सभी श्रोता (गाते हुए):
पाया है कछु पाया है, मेरे सतगुरु अलख लगाया है
कहूं बैर पड़ा कहूं बेली है, कहूं मजनूं है कहूं लेली है, कहूं आप गुरु कहूं चेली है, आप आपका पंथ बताया है।
कहूं महजत का करतारा है, कहूं बणिया ठाकुरद्वारा है, कहूं बैरागी जयधारा है, कहूं सेखन बनि बनि आया है।
कहूं तुरक मुसल्ला पढ़ते हो, कहूं भगत हिन्दू जब करते हो, कहूं घोर घुंडे में पड़ते हो, कहूं घर-घर लाड लड़ाया है।
बुल्ले शाह का मैं बेमुहताज़ होइआ, महाराज मिल्या मेरा काज होइआदर्शन पिया का मुझे इलाज़ होइआ, आप आप में आप समाया है।
आचार्य प्रशांत: यह अच्छा नाम है ‘बेमुहताज़’। जितने सारे हमने बरहम के नाम लिखे हैं, उसमें अब यह भी जोड़ लो, ‘बेमुहताज़’। कौन सा श्लोक है?
प्रश्नकर्ता: छठे अध्याय का पहला।


