मैनूं लगड़ा इश्क़ अवलड़ा अव्वल दा, रोज़ अज़ल दा।
विच कड़ाही तिल-तिल पावे, तलिआं नूं चा तलदा।
मोइआं नूं एह वल-वल मारे, दलियां नूं एह दलदा।
की जाणां कोई चिणग कखी ए, नित सूल कलेजे सलदा।
बुल्ल्हा, शौह दा न्योंह अनोखा, ओह नहीं रलाइआं रलदा।
~ बुल्ले शाह
प्रश्नकर्ता: मुझे ऐसा लगता है कि मेरे हाथ में एक छोटा खिलौना है और मैं उस छोटे खिलौने को जब तक नहीं छोड़ूँगा तब तक जो बड़ा खिलौना है वो मेरे हाथ नहीं आ सकता। अगर मुझसे छोटा खिलौना छुड़वाना भी है तो मुझे बड़े वाले खिलौने का लालच देना होगा।
आचार्य प्रशांत:


