
आचार्य नागार्जुन की जीवन कथा का आंरभिक विवरण चीनी भाषा में उपलब्ध है, जिसे क़रीब 405 ई. में प्रसिद्ध बौद्ध अनुवादक कुमारजीव ने उपलब्ध कराया। यह अन्य चीनी एवं तिब्बती वृत्तांत से सहमत हैं कि नागार्जुन दक्षिण भारत में एक ब्राह्मण परिवार में जन्मे थे। ऐतिहासिक रूप से बचपन की…

Questioner(Q): What is the process of clarity? Is it just listening with immersion and no resistance? What is Truth? How we decide it?
Acharya Prashant (AP): Listening without effort, plus if there is Truth in what you hear, there is change and transformation, and that Truth becomes the master. We…

आचार्य प्रशांत: सबसे पहले तो हमें इस धारणा से बाहर आना होगा कि फ़िल्में हमें मात्र मनोरंजन…


श्रद्धावान् लभते ज्ञानं तत्पर: संयतेन्द्रिय: | ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति || ४, ३९ || जितेन्द्रिय, साधनापरायण और श्रद्धावान मनुष्य ज्ञान को प्राप्त होता है तथा ज्ञान को प्राप्त होकर वह बिना विलम्ब के तत्काल ही भगवत्प्राप्तिरूप शान्ति को प्राप्त हो जाता है। —श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय ४, श्लोक ३९प्रश्नकर्ता: आचार्य जी,…

यदा नाहं तदा मोक्षो
यदाहं बन्धनं तदा।
मत्वेति हेलया किंचिन्-
मा गृहाण विमुंच मा॥८- ४॥
अनुवाद: जब तक 'मैं' या 'मेरा' का भाव है तब तक बंधन है, जब 'मैं' या 'मेरा' का भाव नहीं है तब मुक्ति है। यह जानकर न कुछ त्याग करो और न कुछ ग्रहण ही…

भारतीयों को शायद यह लगता है कि हिंदुस्तान से बाहर जहाँ कहीं कोई मिलेगा वह ‘अंग्रेज़ी’ ही बोल रहा होगा। एक तो यह बहुत बड़ी ग़लतफ़हमी है – बाहर जैसे ही हम निकलेंगे वैसे ही जो मिल रहा होगा अंग्रेज़ी ही बोल रहा होगा। हिंदुस्तान बेचारा बस पिछड़ा हुआ है,…

कथं न ज्ञेयमस्माभिः पापादस्मानिवर्तितुम्। कुलक्षयकृतं दोषं प्रपश्यद्भिर्जनार्दन ॥३९॥
"तो कुल क्षय से होने वाले दोष को देख-सुन कर भी हम लोगों को इस पाप से निवृत्त होने का विचार क्यों नहीं करना चाहिए?"
~ श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय १, अर्जुन विषाद योग, श्लोक ३९
आचार्य प्रशांत: इसी आशय के तर्क आगे भी…

अजीब सी स्थिति यह है कि एक साधारण दिखने वाली लड़की से शायद ज़्यादा मुश्किल है एक सुंदर लड़की की ज़िंदगी, क्योंकि उसके खरीददार बहुत ज़्यादा हैं और उसे बहुत कुछ मिल जाएगा। और यह जो तुमको मिल जाएगा न अपनी सुंदरता के कारण, यही नर्क है तुम्हारा। तुमको लगेगा,…

तुम्हारे सामने पहलवान खड़ा हो लड़ाई के लिए, और तुम उस वक़्त कहो कि, “मैं अब ज़रा दंड-बैठक करता हूँ, शरीर बनाता हूँ”, तो तुम पिटोगे ही नहीं, बहुत बुरी तरह पिटोगे!
एक सज्जन थे, उन्हें सलाह दी गई थी कि, ‘साहब! आपका कॉलेस्ट्रॉल बहुत बढ़ गया है, तो आप…

यह सब अय्याशियाँ होती हैं, “मन कर रहा है, मन नहीं कर रहा है, आज दिल तन्हा सा है, उदास सा है।“ यह क्या है? मन गया भाड़ में! इधर काम रखा हुआ है, जो ज़रूरी चीज़ है वह करेंगे न, मन का क्या है!
मनचलों के लिए दुनिया की…

