प्रश्नकर्ता: मृत्यु की खोज में जाने का अर्थ क्या है, आचार्य जी?
आचार्य प्रशांत: मृत्यु की खोज में जाने का अर्थ क्या है? ज़मीनी तौर पर हुआ क्या? अगर इस कहानी के समानांतर एक वास्तविक घटना खड़ी करें, तो वास्तविक घटना में क्या हो रहा है? ये तो ठीक है, कथा रूप में कहा जा रहा है कि पिता ने यज्ञ किया। उसमें ऐसा ऐसा हुआ। जो गाय दी जा रही थी वो बूढ़ी थी। तो बेटे ने कहा, फिर उन्होंने कहा कि तुझे मृत्यु को देता हूं। तो यमराज के पास जाते हैं, और ऐसा-ऐसा बोलते हैं। इसके समकक्ष अगर कोई वास्तविक घटना हुई हो, तो वास्तव में क्या हुआ होगा? यमराज से बात कर रहा है नचिकेत, यह तो संकेत है। हो क्या रहा है? वास्तव में क्या हुआ होगा? यह बात हमारे मन में उठती नहीं है। हम बस ऐसे ही, "हां, ठीक है। नचिकेत और यम का संवाद चल रहा है और यम उसे कुछ-कुछ बोल रहे हैं।" ये जो यम बोल रहे हैं, ये जो मृत्यु से वो बात कर रहा है, ये क्या है?
प्र: शायद अपने मन में।
आचार्य जी: मन से बात कर रहा है, तो फिर कल्पनाओं में जी रहा है, फिर तो क्या बात करी।
प्र: खोजने निकले होंगे, तो जो भी मिलता गया होगा, उससे बात करी होगी।
आचार्य जी: मृत्यु से बात करने का अर्थ क्या है? और जब तक हम ये समझ नहीं रहे हैं, तब तक हम नहीं समझेंगे, क्योंकि बाकी सारे काम तो हो ही जाएंगे। एक बार आप यम के सामने खड़े हो जाएं, तो उसके बाद जो कुछ लिखा है वो आपको पढ़ने की जरूरत क्या है? वो तो आपको भी मिल जाएगा। जो मूल प्रश्न था वो किसी ने पूछा नहीं। जो मूल प्रश्न था वो ये था कि मृत्यु के सामने खड़े होंगे का अर्थ क्या है—ये संवाद शुरू कैसे हुआ? क्या यही सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न नहीं है? एक बार संवाद शुरू हो जाए, तो उसके बाद तो उत्तर अपने आप मिलने लग ही जाते हैं। एक बार बातचीत शुरू हो गई, तो फिर तो जो होनी है वो होगी। बातचीत शुरू ही कैसे हुई? ये बातचीत शुरू होने का अर्थ क्या है? मैं मौत से बात कर रहा हूं—इसका क्या अर्थ है?


