तो, ये प्रथम तरीके का ज्ञान है। यहाँ पर जो ज्ञान बैठा हुआ है, वो, वो है जो आपने इसी जन्म में जाना है। आपने किताबों से पढ़ा है, ये करा है, वो करा है, ऐसा है, वैसा है। यहाँ अचेतन में जो ज्ञान बैठा हुआ है, वो, वो है जो आपको बहुत पहले से पता है, क्रम विकास के परिणाम स्वरुप।वो आपके डी .न .ए. में बैठा हुआ ज्ञान है। कभी पेड़ थे कभी पत्ती थे, कभी पानी थे, कभी रेत थे, कभी बिल्ली थे। और वो सारे अनुभव भी इक्कट्ठा हैं। हाँ, आपसे कहा जाए कि बताओ, क्या करते थे जब हाथी थे? तो आप बता नहीं पाओगे। पूछा जाए कि क्या करते थे जब जंगल में थे? और बताओ, कौन सा वाला पत्ता बहुत पसंद था, तो बता नहीं पाओगे। पर याद है अभी भी, कुछ भी भूलता नहीं है। जिसको हम भूलना कहते हैं, थोड़ा सा ध्यान दीजियेगा; जिसको हम भूलना कहते हैं, उसका अर्थ बस यही है कि नॉलेज चेतन से नीचे होकर कहाँ पहुँच गया?