भई! गर्मी का मौसम हो, तुम शरीर खुला रखो बात समझ में आती है। तुम कहीं नदी में, स्विमिंग पूल (तरणताल) में नहाने जा रहे हो, तुम कपड़े उतार दो, बात समझ में आती है। या तुम सिर्फ़ अपनी सुविधा के लिए कम कपड़े पहनो तो भी बात समझ में…

दूसरे आपका हाथ मरोड़ रहे हैं, समझिए क्यों। क्योंकि आप हाथ मरोड़वाने के लिए तैयार खड़े हैं।
धोखा एक बार हो सकता है न, बार-बार हो तो इसका क्या मतलब है? कोई व्यक्ति आपके साथ एक बार दुर्व्यवहार कर गया, ठीक। बार-बार कर रहा है, क्या मतलब है इस बात…

स्त्री चूँकि गर्भ रखती है तो प्रकृति ने ही उसे शरीर के प्रति बड़ा संवेदनशील बना दिया है। वो बार-बार अपने शरीर को देखती रहती है क्योंकि उसको एक बहुत महीन काम करना है, डेलिकेट काम; उस काम में अगर ज़रा भी गड़बड़ हो गई, इंफेक्शन हो सकता है, कुछ…

ये तुम्हारी ज़िन्दगी को समझने की उम्र है। कहाँ तुम ये रिश्तेबाज़ी में फँस रही हो? उसके लिए बहुत समय पड़ा है। पहले थोड़ा मन को जान लो, जीवन को जान लो। समझ तो लो तुम्हारे भीतर वो कौन-सी वृत्ति बैठी है जो खिंची जा रही है लड़कों की ओर।…

यही जीवन जीने की कला है, मौज करो, मस्ती करो! गंभीर मत हो जाना। बिलकुल हल्के रहो, क्योंकि रखा क्या है?
आज तुम जिस बात को गंभीरता से लेते हो, कल वो तुम्हारे लिए दो पैसे की हो जाएगी। याद है, जब चौथी-पाँचवी में रिज़ल्ट आया था तो तुम कैसे…

जब सड़क पर निकलो न तो अपनी कमियाँ पता चलती हैं। जो व्यक्ति घर में ही बैठ गया वो बड़ा दम्भी, घमंडी, अहंकारी हो जाता है क्योंकि उसे अपनी कमियों का पता भी नहीं होता। अकसर गृहिणियों की अकड़ बिलकुल लाजवाब होती है। “मैं ही बेग़म हूँ, मैं ही रानी…

कभी किसी से बड़ी नफ़रत उठे तो मैं एक सूत्र बता देता हूँ – अपनी नफ़रत को और अपने अहंकार को थोड़ी देर के लिए किनारे रख कर उससे 1 घण्टे बात कर लेना, फिर नफ़रत कर नहीं पाओगे और ज़्यादा। इसलिए जिन्हें नफ़रत क़ायम रखनी होती है, पहला काम…

हर आदमी अपनी नज़र में नाकाम आशिक़ बन कर घूम रहा है। बहुतों का तो ब्रेकअप तब हो जाता है जब उनका कोई अफ़ेयर भी नहीं था। कहो, “क्यों इतने उदास हो?” “ब्रेकअप हो गया है!” तेरा अफ़ेयर कब था भाई? पर ब्रेकअप में जो रुहानी आनंद है वो तो …

ये खिसिआना, ये चिढ़चिढ़ाना, ये तनाव, ये खींझ, ये क्रोध, ये उदासी, ये सूनापन, ये भाव कि ‘जीवन ने हमारे साथ अन्याय किया है, हम शोषित हैं, हम शिकार हैं’, ये क्या कर रहा है हमारे साथ? कहीं का छोड़ रहा है हमको? और क्या हम सब इसी भाव में…

जिसने तुमको चोट पहुँचाई उसने तुमको इसीलिए चोट पहुँचाई न कि तुम्हें वो चोट पहुँचाए और तुम आंतरिक रुप से आहत हो जाओ? तो दुश्मन को तुम्हारा करारा-से-करारा जवाब क्या हो सकता है? उसके उद्देश्य को पूरा मत होने दो।
वह सोच रहा था कि वो तुमको गाली दे देगा…

