
कभी किसी से बड़ी नफ़रत उठे तो मैं एक सूत्र बता देता हूँ – अपनी नफ़रत को और अपने अहंकार को थोड़ी देर के लिए किनारे रख कर उससे 1 घण्टे बात कर लेना, फिर नफ़रत कर नहीं पाओगे और ज़्यादा। इसलिए जिन्हें नफ़रत क़ायम रखनी होती है, पहला काम…

श्रोता: सर, यह जो शब्द है क्षमा, क्या इस शब्द का कुछ अस्तित्व है?
वक्ता: क्षमा? बेटा, यह भी शब्द, क्षमा उन्हीं शब्दों में से है जिनका वास्तविक अर्थ, बहुत कम समझा गया है।
क्षमा, तो साधना का एक अंग है। क्षमा, आर्जव, सहिष्णुता, ये साधना के अंग हैं। और

धीरज धरो छिमा गहो, रहो सत्यव्रत धार गहो टेक इक नाम की, देख जगत जंजार ~ संत कबीर
आचार्य प्रशांत: पूछ रही हैं कि "क्षमा क्या है?" क्षमा है, क्षमा की ज़रुरत का अभाव।
क्षमा करने की ज़रुरत तब पड़ती है, जब चोट लगी हो। क्षमा उठती ही चोट से…



Questioner(Q): What is the process of clarity? Is it just listening with immersion and no resistance? What is Truth? How we decide it?
Acharya Prashant (AP): Listening without effort, plus if there is Truth in what you hear, there is change and transformation, and that Truth becomes the master. We…



“माँसाहार गरीबों के लिए वरदान है क्योंकि माँसाहार के माध्यम से गरीबों को सस्ता प्रोटीन मिल जाता है।“ १ ग्राम प्रोटीन अगर आप मटन से लेते हैं तो लगते हैं ३ रुपये। उतना ही प्रोटीन, १ ग्राम, अगर आप अंडे से लेते हैं तो लगते हैं १ रुपय ३० पैसे, उतना ही प्रोटीन, १ ग्राम, अगर आप चिकन से लेते हैं तो लगता हैं १ रुपया।
अध्यात्म की रोशनी जीवन के हर क्षेत्र पर पड़ती है, तो राजनीति पर भी पड़ेगी ही पड़ेगी। ऐसा कुछ नहीं है कि आध्यात्मिक आदमी राजनीति के प्रति अंधा हो जाता है। बल्कि हक़ीक़त तो यह है कि राजनीति को आध्यात्मिक लोगों की बहुत सख़्त ज़रूरत है, क्योंकि राजनेता ताक़त की ऐसी गद्दियों पर बैठते हैं, जहाँ से वो आपके जीवन को बहुत तरीके से प्रभावित करते हैं। राजनेता अगर आध्यात्मिक नहीं है, तो देश रसातल में जाएगा। राजनीति त्यागनी नहीं है, सही राजनीति करनी है।https://acharyaprashant.org/en/articles/raajneeti-mein-adhyatm-kyon-zaroori-1_795988a15
कृष्ण का खुद ऊँचा होना, कृष्ण के पूरे जीवनवृत्त में, उनकी ज़िंदगी की जो पूरी कहानी है उसमें और श्री कृष्ण की प्रेमकथा में एक सूत्र है जो साझा पिरोया हुआ है। गीता की ऊँचाई, कृष्ण के जीवन की ऊँचाई, और कृष्ण के प्रेम की ऊँचाई तीनों एक हैं। ऐसा नहीं हो सकता कि कृष्ण बहुत ऊँचे हों और उनका प्रेम निचले तल का हो जाए। ये संभव नहीं है।

यदा नाहं तदा मोक्षो
यदाहं बन्धनं तदा।
मत्वेति हेलया किंचिन्-
मा गृहाण विमुंच मा॥८- ४॥
अनुवाद: जब तक 'मैं' या 'मेरा' का भाव है तब तक बंधन है, जब 'मैं' या 'मेरा' का भाव नहीं है तब मुक्ति है। यह जानकर न कुछ त्याग करो और न कुछ ग्रहण ही…

प्रश्नकर्ता: प्रणाम, आचार्य जी। बहुत बहुत धन्यवाद। आपके कोर्सेज़ को मैं यूट्यूब पर भी सुने हैं। कुछ मैंने ऑनलाइन सत्र भी अटेंड किए है।
मेरा जो प्रश्न है वो ये है कि मेरा मोटिवेशन लेवल बहुत फ्ल्कचुएट(ऊपर-नीचे) होता है। दिन में ही कई बार बहुत डिप (नीचे) में भी…

लड़का-लड़की पंद्रह साल के हुए नहीं कि माँ-बाप बन सकते हैं, फिर? बहुत अक्ल आ जाएगी उनमें? और फिर जो बच्चा पैदा हो उसको सिखाएँ कि, “यह देवी-देवता हैं, हमने पैदा किया है।“ वह देवी-देवता ने नहीं पैदा किया है, वह पैदा इसलिए हो गया था क्योंकि देवी जी बहकी…

“ओ ले-ले-ले! मेला शोमू कितना स्टुपिड है!" अरे! स्टुपिड (मूर्ख) है तो यह बोलने के लिए भी काहे को रुकी कि शोमू स्टुपिड है? भाग! जान बचाकर भाग। पर शोमू क्यूट ही इसीलिए है क्योंकि वह स्टुपिड है। अजीब बात है! तुमको पता है वह स्टुपिड है पर तुम तब…

देखिए यही एकमात्र तरीका है ये अपनी छोटी-सी ज़िंदगी सही तरीके से जीने का – जो सही है वो करना। हथियार डाल दो, मजबूर हो जाओ, बिलकुल समर्पण कर दो कि जो सही काम है वो तो करना ही है, अंजाम क्या होगा ना हम जानते हैं, ना हमें परवाह…

तुम्हारे सामने पहलवान खड़ा हो लड़ाई के लिए, और तुम उस वक़्त कहो कि, “मैं अब ज़रा दंड-बैठक करता हूँ, शरीर बनाता हूँ”, तो तुम पिटोगे ही नहीं, बहुत बुरी तरह पिटोगे!
एक सज्जन थे, उन्हें सलाह दी गई थी कि, ‘साहब! आपका कॉलेस्ट्रॉल बहुत बढ़ गया है, तो आप…

बहुत लोग मिलेंगे कहेंगे, "अरे, अरे! बहुत बड़ी बातें मत करो, हमें समझ में नहीं आती हैं। यह तुम क्या गीता उपनिषद् लेकर बैठ जाते हो, भइया! हम बड़े सीधे, सरल आदमी हैं, हमें यह सब बातें समझ में नहीं आती; आलू, टिंडा बताओ न?"
जो कोई तुमसे यह बोले…

प्रश्नकर्ता: अंडा तो वेजिटेरियन (शाकाहारी) ही है, अंडा से तो होता है नॉन- फर्टीलाइज़्ड, चूजा तो निकलेगा नहीं।
आचार्य प्रशांत: बात ये थोड़े ही है कि वह पेड़ पर लटका मिला कि नहीं लटका मिला। यह भी तो देखो वह अंडा आया कहाँ से, मुर्गी स्वेच्छा से आकर के…

लोग कहते हैं सच्चा प्यार मिलता नहीं, मैं कहता हूँ सच्चा प्यार तुमसे बर्दाश्त होता नहीं। मिल तो आज जाए, झेल लोगे? बड़े अफ़साने लिखे जाते हैं, शायरों की दूकान ही चल रही हैं इसी बात पर कि ‘हम तो बड़े क़ाबिल थे पर कमबख़्त ज़िंदगी ने धोखा दे दिया,…

यह एक बड़ा भ्रम कि जल्दी से शादी कर लो और शादी करने से दूसरा व्यक्ति ज़िम्मेदार हो जाएगा। जो माँ-बाप कहते हैं, “ये बड़ा उद्दण्ड है, लड्डू। गाँव भर में लुढ़कते फिरता है लड्डू। तो लड्डू को ज़िम्मेदार बनाने के लिए लड्डू की शादी कर देते हैं।” घर में…

सुबह उठते ही, "जानू उठ गई? जानू टट्टी कर ली, ब्रश कर लिया? नाश्ते में क्या खा रही हो? क्यों खा रही हो? खा ही क्यों रही हो, पी क्यों नहीं रही? जानू पैरों से चल रही हो? सर के बल क्यों नहीं चल रही?"
अभी हॉट है मामला भई!…

