प्रश्न: क्या एकाग्रता ध्यान में सहयोगी है?
वक्ता: नहीं। हाँलांकि, विशिष्ट परिस्थितियों के अंतर्गत ऐसा हो सकता है। तुम्हें गुरु के पास वापस आना ही होगा, तुम्हें गुरु के महत्व पर ही वापस आना होगा। तुम्हारी गुरु ही मदद कर सकता है।
आप जब योग करते हैं, तो उसमें हमने देखा था कि समाधि से पहले की एक सीढ़ी होती है- एकाग्रता की, धारणा की, कि मन में कुछ धारण करो, और मात्र उसी को धारण करो। ऐसी एकाग्रता ध्यान के लिए सहायक होती है। लेकिन वो कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में ही हो सकता है, बहुत विशिष्ट परिस्थितियों में, अन्यथा नहीं।
एक सामान्य नियम के रूप में, एकाग्रता ध्यान में सहयोगी नहीं है। वास्तव में, एकाग्रता ध्यान में बाधा है। कुछ विशेष स्थितियाँ हो सकती हैं, उदाहरण के लिए आप ‘ओंकार’ पर ध्यान कर रहे हैं, वो विशिष्ट विधि है, ध्यान की विधि है, उससे हो सकता है। लेकिन जिसे हम आमतौर पर एकाग्रता बोलते हैं, वो ध्यान में सहयोगी नहीं है।
जैसे अभी हमने चिड़िया वाला उदाहरण लिया था। एक आदमी एक चिड़िया को एक कमरे से बाहर निकालना चाहता है, तो वो चिड़िया को बार-बार कहता है कि कमरे के अन्दर के ज़हर को भूल जाओ, सिर्फ़ उस द्वार पर ध्यान एकाग्र करो, सिर्फ़ उस द्वार को मन में रखो, उसकी ओर देखती रहो, बढ़ती रहो, देखती रहो, बढ़ती रहो, देखती रहो। इस स्थिति में एकाग्रता सहयोगी हो सकती है। इस स्थिति में हो सकता है कि एकाग्रता से आप मुक्ति की ओर बढ़ रहे हों, लेकिन ये बड़ी विशेष स्थिति है।
श्रोता १: लेकिन एकाग्रता भी तो सिर्फ उसी दिशा में होती है, जो अहंकार पर आधारित होती है।



