‘सुल्तान, अब कहाँ चल दिए’, उसने कहा, ‘अभी फतह करना बाकी है। ये दुनिया इतनी सी ही है’, वो हैरान हो गया था। लोगों ने पूछा, ‘क्या हो गया’? कहता है, ;इसके बाद फतह करने के लिये कुछ बचा नहीं है’, तो उसका एक मात्र काम ये था कि और जीतना है, और जीतना है। तो डायोजेनेस से बोल रहा है, ‘जा रहा हूँ, कुछ फतह करना है’। डायोजेनेस ने कहा, ‘क्या करना है फतह करके?’ सिकंदर ने कहा, ‘ये करूँगा’। डायोजेनेस ने कहा,’फिर क्या करोगे?’ सिकंदर बोला, ‘ये-ये करूँगा’। डायोजेनेस ने कहा, ‘फिर क्या करोगे ये करके?’ और वो खींचता गया, संत होते ही हैं ऐसे, ‘आखीर में क्या करोगे’? बोलता है, ‘आखिर में क्या? आराम करूँगा’। डायोजेनेस में कहा, ‘तो फिर आओ, लेट जाओ! इस नदी के तट पर हम दोनों के लिए बहुत जगह है, मैं लेटा हूँ, तुम भी लेट जाओ’। सिकंदर जड़वत खड़ा है, क्या जवाब दे, समझ तो रहा ही था, कद्र करता था डायोजेनेस की, जानता था बात ठीक बोलता है। बोला,