प्रश्न: नए साल को कैसे मनाना चाहिए या छोड़ ही देना चाहिए, क्या रखना चाहिए? क्या नया धारण करना चाहिए?
आचार्य प्रशांत: आँखे बाहर-बाहर देख ही रही हैं कि क्या चल रहा है । दुनिया है दुनिया उत्सव मना रही है, ये तथ्य है और ये आपको साफ़-साफ़ दिखाई दे रहा है । आप अपेक्षा तो नहीं कर सकते इस बात की ? आप ये कह ही नहीं सकते कि बाहर कुछ हो ही नहीं रहा है । आप ये तो नहीं कह सकते कि, जैसे बाकी का दिन है वैसे आज का दिन है । तो सबसे पहले इमानदारी से स्वीकार करना पड़ेगा कि आज का दिन अलग है, क्यों अलग है? क्योंकि आज सबकुछ अलग है । आप सड़क पर जाइए तो सड़क अलग है, लोग अलग हैं, लोगों के मन अलग हैं, उनकी उम्मीदें अलग हैं, टीवी रेडियो खोलिए तो कार्यक्रम अलग हैं, सबकुछ अलग है, और तो और कैलेण्डर भी अलग है, ठीक ।
ये नहीं कहा जा रहा है, कि, अरे! नहीं सबकुछ तो वैसा ही है, अगर सबकुछ वैसा ही है तो कल से २०१४, २०१५ कैसे हो जाएगा, तो सबकुछ तो वैसा नहीं है, कुछ तो बदला है । दूसरी ओर उससे कहीं गहरी बात ये भी है, कि कुछ नहीं बदला है, जो नहीं बदला है वो दो तलों का है दोनों को समझिएगा । आदमी के मन कि चाल है, कि वो असली मुद्दों को दबा के छोटे-छोटे मुद्दों में किसी तरह कि मुक्ति खोज ले, वो नहीं बदली है । सुख ढूँढने की आदमी की अभीप्सा नहीं बदली है । आलसी मन कि परंपरा पर चलने कि वृत्ति नहीं बदली है । धारणाएँ नहीं बदली हैं । ये नहीं बदला है और इनसे भी गहरी बात जो न बदली है, न बदल सकती है, वो ये है कि ‘सत्य’ नहीं बदला है, ‘आत्मा’ नहीं बदली है ।
जो जगा हुआ व्यक्ति होता है वो इन सभी बातों को एक साथ ध्यान में रखता है, एक-एक करके नहीं, अलग-अलग बिन्दुओं, अलग-अलग जगहों, अलग-अलग समयों पर नहीं, एक साथ ध्यान में रखता है । वो ये भी जानता है कि दुनिया के लिए आज का दिन ख़ास है । वो ये भी जानता है की दुनिया के लिए ख़ास इसलिए है क्योंकि दुनिया का मन बदल नहीं रहा और वो ये भी जानता है कि जो मन बदल नहीं रहा वो बदला जा सकता है क्योंकि वास्तव में जो अपरिवर्तनीय है वो ‘सत्य’ है, तीनों बातें समझ में आ रही हैं । एक बात मैंने उसकी करी जो बदलता दिख रहा है, दो बातें मैंने उनकी करी जहाँ बदलाव नहीं है । क्या बदलता दिख रहा है? आज के दिन दुनिया का रंग-ढंग बदलता दिख रहा है । क्या है जो नहीं बदल रहा है ? दुनिया का गहरा ढर्रा है, वृत्ति है, वो नहीं बदल रही है, और क्या है जो कभी बदलेगा ही नहीं ? वो ‘सत्य’ है ।


