प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, यह जो 'मैं' (अहम्) है, जो शरीर की समाप्ति के साथ ही ख़त्म हो जाता है, वह असल में है क्या?
आचार्य प्रशांत: वो एक वृत्ति है। वो एक भटकी हुई वृत्ति है जिसका अपना कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं है। वो चिपकना भर जानता है। वो इससे (चाय के प्याले से) चिपका, उसे चैन मिला?
प्रश्नकर्ता: नहीं।
आचार्य प्रशांत: वो इससे (गिलास से) चिपका, उसे चैन मिला?
प्रश्नकर्ता: नहीं।
आचार्य प्रशांत: वो इससे (रिकॉर्डर से) चिपका, उसे चैन मिला?
प्रश्नकर्ता: नहीं।
आचार्य प्रशांत: इससे (कपड़ों से) चिपका, चैन मिला? सोना, रुपया, पैसा, आदमी, औरत, बच्चा—इन सब से वो चिपका, पद-प्रतिष्ठा, उसे चैन मिला? नहीं मिला न?


