्वयं सेवा) का मौका मिला था तो मैं और मेरे सहयोगी ने तय किया कि हम आपके द्वारा जो पुस्तकें प्रकाशित हैं उनका स्टॉल लगाएँगे। जब वहाँ पहुँचा तो पाया कि इतने सारे लोगों में कौन इन किताबों का पात्र है…

प्रश्न:
कबिरा यह मन लालची, समझे नहीं गंवार।भजन करन को आलसी, खाने को तैयार।।
~ गुरु कबीर

प्रश्न: आचार्य जी, बुरी आदतें कैसे छोड़ें? तम्बाकू की लत हो कैसे छोड़ें?
आचार्य प्रशांत जी:
तम्बाकू हो, या निंदा हो, या माँस हो, या आलस हो, हर आदत सत्य का, मौज का, एक विकल्प होती है। असफल और सस्ता विकल्प।

आचार्य प्रशांत: पुण्य, आचरण की बात नहीं है। ‘पुण्य’ किसी विशिष्ट आचरण की बात नहीं है और ना ही अच्छाई किसी निर्धारित प्रकार से आचरण करने की बात है और ना ही पुण्य बात है एक ख़ास विषय के बारे में विचार करने या ना करने से। पर भरा तो…

प्रश्नकर्ता: सर पिछले सत्र में ये बात हुई थी कि जो तथाकथित दुःख होता है, उस दुःख को भी पूरे तरीके से महसूस करो। और जो सुख होता है, उसको भी पूरे तरीके से महसूस करो। और ये दोनों समान होते हैं। मुझे जो समझ आया था इसका मतलब, वो…

प्रश्न: सर, यह सोच तो लिया है कि “अभी जो है, सो है”, और इससे मन शांत भी होता है पर जैसे ही कुछ करने बैठता हूँ, कि बस यही है, तो एक-एक मिनट ऐसा लगता है जैसे ख़त्म ही नहीं हो रहा। जैसे हर एक मिनट अनंत हो। दिमाग…

अपनी कहे मेरी सुने, सुनी मिली एकै होय | हमरे खेवे जग जात है, ऐसा मिला न कोय ||
~ संत कबीर
आचार्य प्रशांत: कबीर हमसे कह रहे हैं कि ये कहना और ये सुनना, एक है; एक ही इसमें घटना चल रही है, अपने छिटकेपन को बचाने की। मैं…

प्रश्न: सर, मैं पूछना चाहता हूँ कि एक इंसान की ज़िन्दगी में भावनाओं का किस तरह से असर होता है? भावनाएँ बहुत तरीके की हो सकती हैं| दोस्त के प्रति, माँ-बाप के प्रति| या अगर आप कुछ करना चाहते हैं तो उस उद्देश्य के प्रति आपका व्यवहार कैसा रहता है|…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, अभी सत्र शुरू होने से पहले हम सभी लोग मन्त्रणा कर रहे थे। एक सज्जन ने यह सवाल उठाया कि हम लोग एच.आई. डी. पी. के छात्र हैं, तो हम ये सब क्यों कर रहे हैं, मतलब बातें वगैरह। जवाब देते हुए मैंने कहा, “‘क्योंकि ये भी…

वक्ता : आलोक का सवाल है कि सरलता क्या है ?
सरलता का अर्थ होता है- जो है सो है, सीधी-सीधी बात, जो कहा जा रहा है, सो कहा जा रहा है, जो सुना जा रहा है सो सुना जा रहा है। जटिलता होती है मन की ग्रंथियां और जब…


Questioner(Q): What is the process of clarity? Is it just listening with immersion and no resistance? What is Truth? How we decide it?
Acharya Prashant (AP): Listening without effort, plus if there is Truth in what you hear, there is change and transformation, and that Truth becomes the master. We…



कथं न ज्ञेयमस्माभिः पापादस्मानिवर्तितुम्। कुलक्षयकृतं दोषं प्रपश्यद्भिर्जनार्दन ॥३९॥
"तो कुल क्षय से होने वाले दोष को देख-सुन कर भी हम लोगों को इस पाप से निवृत्त होने का विचार क्यों नहीं करना चाहिए?"

