
प्रश्नकर्ता: पिछली बार चंडीगढ़ तरफ़ से आया था जी, आपसे जुड़ा था। तब मैं अकेला आया था, बिलकुल हताश, परेशान था। आज मेरी साथ श्रीमती जी भी आई हैं। मेरा प्रश्न यह है जी, जैसे संतों ने कहा है—
"प्रेम-गली अति सांकरी, तामे दो न समाहिं। जब मैं था तब…

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Questioner(Q): What is the process of clarity? Is it just listening with immersion and no resistance? What is Truth? How we decide it?
Acharya Prashant (AP): Listening without effort, plus if there is Truth in what you hear, there is change and transformation, and that Truth becomes the master. We…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, एक तरफ़़ तो फ़िल्में हमें मनोरंजन देती हैं, हँसाती हैं, रुलाती हैं और दूसरी ओर उसी इंडस्ट्री से दुःखद और चौका देने वाली खबरें भी आती रहती हैं। कुछ कहिए।
आचार्य प्रशांत: सबसे पहले तो हमें इस धारणा से बाहर आना होगा कि फ़िल्में हमें मात्र मनोरंजन…


“माँसाहार गरीबों के लिए वरदान है क्योंकि माँसाहार के माध्यम से गरीबों को सस्ता प्रोटीन मिल जाता है।“ १ ग्राम प्रोटीन अगर आप मटन से लेते हैं तो लगते हैं ३ रुपये। उतना ही प्रोटीन, १ ग्राम, अगर आप अंडे से लेते हैं तो लगते हैं १ रुपय ३० पैसे, उतना ही प्रोटीन, १ ग्राम, अगर आप चिकन से लेते हैं तो लगता हैं १ रुपया।

श्रद्धावान् लभते ज्ञानं तत्पर: संयतेन्द्रिय: | ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति || ४, ३९ || जितेन्द्रिय, साधनापरायण और श्रद्धावान मनुष्य ज्ञान को प्राप्त होता है तथा ज्ञान को प्राप्त होकर वह बिना विलम्ब के तत्काल ही भगवत्प्राप्तिरूप शान्ति को प्राप्त हो जाता है। —श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय ४, श्लोक ३९प्रश्नकर्ता: आचार्य जी,…

◾ एक ही जाति होती है - वह है "बल"। बल विकसित करो अपने भीतर।
◾ आत्मा का इस पूरे देह व्यापार से कोई लेना देना ही नहीं।
◾ मिथ्याचारी वह है जो आगे के लालच में अच्छा काम करता है।
◾ आत्मा का विकृत सिद्धांत ही भारत की दुर्दशा…

यदा नाहं तदा मोक्षो
यदाहं बन्धनं तदा।
मत्वेति हेलया किंचिन्-
मा गृहाण विमुंच मा॥८- ४॥
अनुवाद: जब तक 'मैं' या 'मेरा' का भाव है तब तक बंधन है, जब 'मैं' या 'मेरा' का भाव नहीं है तब मुक्ति है। यह जानकर न कुछ त्याग करो और न कुछ ग्रहण ही…

भारतीयों को शायद यह लगता है कि हिंदुस्तान से बाहर जहाँ कहीं कोई मिलेगा वह ‘अंग्रेज़ी’ ही बोल रहा होगा। एक तो यह बहुत बड़ी ग़लतफ़हमी है – बाहर जैसे ही हम निकलेंगे वैसे ही जो मिल रहा होगा अंग्रेज़ी ही बोल रहा होगा। हिंदुस्तान बेचारा बस पिछड़ा हुआ है,…

कथं न ज्ञेयमस्माभिः पापादस्मानिवर्तितुम्। कुलक्षयकृतं दोषं प्रपश्यद्भिर्जनार्दन ॥३९॥
"तो कुल क्षय से होने वाले दोष को देख-सुन कर भी हम लोगों को इस पाप से निवृत्त होने का विचार क्यों नहीं करना चाहिए?"
~ श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय १, अर्जुन विषाद योग, श्लोक ३९
आचार्य प्रशांत: इसी आशय के तर्क आगे भी…