यह जगत तो लाभ का सौदागर है। वो आप से नहीं प्रेम करता; आपसे जो मिल रहा है उसे से प्रेम करता है। और इस बात का बड़ा कड़वा अनुभव आपको तब होता है जब आप देना बंद कर देते हैं। आप तो यही सोचते रह गए कि उस व्यक्ति…

लड़के अगर बेरोज़गार हों और शादी के लिए लालायित हो जाएँ तो तुम कहोगे, “छी! कमाता ना धमामा, शादी करने चला है!”
और लड़कियों से यह बात तुम बोलते नहीं। क्योंकि लड़कियाँ तो गाय हैं, उन्हें कमाना-धमाना थोड़े ही है। उन्हें तो घर में बैठकर बछड़े जनने हैं।
जब बहन…

स्त्री चूँकि गर्भ रखती है तो प्रकृति ने ही उसे शरीर के प्रति बड़ा संवेदनशील बना दिया है। वो बार-बार अपने शरीर को देखती रहती है क्योंकि उसको एक बहुत महीन काम करना है, डेलिकेट काम; उस काम में अगर ज़रा भी गड़बड़ हो गई, इंफेक्शन हो सकता है, कुछ…

हार मोतियों का हज़ार बार भी टूटेगा तो उसे तुम हज़ार बार जोड़ोगे, बार-बार जोड़ो! सुजन अगर रूठ जाएँ, तो बार-बार मनाओ क्योंकि उनसे प्यास बुझती है।
पर जिससे प्यास बुझती ना हो, उससे बस आदतवश जुड़े हो, भ्रमवश, धारणावश जुड़े हो, इसलिए जुड़े हो कि बीस साल से जुड़े…

आप खाना खा रहे हों, कोई आ जाए कहे, “खाना दे दो।“ आप उसको आधा भी मत दीजिए, पूरा ही दे दीजिए। पर कोई आ करके आपसे आपकी आज़ादी ही माँगने लग जाए तो इतनी-सी भी मत दीजिएगा। थाली और आज़ादी में कुछ तो अंतर होगा।
आपके पास चार रोटी…

ये ब्रेकअप होता क्या है? तुम्हें अगर प्रेम है तो क्या तुम तय करके किसी से दूर हो सकते हो? कर कैसे लोगे? ये बात तो हृदय की होती है, आत्मा की होती है। तुम तय थोड़े ही करोगे कि कल से इससे बात नहीं करनी है क्योंकि हमारा ब्रेकअप…

प्रश्नकर्ता: अगर दूध का आप बहिष्कार करते हैं तो गाय की बिलकुल ही बेकद्री हो जाएगी।
आचार्य प्रशांत: ये बात पता नहीं क्यों हमारे दूध पीने वाले भाई-बहन सोचते ही नहीं बिलकुल कि जिस दिन गाय ने दूध देना बंद कर दिया उस दिन वो गाय पालने वाले के लिए,…

इस युग का सबसे केंद्रीय प्रश्न है ये कि, “बीबा हॉट है कि शीबा?” और आप सही चुनाव कर सकें इसके लिए आपको दोनों की एक नहीं चालीस-चालीस तस्वीरें दिखाई जाएँगी। किसकी कमर कैसी है, किसकी जाँघें कैसी हैं, किसका वक्ष कैसा है, और नज़दीक से देखो ताकि तुम्हारा निर्णय…

ये तुम्हारी ज़िन्दगी को समझने की उम्र है। कहाँ तुम ये रिश्तेबाज़ी में फँस रही हो? उसके लिए बहुत समय पड़ा है। पहले थोड़ा मन को जान लो, जीवन को जान लो। समझ तो लो तुम्हारे भीतर वो कौन-सी वृत्ति बैठी है जो खिंची जा रही है लड़कों की ओर।…

बहुत सारा मेडिटेशन वगैरह वही है जो आपको झटका नहीं खाने देगा। ज़िन्दगी बर्बाद चल रही है, सबकुछ आपका ग़लत है, लेकिन सुधरने की कोई ज़रूरत नहीं। आधे-एक घण्टे बैठ करके गाइडेड मेडिटेशन कर लो, वहाँ तुमको गुरुजी कान में बता देंगे कि तुम एक सरोवर के किनारे बैठे हो,…