लड़कीवाले लड़की देने को राज़ी नहीं होते अगर सरकारी नौकरी नहीं है। और कोई वजह हो-न-हो, वंश चलाने की ख़ातिर हमें यूपीएससी निकालना पड़ेगा। ‘वंश चलाने के लिए यूपीएससी निकालना पड़ेगा!’ यह सब तो तुम्हारे सारे कारण हैं सरकारी नौकरी के पीछे जाने के, नहीं तो और तुम क्यों इतने…

सबसे पहले यह समझो कि दूसरे तुम में कमज़ोरी देख रहे हैं न, इसीलिए तुम पर चढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। अगर वह तुममे कमज़ोरी देखेंगे ही नहीं तो तुम पर चढ़ने की कोशिश भी नहीं करेंगे। बात यह नहीं है कि उसने जो भी कहा है वह सही…

भई! गर्मी का मौसम हो, तुम शरीर खुला रखो बात समझ में आती है। तुम कहीं नदी में, स्विमिंग पूल (तरणताल) में नहाने जा रहे हो, तुम कपड़े उतार दो, बात समझ में आती है। या तुम सिर्फ़ अपनी सुविधा के लिए कम कपड़े पहनो तो भी बात समझ में…

लड़का पच्चीस साल का, तीस साल का है और कुल एक भाई एक बहन है। अकसर माँ-बाप कार्यरत रहे थे, दोनों ही कमाते थे तो बचत है घर में। मकान अपना है। लड़का अगर पच्चीस-तीस साल का है तो माँ-बाप कितने साल के हैं?
साठ-पैंसठ।
अभी-अभी रिटायर (सेवानिवृत) हुए हैं,

नौ बजे खाना लगना है मेज़ पर, सात बजे से सूँघना शुरू कर देते हैं।
“तो आज क्या बन रहा है? तो आज क्या बन रहा है?”
जब ज़िंदगी बिलकुल बैरोनक और खाली होती है तो दिमाग में सिर्फ़ खाना और थाली होती है।

जिनके दिल नहीं टूटते उनके लिए जीवन में कोई प्रगति संभव नहीं है। जो अपनी असफलता को भी चुटकुला बनाए घूमते हैं, जिन्हें लाज ही नहीं आती, उनके लिए जीवन में कोई उन्नति, उत्थान संभव नहीं है।
इंसान ऐसा चाहिए जो लक्ष्य ऊँचा बनाए। और लक्ष्य फिर ना मिले तो…

स्त्री चूँकि गर्भ रखती है तो प्रकृति ने ही उसे शरीर के प्रति बड़ा संवेदनशील बना दिया है। वो बार-बार अपने शरीर को देखती रहती है क्योंकि उसको एक बहुत महीन काम करना है, डेलिकेट काम; उस काम में अगर ज़रा भी गड़बड़ हो गई, इंफेक्शन हो सकता है, कुछ…

बहुत सारा मेडिटेशन वगैरह वही है जो आपको झटका नहीं खाने देगा। ज़िन्दगी बर्बाद चल रही है, सबकुछ आपका ग़लत है, लेकिन सुधरने की कोई ज़रूरत नहीं। आधे-एक घण्टे बैठ करके गाइडेड मेडिटेशन कर लो, वहाँ तुमको गुरुजी कान में बता देंगे कि तुम एक सरोवर के किनारे बैठे हो,…

जब सड़क पर निकलो न तो अपनी कमियाँ पता चलती हैं। जो व्यक्ति घर में ही बैठ गया वो बड़ा दम्भी, घमंडी, अहंकारी हो जाता है क्योंकि उसे अपनी कमियों का पता भी नहीं होता। अकसर गृहिणियों की अकड़ बिलकुल लाजवाब होती है। “मैं ही बेग़म हूँ, मैं ही रानी…

कभी किसी से बड़ी नफ़रत उठे तो मैं एक सूत्र बता देता हूँ – अपनी नफ़रत को और अपने अहंकार को थोड़ी देर के लिए किनारे रख कर उससे 1 घण्टे बात कर लेना, फिर नफ़रत कर नहीं पाओगे और ज़्यादा। इसलिए जिन्हें नफ़रत क़ायम रखनी होती है, पहला काम…

