“And though I bestow all my goods to feed the poor and though I give my body to be burnt and have not charity, it profiteth me nothing.”
(Corinthians 13:3 )
(और यद्यपि मैं अपने सभी सामानों को गरीबों को खिलाने के लिए देता हूँ और हालांकि मैं अपने शरीर को जलाने के लिए देता हूँ और दान नहीं करता हूँ, इससे मुझे कुछ भी लाभ नहीं होता)
(१ कोरिंथियन १३:३)
आचार्य प्रशांत: बाँटना सिर्फ प्रेम में शोभा देता है । बिना प्रेम के अगर तुमने किसी को कुछ दिया, तो पक्का है कि कुछ वापसी की उम्मीद कर रहे हो । पक्का है कि कुछ बदले में चाहिए ! और इसलिए तुम्हें उससे कुछ मिलेगा नहीं, अपने बाँटने से । मज़ेदार बात है ना?
जिन्हें चाहिए कि मैं दे रहा हूँ तो बदले में कुछ मिले, उन्हें कुछ नहीं मिलता । और जो बिना अपेक्षा के देते हैं, उन्हें बहुत कुछ मिल जाता है । मतलब समझना । तुम अगर अपेक्षा कर के दोगे तो मिलेगा तुम्हें, क्या मिलेगा ? जो तुमने अपेक्षा की थी वो मिल जायेगा । तुमने रूपये की अपेक्षा की थी, मिल गया । तुमने ये अपेक्षा की थी कि वो एहसान माने? वो भी मिल गया । लेकिन ये जो मिला है इसकी कोई क़ीमत नहीं है । जो मिल सकता था तुम्हें वो बहुत बड़ा था । वो क्या था? कि अगर तुमने दिया प्रेम में, बाँटा; क्योंकि अब इतना मिल गया है कि अब बँटेगा ही, तो तुम्हें और मिलेगा ।