ऐसा तो नहीं है कि दस-बारह साल के बच्चे को अगर आप रामकृष्ण की बोध कथाएँ पढ़ाएँगे तो उसे समझ में नहीं आने वाली। आएँगी न। आपके घरों में क्यों नहीं है रामकृष्ण परमहंस की सरल साधारण कथाओं की किताब? कृष्णमूर्ति साहब का साहित्य आता है ‘*कृष्णमूर्ति फॉर द यंग*’।…

१० साल पीछे जाना और देखना है कि उस समय मन पर कौन से मुद्दे हावी थे, याद करो! कहाँ गए वह मुद्दे? और पीछे जाओ, अब तुम १५ साल के हो, याद करो मन पर कौन से मुद्दे हावी थे, कहाँ गए मुद्दे?
कितने लोगों को दसवीं के बोर्ड…

तुम बहुत चीज़ों को लेकर परेशान हो, ज़िन्दगी के तमाम झंझट हैं, ये है, वो है और लग गए एक गेम (खेल) खेलने। अब वो जो गेम खेल रहे हो तुम वो नशे की तरह तुम्हें थोड़ी देर के लिए भुलवा देगा कि तुम कितने परेशान हो।
पर कोई भी…

बताओ प्रतियोगी परीक्षा क्यों दे रहे हो? अगर तुम्हें साफ़-साफ़ पता हो कि तुम क्यों दे रहे हो परीक्षा तो ऐसा कैसे होगा कि तुम फिर उसमें मेहनत नहीं करोगे? या तो मेहनत करोगे पूरी या फिर परीक्षा छोड़ ही दोगे। पर तुम ये कभी पता ही करने की कोशिश…

पढ़ाई में मन नहीं लगता क्योंकि वो पढ़ाई शायद तुम्हारे लिए है ही नहीं। वो पढ़ाई तुम कर ही रहे हो उनके दबाव में जो तुमको एक तरह से स्पॉन्सर कर रहे हैं कि ‘तू घर बैठ, तुझे रोटी-पानी की फ़िक्र करने की अभी कोई ज़रूरत नहीं साल-दो-साल, तू बैठ…

दुनिया के बाप रहो! ना सिर्फ़ तुम्हें चोट नहीं लगनी चाहिए बल्कि तुम में इतनी करुणा होनी चाहिए कि मारने वाले से भी पूछो, “हाथ तो नहीं टूट गया तेरा?”
पहली बात तो फ़ौलाद जैसा होना चाहिए तुमको कि कोई तुम्हें मार भी रहा है तो तुम्हें कुछ नहीं हो…

वो कहानी याद है न कि दस जने उतरे हैं पीये हुए, किससे? एक नाव से उतरे हैं, ठीक है? अब वो गिनना चाहते हैं कि कोई एक रास्ते में टपक तो नहीं गया था नदी में। तो वो सब गिनना शुरू करते हैं, तो गिन रहे हैं कि भैया…

हम छुपे हुए दर्द में जीनेवाले लोग हैं, पूरी दुनिया के सब लोग हैं, छुपे हुए दर्द में ही जी रहे हैं। यह सब जो हँसते हुए, मुस्कुराते हुए लोग तुमको चारों ओर दिख रहे हैं, यह हँस-मुस्कुरा सिर्फ़ इसलिए रहे हैं क्योंकि इन्हें अपनी छाती का दर्द का कुछ…

अजीब सी स्थिति ये है कि एक साधारण सी दिखनेवाली लड़की से शायद ज़्यादा मुश्किल है एक सुंदर लड़की की ज़िंदगी। क्योंकि उसके खरीददार बहुत ज़्यादा हैं, और उसे बहुत कुछ मिल जाएगा। और यह जो तुमको बहुत कुछ मिल जाएगा न अपनी सुंदरता के कारण, यही नर्क है तुम्हारा।…