ना ब्रह्म से मतलब, ना गीता से मतलब, ना उपनिषदों से मतलब। अंधविश्वासों से मतलब है, कुट्टू के आटे से मतलब है।
"क्या चबा रही हो भाभी?" कहेंगी, "ये फलाहारी लड्डू हैं।" ये फलाहारी लड्डू कौन-से होते हैं? अब यह धार्मिकता का प्रमाण दिया जा रहा है कि, "हम फलाहारी…

अजीब सी स्थिति यह है कि एक साधारण दिखने वाली लड़की से शायद ज़्यादा मुश्किल है एक सुंदर लड़की की ज़िंदगी, क्योंकि उसके खरीददार बहुत ज़्यादा हैं और उसे बहुत कुछ मिल जाएगा। और यह जो तुमको मिल जाएगा न अपनी सुंदरता के कारण, यही नर्क है तुम्हारा। तुमको लगेगा,…

लड़कीवाले लड़की देने को राज़ी नहीं होते अगर सरकारी नौकरी नहीं है। और कोई वजह हो-न-हो, वंश चलाने की ख़ातिर हमें यूपीएससी निकालना पड़ेगा। ‘वंश चलाने के लिए यूपीएससी निकालना पड़ेगा!’ यह सब तो तुम्हारे सारे कारण हैं सरकारी नौकरी के पीछे जाने के, नहीं तो और तुम क्यों इतने…

दिल में जिसको बैठाना था उसकी जगह और बहुत कुछ बैठा लिया। अब सरकारी नौकरी का लालच बैठा हुआ है दिल में, क्यों? सब जानते हैं क्यों! गाड़ी मिल जाएगी, सरकारी बंगला मिल जाएगा, कोई निकाल नहीं सकता। कोई निकाल नहीं सकता बड़ा आनंद रहता है, अज़ीम-ओ-शान-शहंशाह। ग्यारह बजे जाओ,…

तुम्हारे सामने पहलवान खड़ा हो लड़ाई के लिए, और तुम उस वक़्त कहो कि, “मैं अब ज़रा दंड-बैठक करता हूँ, शरीर बनाता हूँ”, तो तुम पिटोगे ही नहीं, बहुत बुरी तरह पिटोगे!
एक सज्जन थे, उन्हें सलाह दी गई थी कि, ‘साहब! आपका कॉलेस्ट्रॉल बहुत बढ़ गया है, तो आप…

यह सब अय्याशियाँ होती हैं, “मन कर रहा है, मन नहीं कर रहा है, आज दिल तन्हा सा है, उदास सा है।“ यह क्या है? मन गया भाड़ में! इधर काम रखा हुआ है, जो ज़रूरी चीज़ है वह करेंगे न, मन का क्या है!
मनचलों के लिए दुनिया की…

सबसे पहले यह समझो कि दूसरे तुम में कमज़ोरी देख रहे हैं न, इसीलिए तुम पर चढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। अगर वह तुममे कमज़ोरी देखेंगे ही नहीं तो तुम पर चढ़ने की कोशिश भी नहीं करेंगे। बात यह नहीं है कि उसने जो भी कहा है वह सही…

भई! गर्मी का मौसम हो, तुम शरीर खुला रखो बात समझ में आती है। तुम कहीं नदी में, स्विमिंग पूल (तरणताल) में नहाने जा रहे हो, तुम कपड़े उतार दो, बात समझ में आती है। या तुम सिर्फ़ अपनी सुविधा के लिए कम कपड़े पहनो तो भी बात समझ में…

चेतना ना बचे उसके बाद देह का हश्र भी देखा है? दो दिन पुराना मुर्दा भी देखा है, कैसा हो जाता है? यह है इस देह की औक़ात। बड़ी सुंदरता निखारते फिरते हो! यह जितने प्रेमी घूम रहे हैं, देह के, यह पास आने से घबराएँगे।
मर जाओगे उसके ४…

समय तुम्हें इसलिए दिया गया है ताकि समय से आगे जा सको। शरीर तुम्हें इसलिए दिया गया है ताकि शरीर से आगे जा सको। शरीर इसलिए नहीं दिया गया है कि शरीर ही को बचाए पड़े हो, “और दो-सौ साल जिएँगे!” जाते-जाते अपना थोड़ा सा अंश छोड़ गए कि, “इसकी …

