कोरोना वायरस, भगवान, और धर्म || आचार्य प्रशांत, कोरोनावायरस पर (2020)

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, पूरा विश्व इस वक़्त कोरोना वाइरस से ग्रस्त है। अनेक प्रकार की प्रतिक्रियाँ आ रही हैं। कुछ लोग कह रहे हैं कि यह ईश्वर द्वारा भेजी गई एक विपत्ति है और इसका समाधान तो वो ख़ुद ही करेगा। पोप इत्यादि कह रहे हैं कि उन्होंने ईश्वर से ख़ुद बात की है, वो इसका समाधान निकालने को हैं। कुछ लोग यह भी कर रहे हैं कि अगर आप मंदिरों में, मस्जिदों में नमाज़ और प्रार्थना इत्यादि के लिए एकजुट हो रहे हैं, तो आपको यह बीमारी नहीं लगेगी। वहाँ पर ऐसा कुछ भी नहीं होगा।
आपका इसमें क्या कहना है?
आचार्य प्रशांत: कोई ईश्वर, कोई भगवान नहीं बैठा है जिसको मनुष्यों पर बीमारियाँ भेजने में रुचि हो, या मनुष्यों के वाइरस और बैक्टीरिया अपनी तरफ़ खींच लेता हो, सोख लेता हो, लोगों को जादुई तरीक़े से बीमारियों से मुक्ति दिला देता हो। तो इस तरह की बातें करके तो हम इस संक्रमण को और फैलाने का ही काम कर रहे हैं।
और वास्तव में इसी तरह की बातों के कारण धर्म, धर्म का पूरा क्षेत्र ही इतना बदनाम हो गया है। जो भी फिर थोड़े भी पढ़े-लिखे लोग हैं, थोड़े भी बुद्धिजीवी हैं, वो कहना-मानना शुरू कर देते हैं कि – धर्म का मतलब ही है अंधविश्वास, और बुद्धिहीन तरीक़े के तर्क और मान्यताएँ और जीवन।
तो यह सोचना कि अगर आप पूजा के लिए या प्रार्थना के लिए या नमाज़ के लिए इकट्ठा हो रहे हैं, तो कोई ईश्वर या कोई दैवीए ताक़त आपको वाइरस के संक्रमण से बचा देगी, ये बात ग़लत ही नहीं है, मूर्खतापूर्ण ही नहीं है, ज़बरदस्त रूप से ख़तरनाक है। क्योंकि जब आपको संक्रमण लगता है, तो वो सिर्फ़ आपके लिए निजी कष्ट की बात नहीं होती, आप एक औज़ार बन जाते हैं, आप एक माध्यम बन जाते हैं, जिसके ज़रिए से ये वाइरस बहुत और लोगों तक पहुँच सकता है।