किसी की कदर तुम कर रहे हो किसी स्वार्थ की ख़ातिर, ठीक? इसको कहते हैं भाव देना। तुम उसे भाव दिए जा रहे हो, भाव दिए जा रहे हो और वो और ऐंठता जा रहा है, ऐंठता जा रहा है। एक बिंदु तो आता है जब तुम कहते हो, “धत्त…

जब सड़क पर निकलो न तो अपनी कमियाँ पता चलती हैं। जो व्यक्ति घर में ही बैठ गया वो बड़ा दम्भी, घमंडी, अहंकारी हो जाता है क्योंकि उसे अपनी कमियों का पता भी नहीं होता। अकसर गृहिणियों की अकड़ बिलकुल लाजवाब होती है। “मैं ही बेग़म हूँ, मैं ही रानी…

हम दूसरे की ज़िंदगी में घुसकर के उसको शांत नहीं करते, जो थोड़ी बहुत शांति उसके पास रही भी होती है पहले से, हम उसकी वो शांति भी लूट लेते हैं; मैं इसलिए कह रहा हूँ कि मत घुसो दूसरे के जीवन में।
तुम अगर वाकई ईमानदारी से यह सोचते…

“बिलकुल एकदम बढ़िया आदमी हैं, रोज़ रात में सो जाते हैं दस बजे और सुबह ठीक पाँच बजे इनकी आँख खुल जाती है।“ करोगे क्या दस बजे सो कर और पाँच बजे आँख खोल कर? एक दिन तो ऐसा आएगा जब आँख खुलनी ही नहीं है। तब बता देना भैंसे…

सब पुरुषों के लिए निश्चित होना चाहिए कि स्त्रियों के ब्यूटी पार्लर में कम-से-कम तीन महीने काम करें। यह व्यवस्था बननी चाहिए। जाकर देखो तो कि जिस रूप-यौवन के पीछे तुम इतने पागल रहते हो उसकी हकीक़त क्या है। जितने फल और सब्जियाँ रसोई में नहीं पाए जाते उससे ज़्यादा…

ये खिसिआना, ये चिढ़चिढ़ाना, ये तनाव, ये खींझ, ये क्रोध, ये उदासी, ये सूनापन, ये भाव कि ‘जीवन ने हमारे साथ अन्याय किया है, हम शोषित हैं, हम शिकार हैं’, ये क्या कर रहा है हमारे साथ? कहीं का छोड़ रहा है हमको? और क्या हम सब इसी भाव में…

अगर आप अपने लक्ष्यों में बार-बार असफलता पाते हैं तो इसकी वजह संकल्पशक्ति, विल पावर इत्यादि का अभाव नहीं है। इसकी वजह ये है कि आपके लक्ष्य हैं ही ग़लत। सही लक्ष्य तो प्रेम-प्रसंग की तरह होता है, वह पकड़ लेता है, आप उसे फिर छोड़ना भी चाहोगे वो आपको…

जिसने तुमको चोट पहुँचाई उसने तुमको इसीलिए चोट पहुँचाई न कि तुम्हें वो चोट पहुँचाए और तुम आंतरिक रुप से आहत हो जाओ? तो दुश्मन को तुम्हारा करारा-से-करारा जवाब क्या हो सकता है? उसके उद्देश्य को पूरा मत होने दो।
वह सोच रहा था कि वो तुमको गाली दे देगा…

कल की सुबह अलग हो सकती है अगर आप आज की रात बदल डालें। आज की रात तो बदलने में कोई रुचि दिखा नहीं रहे, कल की सुबह यूँही अलग कैसे हो जाएगी भाई? कैसे?
बिलकुल एक नया भविष्य आ सकता है अगर तुम वो ना रह गए हो जो…

ग़लती मानना बहुत बड़े लोगों का काम है। छोटे आदमी की पहचान ही यही है कि वह अपनी ग़लतियों पर हमेशा पर्दा डालता नज़र आएगा। क्योंकि उसे छोटा ही रहना है, छोटा है छोटा रहना है। वह ग़लती पर बार-बार पर्दा डालेगा, स्वीकारेगा नहीं। बड़े आदमी को छोटा रहना नहीं…