दूसरे आपका हाथ मरोड़ रहे हैं, समझिए क्यों। क्योंकि आप हाथ मरोड़वाने के लिए तैयार खड़े हैं।
धोखा एक बार हो सकता है न, बार-बार हो तो इसका क्या मतलब है? कोई व्यक्ति आपके साथ एक बार दुर्व्यवहार कर गया, ठीक। बार-बार कर रहा है, क्या मतलब है इस बात…

स्त्री चूँकि गर्भ रखती है तो प्रकृति ने ही उसे शरीर के प्रति बड़ा संवेदनशील बना दिया है। वो बार-बार अपने शरीर को देखती रहती है क्योंकि उसको एक बहुत महीन काम करना है, डेलिकेट काम; उस काम में अगर ज़रा भी गड़बड़ हो गई, इंफेक्शन हो सकता है, कुछ…

ये ब्रेकअप होता क्या है? तुम्हें अगर प्रेम है तो क्या तुम तय करके किसी से दूर हो सकते हो? कर कैसे लोगे? ये बात तो हृदय की होती है, आत्मा की होती है। तुम तय थोड़े ही करोगे कि कल से इससे बात नहीं करनी है क्योंकि हमारा ब्रेकअप…

ये तुम्हारी ज़िन्दगी को समझने की उम्र है। कहाँ तुम ये रिश्तेबाज़ी में फँस रही हो? उसके लिए बहुत समय पड़ा है। पहले थोड़ा मन को जान लो, जीवन को जान लो। समझ तो लो तुम्हारे भीतर वो कौन-सी वृत्ति बैठी है जो खिंची जा रही है लड़कों की ओर।…

जिस साल मेरा चयन हुआ था, पाँच लाख बैठे थे और सीट थी मुश्किल से, मेरे ख्याल से, ढाई-सौ, तीन-सौ। वो जो पूरी प्रक्रिया है वो बनी ही ऐसी है कि उसमें से हज़ार में से नौ-सौ-निन्यानवे लोग अचयनित ही निकलेंगे और यह बात तुमको पहले से पता होती है…

यही जीवन जीने की कला है, मौज करो, मस्ती करो! गंभीर मत हो जाना। बिलकुल हल्के रहो, क्योंकि रखा क्या है?
आज तुम जिस बात को गंभीरता से लेते हो, कल वो तुम्हारे लिए दो पैसे की हो जाएगी। याद है, जब चौथी-पाँचवी में रिज़ल्ट आया था तो तुम कैसे…

जब सड़क पर निकलो न तो अपनी कमियाँ पता चलती हैं। जो व्यक्ति घर में ही बैठ गया वो बड़ा दम्भी, घमंडी, अहंकारी हो जाता है क्योंकि उसे अपनी कमियों का पता भी नहीं होता। अकसर गृहिणियों की अकड़ बिलकुल लाजवाब होती है। “मैं ही बेग़म हूँ, मैं ही रानी…

जो अपनी ग़लती स्वीकारेगा नहीं, उसकी सज़ा ये होगी कि वही अपनी ग़लती दोहराएगा। ग़लती स्वीकार लो, ग़लती से मुक्त हो जाओगे। दूसरों को दोष देते रहोगे, मानोगे ही नहीं कि ग़लती तुमने करी तो उसी ग़लती को बाध्य हो जाओगे दोहराने के लिए। ग़लती मानना बड़ी बहादुरी का काम…

कभी किसी से बड़ी नफ़रत उठे तो मैं एक सूत्र बता देता हूँ – अपनी नफ़रत को और अपने अहंकार को थोड़ी देर के लिए किनारे रख कर उससे 1 घण्टे बात कर लेना, फिर नफ़रत कर नहीं पाओगे और ज़्यादा। इसलिए जिन्हें नफ़रत क़ायम रखनी होती है, पहला काम…

हर आदमी अपनी नज़र में नाकाम आशिक़ बन कर घूम रहा है। बहुतों का तो ब्रेकअप तब हो जाता है जब उनका कोई अफ़ेयर भी नहीं था। कहो, “क्यों इतने उदास हो?” “ब्रेकअप हो गया है!” तेरा अफ़ेयर कब था भाई? पर ब्रेकअप में जो रुहानी आनंद है वो तो …

