प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, बुद्ध पुरुषों ने जो बताया है समाज को, वह बहुत सरल है, लेकिन फिर भी इतना झूठ, इतना ड्रामा क्यों?
आचार्य प्रशांत: आप बताओ क्यों? कहीं बाहर से थोड़े ही टपक रहा है, रोज़ हम ही करते हैं। आप बताओ क्यों?
आप जिस वजह से करते हो, उसी वजह से है। आप अपनी वजह बता दो, जो आपकी व्यक्तिगत वजह है, वही संसार की सार्वजनिक वजह है। जिस वजह से एक घर में ड्रामा होता है, ठीक उसी वजह से दूसरे घर में भी होता है। जिस वजह से एक दुकान चल रही है, ठीक उसी वजह से दूसरी दुकान भी चल रही है।
आप अपने जीवन मे झाँक लो। जो वजह आपको चलाए जा रही है, जो वजह आपको धक्का दिए जा रही है, आपकी ऊर्जा बन रही है, आपकी प्रेरणा बन रही है, वही वजह हर किसी की प्रेरणा बन रही है। आप और संसार मूलतः कोई भिन्न थोड़े ही हैं।
कहानी घर-घर की!
प्र: आचार्य जी, जो बुद्धजन सत्य को प्राप्त हुए, वो समाज से क्यों दूर चले गए?
आचार्य: आप को कुछ नहीं पता कि वो समाज से दूर चले गए या नहीं चले गए। उनके बारे में कोई कयास, अनुमान वगैरह लगाइए ही मत।



