क्या मूल अहम् वृत्ति ही देवी महामाया हैं? || दुर्गासप्तशती पर (2021)

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, अभी तक जो विवरण रहा, उसमे ऐसा लग रहा है कि जैसे देवी जी कोई व्यक्तित्व हों और हमसे बाहर का कुछ हों, तो इसको मन के तल पर कैसे समझा जा सकता है?
आचार्य: देखो, आत्मा सत्य है, आत्मा का ही दूसरा नाम ब्रह्म है। आत्मा को आच्छादित किए हुए बड़े कोष हैं, उपनिषदों में पंचकोष की बात आती है न। आचार्य शंकर ने भी समझाया है, आप पढ़ चुकें है। एक दृष्टि है जो इनको देखती है धुएँ की तरह, आवरण की तरह जिसने आत्मा को ढक रखा है और दूसरी दृष्टि है जो इनको देखती है आत्मा की ही अभिव्यक्ति के रूप में, कि जैसे आत्मा ही अलग-अलग कोषों के रूप में अभिव्यक्त हुई हो।
तो आत्मा का जो पहला सगुण प्राकट्य है, वे देवी हैं। उन्हीं को महा प्रकृति कहते हैं। देवी, देवी मात्र। ये जो देवी हैं, ये आत्मा के इतने निकट और इतनी अभिन्न हैं कि अभी ये त्रिगुणात्मक भी नहीं हैं। जैसे आत्मा निर्गुणी होती है न, वैसे ही जो महादेवी हैं, जो महा प्रकृति हैं, जो मूल प्रकृति हैं, वो अभी त्रिगुणात्मक भी नहीं हैं। फिर वो आगे चल करके तीन गुणों में जैसे विभाजित हो जाती हों, जैसे अपने तीन रूप दिखाती हों। फिर वो तीन देवियों के नाम से जानी जाती हैं, तो सतोगुणी सरस्वती हो जाती हैं, रजोगुणी लक्ष्मी हो जाती हैं और तमोगुणी काली हो जाती हैं।
तो आपके चित्त में जो मूल अहम् वृति है, वो महामाया हैं। फिर उस मूल अहम् वृत्ति से आपकी न जाने कितनी वृत्तियाँ निकलती हैं, जिनको आप अलग-अलग देवियों का नाम दे सकते हैं। मूल अहम् वृत्ति क्या हो गई? महादेवी या महामाया, और फिर जो आपकी अन्य सब वृत्तियाँ हैं, उनको आप अन्य देवियों का नाम दे सकते हैं। और फिर उनसे भी बाद में आती हैं भावनाएँ, और उनके बाद आते हैं विचार और फिर उनके बाद आते हैं कर्म। तो यह सब आत्मा के ऊपर के जैसे कोष हो गए या आत्मा की एक के बाद एक तल की अभिव्यक्तियाँ हो गईं। समझ में आ रही है बात?
तो जब यहाँ पर देवी की बात हो रही है तो किन देवी की बात हो रही है? वो देवी जो आत्मा के बिल्कुल सन्निकट हैं, आत्मा से बिल्कुल अभिन्न हैं, जैसे शिव से शक्ति, जो दो होते हुए भी एक हैं। तो उन देवी की बात हो रही है, वो देवी जो संसार बनकर हमें दृष्टिगत होती हैं, अनुभव में आती हैं, वो देवी जों स्वयं संसार भी हैं और संसार का दृष्टा और अनुभोक्ता भी। मूल वृत्ति, मूल वृत्ति को यहाँ पर महामाया कहा जा रहा है। तो देवी कोई व्यक्ति नहीं हैं।