ये खिसिआना, ये चिढ़चिढ़ाना, ये तनाव, ये खींझ, ये क्रोध, ये उदासी, ये सूनापन, ये भाव कि ‘जीवन ने हमारे साथ अन्याय किया है, हम शोषित हैं, हम शिकार हैं’, ये क्या कर रहा है हमारे साथ? कहीं का छोड़ रहा है हमको? और क्या हम सब इसी भाव में…

ना संसार से डरो, ना सरकार से डरो, ना डरो दुनिया के तानों से, ना डरो अधूरे अरमानों से, डरो तो बस ज़िंदगी के बर्बाद चले जाने से। घड़ी की टिक-टिक को अपना दोस्त बना लो, हर घण्टे-दो- घण्टे पूछा करो अपने-आप से, “अपने समय का जो मैं ऊँचे-से-ऊँचा, बढ़िया-से-बढ़िया…

जिसने तुमको चोट पहुँचाई उसने तुमको इसीलिए चोट पहुँचाई न कि तुम्हें वो चोट पहुँचाए और तुम आंतरिक रुप से आहत हो जाओ? तो दुश्मन को तुम्हारा करारा-से-करारा जवाब क्या हो सकता है? उसके उद्देश्य को पूरा मत होने दो।
वह सोच रहा था कि वो तुमको गाली दे देगा…

ग़लती मानना बहुत बड़े लोगों का काम है। छोटे आदमी की पहचान ही यही है कि वह अपनी ग़लतियों पर हमेशा पर्दा डालता नज़र आएगा। क्योंकि उसे छोटा ही रहना है, छोटा है छोटा रहना है। वह ग़लती पर बार-बार पर्दा डालेगा, स्वीकारेगा नहीं। बड़े आदमी को छोटा रहना नहीं…

ऐसा तो नहीं है कि दस-बारह साल के बच्चे को अगर आप रामकृष्ण की बोध कथाएँ पढ़ाएँगे तो उसे समझ में नहीं आने वाली। आएँगी न। आपके घरों में क्यों नहीं है रामकृष्ण परमहंस की सरल साधारण कथाओं की किताब? कृष्णमूर्ति साहब का साहित्य आता है ‘*कृष्णमूर्ति फॉर द यंग*’।…

१० साल पीछे जाना और देखना है कि उस समय मन पर कौन से मुद्दे हावी थे, याद करो! कहाँ गए वह मुद्दे? और पीछे जाओ, अब तुम १५ साल के हो, याद करो मन पर कौन से मुद्दे हावी थे, कहाँ गए मुद्दे?
कितने लोगों को दसवीं के बोर्ड…

एक बेज़ुबान निरीह को पकड़ कर काट दिया, उसका माँस पका कर खा गए – इससे कौन-सी परम सत्ता आपको आशीर्वाद देने वाली है, बताइए ज़रा? इससे आसमानों से फूल बरसेंगे आप पर? क्या तुक है!
जब बात की जाती है पशु बलि की, तो वास्तव में कहा जाता है…

तुम बहुत चीज़ों को लेकर परेशान हो, ज़िन्दगी के तमाम झंझट हैं, ये है, वो है और लग गए एक गेम (खेल) खेलने। अब वो जो गेम खेल रहे हो तुम वो नशे की तरह तुम्हें थोड़ी देर के लिए भुलवा देगा कि तुम कितने परेशान हो।
पर कोई भी…

बताओ प्रतियोगी परीक्षा क्यों दे रहे हो? अगर तुम्हें साफ़-साफ़ पता हो कि तुम क्यों दे रहे हो परीक्षा तो ऐसा कैसे होगा कि तुम फिर उसमें मेहनत नहीं करोगे? या तो मेहनत करोगे पूरी या फिर परीक्षा छोड़ ही दोगे। पर तुम ये कभी पता ही करने की कोशिश…

पढ़ाई में मन नहीं लगता क्योंकि वो पढ़ाई शायद तुम्हारे लिए है ही नहीं। वो पढ़ाई तुम कर ही रहे हो उनके दबाव में जो तुमको एक तरह से स्पॉन्सर कर रहे हैं कि ‘तू घर बैठ, तुझे रोटी-पानी की फ़िक्र करने की अभी कोई ज़रूरत नहीं साल-दो-साल, तू बैठ…

सोचो तुम किसी शॉपिंग-मॉल में हो और वहाँ कबीर साहब का भजन बजने लग जाए; बिक्री आधी रह जाएगी बता रहा हूँ। इसलिए बाज़ार का अध्यात्म से छत्तीस का आँकड़ा है। बाज़ार कभी नहीं चाहेगा कि अध्यात्म सफल हो और बाज़ार हर तरह की साज़िशें करेगा अध्यात्म को गिराने की।…

हवाई जहाज का टिकट बुक कराना है और आपका नाम है ‘अमित’ तो आपको 'AMIT' ही लिखना होगा। 'अमित' लिखकर आप हवाई जहाज में यात्रा करके दिखा दीजिए।
आप कह दीजिए कि, “'अ मि त' नाम है मेरा”, तो आप हवाई जहाज में यात्रा नहीं कर पाएँगे।
ट्रेवल बुकिंग, …

दुनिया के बाप रहो! ना सिर्फ़ तुम्हें चोट नहीं लगनी चाहिए बल्कि तुम में इतनी करुणा होनी चाहिए कि मारने वाले से भी पूछो, “हाथ तो नहीं टूट गया तेरा?”
पहली बात तो फ़ौलाद जैसा होना चाहिए तुमको कि कोई तुम्हें मार भी रहा है तो तुम्हें कुछ नहीं हो…

वो कहानी याद है न कि दस जने उतरे हैं पीये हुए, किससे? एक नाव से उतरे हैं, ठीक है? अब वो गिनना चाहते हैं कि कोई एक रास्ते में टपक तो नहीं गया था नदी में। तो वो सब गिनना शुरू करते हैं, तो गिन रहे हैं कि भैया…

हम छुपे हुए दर्द में जीनेवाले लोग हैं, पूरी दुनिया के सब लोग हैं, छुपे हुए दर्द में ही जी रहे हैं। यह सब जो हँसते हुए, मुस्कुराते हुए लोग तुमको चारों ओर दिख रहे हैं, यह हँस-मुस्कुरा सिर्फ़ इसलिए रहे हैं क्योंकि इन्हें अपनी छाती का दर्द का कुछ…

दुनिया में एक-से-बढ़कर-एक प्रकाशित स्त्रियाँ हुईं हैं, जाओ उन्हें चाहो, बिलकुल उनके प्रेम में पड़ जाओ, न्योछावर हो जाओ उनपर, तुम्हारी ज़िंदगी बन जाएगी। पर तुम ऐसा करते नहीं। ऊँची स्त्रियों से तुम्हें भय लगता है, क्योंकि ऊँची स्त्री के पास जाकर के तुम अपना बौनापन बरक़रार नहीं रख सकते।…

अजीब सी स्थिति ये है कि एक साधारण सी दिखनेवाली लड़की से शायद ज़्यादा मुश्किल है एक सुंदर लड़की की ज़िंदगी। क्योंकि उसके खरीददार बहुत ज़्यादा हैं, और उसे बहुत कुछ मिल जाएगा। और यह जो तुमको बहुत कुछ मिल जाएगा न अपनी सुंदरता के कारण, यही नर्क है तुम्हारा।…

तुम ग़लत राहों को ठुकरा कर तो देखो, सही राह खुलती है कि नहीं खुलती। और यह घटिया और झूठा तर्क बिलकुल मत दे दो कि, “मुझे सही राह मिली नहीं मैं इसलिए ग़लत राह चल पड़ा।“ बात यह नहीं है, सही राह हमेशा खुली होती है और उपलब्ध होती…

तुम मुझे एक आदमी दिखा दो जो इन दोनों कामों के अलावा कोई तीसरा काम करता हो। आम व्यक्ति का सारा जीवन इन्हीं दो कामों में जा रहा है कि नहीं? पहला, ठूसना – और मैं सिर्फ़ मुँह से ठूसने की बात नहीं कर रहा, जेब में ठूसना, आँख में…