ना संसार से डरो, ना सरकार से डरो, ना डरो दुनिया के तानों से, ना डरो अधूरे अरमानों से, डरो तो बस ज़िंदगी के बर्बाद चले जाने से। घड़ी की टिक-टिक को अपना दोस्त बना लो, हर घण्टे-दो- घण्टे पूछा करो अपने-आप से, “अपने समय का जो मैं ऊँचे-से-ऊँचा, बढ़िया-से-बढ़िया…

ऐसा तो नहीं है कि दस-बारह साल के बच्चे को अगर आप रामकृष्ण की बोध कथाएँ पढ़ाएँगे तो उसे समझ में नहीं आने वाली। आएँगी न। आपके घरों में क्यों नहीं है रामकृष्ण परमहंस की सरल साधारण कथाओं की किताब? कृष्णमूर्ति साहब का साहित्य आता है ‘*कृष्णमूर्ति फॉर द यंग*’।…

पढ़ाई में मन नहीं लगता क्योंकि वो पढ़ाई शायद तुम्हारे लिए है ही नहीं। वो पढ़ाई तुम कर ही रहे हो उनके दबाव में जो तुमको एक तरह से स्पॉन्सर कर रहे हैं कि ‘तू घर बैठ, तुझे रोटी-पानी की फ़िक्र करने की अभी कोई ज़रूरत नहीं साल-दो-साल, तू बैठ…

वो कहानी याद है न कि दस जने उतरे हैं पीये हुए, किससे? एक नाव से उतरे हैं, ठीक है? अब वो गिनना चाहते हैं कि कोई एक रास्ते में टपक तो नहीं गया था नदी में। तो वो सब गिनना शुरू करते हैं, तो गिन रहे हैं कि भैया…

दुनिया में एक-से-बढ़कर-एक प्रकाशित स्त्रियाँ हुईं हैं, जाओ उन्हें चाहो, बिलकुल उनके प्रेम में पड़ जाओ, न्योछावर हो जाओ उनपर, तुम्हारी ज़िंदगी बन जाएगी। पर तुम ऐसा करते नहीं। ऊँची स्त्रियों से तुम्हें भय लगता है, क्योंकि ऊँची स्त्री के पास जाकर के तुम अपना बौनापन बरक़रार नहीं रख सकते।…

कुछ साल मिले हैं जगने के लिए, उसके बाद तो खूब सोना है। तो यह तुम कैसे आदत अभी पाले हुए हो कि, “ज़रा और सो लें एक घण्टा, दो घण्टा”?
भीतर एक चेतना होनी चाहिए, लगातार एक गूंज होनी चाहिए कि, “लंबे पाँव पसार कर के अनंत समय के…

दुनिया की ताक़तों से, और घरवालों से, और पचास लोगों से डरते हो इस बात से भी तो डरो कि, ‘जन्म ही व्यर्थ हो गया तो?’
जीवन से छोटे-मोटे डर सब हटाने हों तो बड़ा डर ले आओ। और बड़ा डर यही है – कल्पना में तो खोए ही रहते…

ज़िन्दगी में पहले कुछ बन जाओ, कोई आंतरिक मक़ाम हासिल कर लो, फिर तुम्हें समझ में आएगा न कि रिश्ता किससे बनाना है। अब रिश्ता बना लिए छब्बीस की उमर में – तुम्हारा लक्ष्य हो सकता है जीवन में ऊपर उठना हो, जिससे तुमने रिश्ता बना लिया है उसे ना…
भारतीयों को शायद यह लगता है कि हिंदुस्तान से बाहर जहाँ कहीं कोई मिलेगा वह ‘अंग्रेज़ी’ ही बोल रहा होगा। एक तो यह बहुत बड़ी ग़लतफ़हमी है – बाहर जैसे ही हम निकलेंगे वैसे ही जो मिल रहा होगा अंग्रेज़ी ही बोल रहा होगा। हिंदुस्तान बेचारा बस पिछड़ा हुआ है,…
आचार्य प्रशांत: इसी आशय के तर्क आगे भी…

