भीतर की ओर मुड़ना ही, आत्मा है।
जब मन भीतर की ओर मुड़ता है, वह घुल जाता है।
~ ओशो
कार्य को सामने ला दो कारण प्रकट हो जायेगा।
~ रमण महर्षि
वक्ता: दो बातें हैं, दोनों को आमने-सामने रखा गया है। रमण कह रहे हैं मन ही जब अपनी खोज में जाता है तो खो जाता है; मन ही जब अपनी खोज में जाता है तो आत्मा में स्थित हो जाता है। इस बात को ओशो का एक कथन है उसके सामने रखा है जिसमें ओशो ने कार्य-कारण के तौर पर कहा है कि ‘क्रिएट दी इफ़ेक्ट, कॉज़ विल बी देयर’। जो फ़ल है, जो कारण है, उसका सृजन कर दो, पाओगे जो स्रोत है वो उपलब्ध ही था। कार्य का सृजन कर दो, कारण प्रकट हो जाएगा। कार्य को सामने ला दो, कारण प्रकट हो जाएगा — “क्रिएट दा कॉज़ इफ़ेक्ट विल बी देयर; क्रिएट दा इफ़ेक्ट कॉज़ विल बी देयर”।
दोनों बातें हैं, दिखने में अलग-अलग लगती हैं पर हैं एक सी। पहले ये बताइए कि बातें समझ में आ गई हैं? रमण कह रहे हैं कि पहले कुछ करना होगा, और क्या करना है? कि मन अपनी तलाश में निकले, अपने स्रोत की तलाश में निकले। मन पूछे कि ‘कोहम?’, मन पूछे! और जब मन पूछेगा ‘