तुम ग़लत राहों को ठुकरा कर तो देखो, सही राह खुलती है कि नहीं खुलती। और यह घटिया और झूठा तर्क बिलकुल मत दे दो कि, “मुझे सही राह मिली नहीं मैं इसलिए ग़लत राह चल पड़ा।“ बात यह नहीं है, सही राह हमेशा खुली होती है और उपलब्ध होती…

तुम मुझे एक आदमी दिखा दो जो इन दोनों कामों के अलावा कोई तीसरा काम करता हो। आम व्यक्ति का सारा जीवन इन्हीं दो कामों में जा रहा है कि नहीं? पहला, ठूसना – और मैं सिर्फ़ मुँह से ठूसने की बात नहीं कर रहा, जेब में ठूसना, आँख में…

यह जो सड़क पर आदमी चलता है न, जिसको तुम 'कॉमन मैन' (आम आदमी) बोलते हो, उसकी शक्ल ध्यान से देखो; वो तुम हो। और अगर वैसा ही हो जाना है तो फिर कोई बात नहीं। बिलकुल तयशुदा कहानी है, उसमें कोई बड़े उतार-चढ़ाव नहीं हैं। उस कहानी…

तुम जंगल में शेर को हिरण का शिकार करके खाते देखते हो तो तुम्हारा दिल टूट जाता है क्या? बुरा लगता भी होगा तो थोड़ा-बहुत, क्योंकि जानते हो कि ये तो जंगल है यहाँ तो ये होना-ही-होना है। तो जंगल में तुम्हें बुरा नहीं लगेगा।
लेकिन एक शहर की गलियों…

छोटे आदमी की सज़ा ये कि उसकी ज़िंदगी में सब छोटे-छोटे मुद्दे होंगे। यही मुद्दा होगा कि इतने से इतने बजे तक पानी आता है, पोछा लगाया कि नहीं लगाया, भैंस का दूध लेना है कि गाय का दूध लेना है, नौकरी में फलाने को नीचा कैसे दिखाना है, ऊपर…

तुम्हें बर्बाद करने में एक चीज़ का सबसे बड़ा योगदान रहा है तो वो है – फिल्में और *टीवी*।
तुम्हें पता भी नहीं है जिनको तुम अपने विचार कहते हो वो वास्तव में फ़िल्मी विचार हैं। जिनको तुम अपनी भावनाएँ बोलते हो वो वास्तव में फ़िल्मों ने दी हैं तुमको।…

तुलना तो तुम्हें करनी ही है; इनसे क्या तुलना कर रहे हो, अपने दफ़्तर के लोगों से तुलना करते हो, वो सब तुम्हारे ही जैसे हैं।
ये क्या तुलना कर रहे हो कि, “मेरे पास आल्टो है, दूसरे के पास डिज़ायर है”, कि, “मेरे पास डिज़ायर है और दूसरे के…

इतनी बड़ी भारी तुम्हारे साथ त्रासदी हो गई कि तुम आत्महत्या की सोचने लग गईं? तुम्हारा जीवन इतना फ़िज़ूल है? एक फ़िज़ूल आदमी तुम्हारी ज़िंदगी में आता है तुम्हारे साथ कुछ फ़िज़ूल की हरकतें करता है और तुम आँसुओं में डूबी हुई हो कि, “अरे! मैं डिप्रेस्ड हो गई” तुम्हें…

प्रश्नकर्ता: ज़िंदगी में कोई प्रिय है, जिसे हम बहुत ज़्यादा चाहते हैं, उसे हम खो देते हैं – तो वो अच्छा कैसे हो सकता है फिर? आचार्य प्रशांत: वो आपको बताएगा कि आपको जो दुःख हो रहा है, वो आपके प्रिय के साथ आपका जो रिश्ता था, उसकी अपूर्णता का…

मैं वनडे(एक दिवसिय) देखता नहीं, टी-२० देखता नहीं, मैं सिर्फ़ टेस्ट मैच देखता हूँ; वह भी तब जब भारत जाता है – वो ही जो सेना कंट्रीज़ हैं चार, साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूज़ीलैंड, ऑस्ट्रेलिया – और उसमें भी तब देखता हूँ जब टीम की हालत बिलकुल ख़राब हो, क्योंकि…

