तू घट घट अंतरि सरब निरंतरि जी हरि एको पुरखु समानी
~ रेहरासि साहेब (नितनेम)
प्रश्नकर्ता: कम्पेरिज़न (तुलना) नहीं हो सकती है, कभी-कभी हम अपने को अलग मान कर ही सोचते हैं कि मुझे उनसे ही बड़ा चाहिए। मतलब अगर मेरी सैलरी (वेतन) पंद्रह हज़ार है, उनकी पच्चीस हज़ार है, तो ये कम्पेरिज़न नहीं हो सकता है क्योंकि अगर उसको मिल रहा है, तो ठीक है, उसके हिसाब से मिल रहा है।
आचार्य प्रशांत: नहीं, कम्पेरिज़न क्यों नहीं हो सकता है? यदि वो सब में है तो कम्पेरिज़न में भी है, नकार तो फिर संभव ही नहीं है न कि कुछ भी कैसे नकारें? कम्पेरिज़न भी ठीक है।
प्र: मन में ये प्रॉब्लम (परेशानी) तो होती है न कम्पेरिज़न की वजह से।
आचार्य: हाँ, कम्पेरिज़न समस्या बने क्या ये आवश्यक है?
प्र: वो सफरिंग


