कब घटित होती है गीता? || आचार्य प्रशांत, श्रीमद्भगवद्गीता पर (2022)

यावदेतानिरीक्षेऽहं योद्धकामानवस्थितान्।
कैर्मया सह योद्धव्यमस्मिन् रणसमुद्यमे ॥22॥
“मैं इन सब युद्ध करने की कामनाओं से अवस्थित योद्धाओं को देखूँ कि किन वीरों के साथ मुझे युद्ध करना होगा।”
~ श्रीमद्भगवद्गीता, श्लोक २२, अध्याय १, अर्जुन विषाद योग
आचार्य प्रशांत: क्या जानते नहीं हैं अर्जुन कि किनके साथ युद्ध करना होगा? अचानक नींद से जगकर स्वयं को युद्ध स्थल में पा रहे हैं? नहीं, यहाँ पर देखने का अर्थ गहरा है — मैं उनको समझूँ, मैं उनको क्या समझूँ मैं अपनी स्थिति को समझूँ, मैं किसके विरुद्ध खड़ा हूँ।
सेनयोरुभयोर्मध्ये रथं स्थापय मेऽच्युत ॥21॥
यावदेतानिरीक्षेऽहं योद्धकामानवस्थितान्।
कैर्मया सह योद्धव्यमस्मिन् रणसमुद्यमे ॥22॥