छोटे आदमी की सज़ा ये कि उसकी ज़िंदगी में सब छोटे-छोटे मुद्दे होंगे। यही मुद्दा होगा कि इतने से इतने बजे तक पानी आता है, पोछा लगाया कि नहीं लगाया, भैंस का दूध लेना है कि गाय का दूध लेना है, नौकरी में फलाने को नीचा कैसे दिखाना है, ऊपर…

तुम्हें बर्बाद करने में एक चीज़ का सबसे बड़ा योगदान रहा है तो वो है – फिल्में और *टीवी*।
तुम्हें पता भी नहीं है जिनको तुम अपने विचार कहते हो वो वास्तव में फ़िल्मी विचार हैं। जिनको तुम अपनी भावनाएँ बोलते हो वो वास्तव में फ़िल्मों ने दी हैं तुमको।…

लड़के यहाँ आते हैं – लड़के भी क्यों कहूँ – युवा, मर्द पच्चीस-पच्चीस, तीस-तीस साल के। वो कहते हैं, “घर वालों के कारण घर पर पड़ा हुआ हूँ, कोई काम नहीं करता और घर का माहौल कुछ ऐसा है कि काम करने की प्रेरणा नहीं मिलती।“ सारा दोष घर वालों…

तुलना तो तुम्हें करनी ही है; इनसे क्या तुलना कर रहे हो, अपने दफ़्तर के लोगों से तुलना करते हो, वो सब तुम्हारे ही जैसे हैं।
ये क्या तुलना कर रहे हो कि, “मेरे पास आल्टो है, दूसरे के पास डिज़ायर है”, कि, “मेरे पास डिज़ायर है और दूसरे के…

इतनी बड़ी भारी तुम्हारे साथ त्रासदी हो गई कि तुम आत्महत्या की सोचने लग गईं? तुम्हारा जीवन इतना फ़िज़ूल है? एक फ़िज़ूल आदमी तुम्हारी ज़िंदगी में आता है तुम्हारे साथ कुछ फ़िज़ूल की हरकतें करता है और तुम आँसुओं में डूबी हुई हो कि, “अरे! मैं डिप्रेस्ड हो गई” तुम्हें…

कोई साधारण कद-काठी का आदमी हो, और वो चला जा रहा है, और पीछे से कोई आवाज़ दे उसे, “ओ मोटे!” इस आदमी का दिल टूट जाएगा? इसका दिल टूट जाएगा? और दूसरी और हो कि सवा-सौ किलो का वो किसी तरह लुढ़कता-पुड़कता चला जा रहा हो, और पीछे से…

खाली समय मिला है तो क्या करना है? “चल न! मोहल्ला घूम कर आते हैं, बाज़ार देखकर आते हैं”, या कहीं नहीं जाना तो, “चल न, टीवी देखते हैं।“ ख़ुद को नहीं देखना है!
अपनी हालत क्या है, उससे बिलकुल बचकर रहना है। अपनी हालत का कुछ पता नहीं, टीवी…

अकसर जो नंगा होता जाता है उसको हम लिख देते हैं, “ये तो बोल्ड (निर्भीक) कपड़ों में आया है।“ उसमें बोल्डनेस (निर्भीकता) क्या है? फिर तो सबसे बोल्ड जानवर हुए। एक गधा तो बोल्डनेस की प्रतिमूर्ति हो गया, उसे बोल्डनेस का नोबेल प्राइज़ मिलना चाहिए, उसने ज़िन्दगी में कोई कपड़ा…

ये मेडिटेशन चीज़ क्या है? मैं बताता हूँ यह चीज़ क्या है, यह फ़र्ज़ी चीज़ है, यह फ़रेब है, यह आत्म-प्रवंचना है, ख़ुद को धोखा है। यह जीवन के आमूलचूल बदलाव का तरीका नहीं है, यह कुछ समय का आध्यात्मिक मनोरंजन है। यह आपको आपकी गंदी दिनचर्या के तनाव से…

सेक्स अगर तुम्हें शांत कर सकता होता, दो बार, चार बार में कर गया होता न? यहाँ तो लोग अपने जीवन काल में हज़ारों बार कर जाते हैं और उसके बाद भी लालायित रहते हैं, प्यास ही नहीं बुझती।
अधेड़ हो गए, साठ के हो गए, अस्सी के हो गए,…