श्रोता: सर, हमने जब अहंकार के बारे में पढ़ा था तब हमें ये बताया गया था कि जहाँ पर भी ये आ जाये कि ‘मैं हूँ’, वहां पर अहंकार है।
वक्ता: ‘मैं हूँ’ नहीं, ‘मैं कुछ हूँ’।
श्रोता: अगर कोई भिखारी कहे कि मैं भूखा हूँ, तो क्या उसमे भी अहंकार है?
वक्ता: मुकुल कह रहे हैं कि अगर मैं ये कहूं कि भूख लगी है, दर्द हो रहा है तो क्या उसमें भी अहंकार है? बिल्कुल है। बात थोड़ी सूक्ष्म है। ध्यान से सुनना। जब तुम कहते हो कि मैं भूखा हूँ और तुम ये नहीं कहते कि पेट भूखा है, तो तुमने अपनी पहचान पेट के साथ बाँध ली है। अब तुम वही हो जो पेट है। भूख तुम्हें नहीं, पेट को लगी है। तुमने अपनी पहचान पेट के साथ बाँध दी है। पेट शरीर है।
एक बार तुमने अपनी पहचान शरीर के साथ बाँध ली, तो अब तुम्हें वो सब कुछ करना पड़ेगा जो शरीर तुमसे करवाएगा। और तुम्हें ये भ्रम रहेगा कि ये तो मैं कर रहा हूँ। तुम भूल ही जाओगे कि ये तो शरीर कर रहा है। तुमको पता है कि भूख का अर्थ क्या है? भूख का अर्थ ये है कि पेट महसूस कर रहा है कि ईंधन की कमी है उस कारण कुछ रसायन हैं जो रिलीज़ हुए हैं, और रासायनों ने एक सन्देश भेजा है मस्तिष्क को और मस्तिष्क एक अनुभव कर रहा है, जिसे तुमने भूख का नाम दिया है। ये पूरे तरीके से एक मेकनिकल प्रक्रिया है जो एक मशीन के भीतर चल रही है ।


