ॐ तस्य निश्चिन्तनं ध्यानम्।
~ आत्मपूजा उपनिषद (प्रथम श्लोक)
हिंदी अनुवाद: उस आत्म तत्त्व का सतत चिन्तन ही उसका ध्यान है।
आचार्य प्रशांत: पहला क्या कह रहा है?
प्रश्नकर्ता १: आचरण वाला हीं, ॐ का निरंतर स्मरण..।
आचार्य: कैसे करोगे ये आचरण? ये आचरण कैसे हो सकता है?
किसका स्मरण?
किसका स्मरण?
प्र१: ॐ


