प्रश्न: आचार्य जी, अचानक गुस्सा क्यों आता है?
आचार्य प्रशांत: बल्ब चालू करते हो, कितना टाइम लगता है बल्ब को जलने में? सब कुछ अचानक हो जाता है ना? हम भी वैसे ही हैं।
प्रश्नकर्ता: लेकिन बाद में दुःख होता है ना, कि हमने गलत किया !
आचार्य प्रशांत: बाद में वो जो बंद होता है पंखा चलने के बाद, तो गर्मी होती है उसमें खूब। गर्मी पैदा हो गई होती है, वो बाद में पता चलती है।
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, इसमें और मेरे प्रश्न में क्या सम्बन्ध है?
आचार्य प्रशांत: सम्बन्ध यह है कि हम ऑटोमैटिक (यंत्रवत) जी रहे हैं। हम में कोई चेतना नहीं! जैसे एक पंखा ऑटोमैटिक है ना? इधर दबाया नहीं कि चालू हुआ। बटन है। वैसे ही हमारे मन में बटन है। बटन है – गाली! गाली दी नहीं कि…..?
प्रश्नकर्ता:

