प्रश्नकर्ता: अपरोक्षानुभूति में बताया गया है कि मैं सब गुणों, सब क्रियाओं के पार हूँ, मैं अमर और मुक्त हूँ। तो फिर जीवन में किए गए कार्यों के लिए मैं ज़िम्मेदार कैसे हुआ?
आचार्य प्रशांत: अपरोक्षानुभूति कह रही है कि “जीव अमर है और मुक्त है, जीव अकर्ता है, जीव अभोक्ता है”, तो अपरोक्षानुभूति को कोई कर्मफल भोगने भी नहीं पड़ते। अपरोक्षानुभूति को समझ में आया है, आदिशंकर को समझ में आया, कि तुम्हारी सत्यता यही है कि तुम अमर हो और मुक्त हो, तो आदिशंकर मुक्त हो गए कर्मफल से, जन्म-मरण के चक्र से। तुम अपनी बात करो न! क्यों ज़रूरत पड़ती है किसी आदिशंकर को तुम्हें समझाने की कि तुम अमर हो और मुक्त हो? तुमने तो कह दिया कि ग्रंथ कहता है (कि) मैं अमर हूँ और मुक्त हूँ। ग्रंथ क्यों कहता है तुमसे कि तुम अमर हो और मुक्त हो? और एक नहीं, हज़ार ग्रंथ बार-बार, बार-बार तुम्हारे सामने दोहराते हैं कि “याद करो! समझो! तुम अमर हो और मुक्त हो!” क्यों समझाते हैं? क्योंकि अपनी दृष्टि में न तुम अमर हो, न तुम मुक्त हो।
तुम्हें कोई परमात्मा द्वारा प्रदत्त थोड़े ही फल मिल रहे हैं! तुमने तो अपने-आप को जैसा माना है, उस मानने के फल मिल रहे हैं। उपनिषद् कहते हैं कि “जो बंधन के अभिमानी हैं वो बंधन भरा जीवन जीते हैं, और जो मुक्ति के अभिमानी हैं, उनका जीवन मुक्त रहता है।” तुमने माना क्या अपने-आप को? अपरोक्षानुभूति ग्रन्थ हो, आदिशंकर हों, कृष्ण हों, तमाम ऋषि हों, संत हों, गुरु हों; उन्होंने तो यत्नपूर्वक तुम्हें खूब समझाया है, कि “तुम अजर, अमर, मुक्त, निर्भय, उज्ज्वल आत्म-मात्र हो”, पर तुमने माना है क्या? उन्होंने समझाया, तुमने माना क्या?
तुम पूछ रहे हो, “जीवन में किए गए कार्यों के लिए मैं ज़िम्मेदार कैसे हुआ?” क्योंकि जो भी काम तुमने किया, वो तुमने अपने-आप को अमर और मुक्त जान कर थोड़े ही किया! शंकर तुम्हें जो समझा रहे हैं, अगर ये तुमने मान लिया होता, और मानने से तुम्हारे कर्म उद्भूत हुए होते, तो तुम्हें उन कर्मों की कोई ज़िम्मेदारी नहीं उठानी पड़ती, फल वहन नहीं करना पड़ता; आगे की चिंता, आशा नहीं भोगनी पड़ती। पर तुमने तो जो किया, अपने-आप को मर्त्य और बंध्य मान कर ही किया। अपनी दृष्टि में तो तुम अमर नहीं, मुक्त नहीं; मर्त्य भी हो और बंध्य भी हो। देखो न कैसे काम करते हो! कहते यही हो, कि “मैं अमर हूँ, ग्रंथ ने समझा दिया,” और बीवी-बच्चों से बोलते हो, “ये पैसा मेरे बाद तुम्हारे काम आएगा, ये