१० साल पीछे जाना और देखना है कि उस समय मन पर कौन से मुद्दे हावी थे, याद करो! कहाँ गए वह मुद्दे? और पीछे जाओ, अब तुम १५ साल के हो, याद करो मन पर कौन से मुद्दे हावी थे, कहाँ गए मुद्दे?
कितने लोगों को दसवीं के बोर्ड…

प्रश्नकर्ता: “जाने वो कैसे लोग थे, जिनके प्यार को प्यार मिला।“
आचार्य प्रशांत: वो बहुत अलग लोग थे, तुम्हारे जैसे लोग नहीं थे; 'जाने वो कैसे लोग थे, जिनके प्यार को प्यार मिला, हमने तो जब कलियाँ माँगी तो काँटों का हार मिला।' अरे! तुम ख़ुद बहुत बड़ा काँटा हो!…

यह तो साज़िश है जो २ मिनट ५ मिनट या २० मिनट के वीडियो दिखा दिए जाते हैं। इनमें दिखाया थोड़े ही जाता है, इनमें तो छुपाया जाता है। तुम पूरा देखो! पूरा देखने का मतलब है, वही नहीं देखा जो कैमरे के आगे हो रहा है, उनको भी देख…

अच्छे-अच्छे लोग आप देखोगे, खूब कमा रहे होंगे, उनसे पूछो, “क्वालिटी ऑफ लाइफ? रिचनेस इंडेक्स? (जीवन की गुणवत्ता? समृधि सूचक?)” शून्य! “गाना आता है?” नहीं! “तैरना आता है?” नहीं! “संगीत सीखा कुछ?” नहीं! “कुछ और भाषाएँ सीखीं?” नहीं! “दिनभर करते क्या हो?” “कमाता हूँ, कमाता हूँ, कमाता हूँ!” अरे!…

ना किसी पैसे के प्रदर्शन के आगे दबो, झुको, ना किसी की ताक़त के आगे दबो, झुको। और किसी की अंग्रेज़ियत के आगे तो बिलकुल दबना, झुकना नहीं है। और किसी के सौंदर्य के आगे भी दबना, झुकना नहीं है। कि सुंदर लड़की आ गई या हैंडसम लड़का आ गया…

तुम कह रहे हो सोने के प्रयास में एक-दो घण्टे लग जाते हैं। और यह एक-दो घण्टे तुम्हारे पास क्यों हैं? क्योंकि इन एक-दो घण्टों में तुम्हारे पास करने के लिए कोई सार्थक काम नहीं है। तो अब काम है नहीं, रात के दस बज गए, अब दस से लेकर…

परीक्षाओं में सफल होने के, चयनित होने के किसके आसार ज़्यादा हैं, एक अशांत मन के या एक शांत परीक्षार्थी के? और शांति और स्पष्टता हमेशा साथ-साथ चलते हैं।
अगर जीवन में स्पष्टता होगी, तो फिर परीक्षाओं में भी चयन होने की संभावना बढ़ जाएगी।
यह लो, आध्यात्म का व्यवहारिक…

बताओ प्रतियोगी परीक्षा क्यों दे रहे हो? अगर तुम्हें साफ़-साफ़ पता हो कि तुम क्यों दे रहे हो परीक्षा तो ऐसा कैसे होगा कि तुम फिर उसमें मेहनत नहीं करोगे? या तो मेहनत करोगे पूरी या फिर परीक्षा छोड़ ही दोगे। पर तुम ये कभी पता ही करने की कोशिश…

सब प्रेमियों की निशानी है – दो-दो, चार-चार घण्टे लगे हुए हैं फ़ोन पर। और फ़ोन पर नहीं तो आमने-सामने बैठकर एक-दूसरे का भेजा चबा रहे हैं। और मजाल है कि उधर से कचरा फेंका जा रहा है और तुम इधर से फ़ोन काट दो। बेवफ़ा कहलाओगे। कितना मज़ा आता…

आदमी यूँ ही नहीं सिगरेट, शराब पीता; उसे कुछ चाहिए जो उसे मिल नहीं रहा इसलिए वो सिगरेट से क्षुधापूर्ति करना चाहता है। एक सिगरेट से बात बनती नहीं इसलिए दूसरी सिगरेट पीता है, दूसरी सिगरेट से भी बात बनती नहीं तो तीसरी पीता है, चौथी पीता है, पीता ही…