राजनीति में अध्यात्म क्यों ज़रूरी?

Acharya Prashant

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राजनीति में अध्यात्म क्यों ज़रूरी?
अध्यात्म की रोशनी जीवन के हर क्षेत्र पर पड़ती है, तो राजनीति पर भी पड़ेगी ही पड़ेगी। ऐसा कुछ नहीं है कि आध्यात्मिक आदमी राजनीति के प्रति अंधा हो जाता है। बल्कि हक़ीक़त तो यह है कि राजनीति को आध्यात्मिक लोगों की बहुत सख़्त ज़रूरत है, क्योंकि राजनेता ताक़त की ऐसी गद्दियों पर बैठते हैं, जहाँ से वो आपके जीवन को बहुत तरीके से प्रभावित करते हैं। राजनेता अगर आध्यात्मिक नहीं है, तो देश रसातल में जाएगा। राजनीति त्यागनी नहीं है, सही राजनीति करनी है।
https://acharyaprashant.org/en/articles/raajneeti-mein-adhyatm-kyon-zaroori-1_795988a15
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।

वो अपने आप होगा। आप उसको रोक नहीं पाएँगे, उसकी उपेक्षा नहीं कर पाएँगे। आप जिसे राजनीति कहते हैं, या जिन्हें राजनेता कहते हैं, उनका असर आपके जीवन पर कई तरीके से पड़ता है। सिर्फ़ इसी तरीके से नहीं कि वो सड़क, बिजली, पानी के लिए ज़िम्मेदार होते हैं, वैसे तो पड़ता ही है, अन्यथा भी कई तरीकों से वो आपके जीवन को प्रभावित करते हैं।

This article has been created by volunteers of the PrashantAdvait Foundation from transcriptions of sessions by Acharya Prashant
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