अगर यही बात है कि काम चुनना है कि, “काम क्या करें?” वह काम चुनो जिसमें तुम सबसे कमज़ोर हो। लेकिन अगर ऐसा काम चुनोगो तो तनख्वाह भी कम मिलेगी तो अधिकांश लोग वह काम चुनते हैं जिसको बोलते हैं, ‘मेरी स्ट्रेंथ (शक्ति)।‘ जबकि आध्यात्मिक दृष्टि से देखो तो तुम्हें…

सेक्स अगर तुम्हें शांत कर सकता होता, दो बार, चार बार में कर गया होता न? यहाँ तो लोग अपने जीवन काल में हज़ारों बार कर जाते हैं और उसके बाद भी लालायित रहते हैं, प्यास ही नहीं बुझती।
अधेड़ हो गए, साठ के हो गए, अस्सी के हो गए,…

"हम इतना प्यार करते हैं उधर से कुछ आता नहीं।" जब यह प्रश्न उठे तो अपने-आप से पूछिए कि, "मैं माँग क्या रही हूँ?"
'आई हियर बाय रिक्वेस्ट यू टू लव मी' (मैं तुमसे मुझे प्रेम करने की प्रार्थना करती हूँ)
"महोदय, सविनय निवेदन है कि कृपया थोड़ा…

डिप्रेशन तब तक नहीं हो सकता जब तक अपने-आप को बहुत मजबूर अनुभव ना करो । और मजबूर हम नहीं होते, मजबूर हमें हमारी अंधी कामनाएँ बनाती हैं। अन्यथा कोई मजबूर नहीं है। कामनाओं में भी कोई दिक़्क़त नहीं है, अगर वो अंधी ना हों। कुछ ऐसा माँग रहे हो…

जो लोग ग़लत राह पर चल रहे हों, और सफल आदि होते दिखाई देते हों, समृद्ध होते दिखाई देते हों, मौज मारते दिखाई देते हों, उनको देख कर कभी मन छोटा मत कीजिएगा। उनकी सफलता, उनकी समृद्धि, उनकी मौज बहुत सतही है। अंदर-ही-अंदर महा दुःख है उनमें। उनके लिए प्रार्थना…

तुम्हें क्या लगता है नर्क वो जगह है जहाँ बड़े-बड़े कड़ाहों में तेल उबल रहा है और लोग उसमें पकौड़ो की तरह तले जा रहे हैं? ना! नर्क वो जगह है जहाँ सब खूब मेहनत करते हैं, कमाते हैं, खाते हैं और सो जाते हैं। नर्क बड़ी साफ़-सुथरी जगह है…

अभी मर जाओ तो तुम्हारी देह को लोग कहेंगे, “वह मिट्टी रखी है, मिट्टी।“ यह हैसियत है हमारी गंभीरता की। यह भी नहीं कहेंगे कि, “वह नवीन रखा है”, क्या कहेंगे? “मिट्टी रखी है; वह मिट्टी।“ और जब तक साँस चल रही है तब तक बड़े गंभीर हो, “अरे! दर्द-ए-दिल,…

जब भी कभी मन में यह प्रश्न आए, “क्या करूँ?” – कोई भी मुद्दा, कोई भी किस्सा हो सकता है, उस किस्से के अंत में अगर प्रश्न है कि, “क्या करूँ?” तो क्या करना है? यह सब अच्छे से समझ लीजिए, जो कर रहे हैं उस पर ग़ौर करना है;…

अपने-आपको देखकर यह ना कहा करो, “आह, हा, हा! क्या बात है! मैं ही तो हूँ सरताज, सिकंदर!” और कोई तुम्हारे बारे में धोखे में रह जाए तो रह जाए, तुम अपने बारे में कैसे धोखे में हो? तुम अपनी हरक़तें नहीं जानते? तुम अपने विचार नहीं जानते? तुम नहीं…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी प्रणाम स्वीकार करें। हाल ही में कश्मीर में एक छोटी बच्ची को बड़ी बर्बरता से मार दिया गया। मैं जब भी इस तरह की किसी घटना के बारे में सुनती हूँ तो बुरी तरह से बेचैन हो जाती हूँ और अपने-आप को असहाय, बेबस पाती हूँ, अवसाद…