वक्ता: नवनीत(श्रोता को इंगित करते हुए) पूछ रहे हैं कि हमारे कर्म हमारे विचारों से निकलते हैं। मुझे लगता है इस बात से तो हम सभी सहमत होंगे। सही है?
पर यह हम नहीं समझ पाते कि विचार आते कहाँ से हैं? विचार कहाँ से आते हैं, नवनीत?श्रोता: सर, हमारे मन से।वक्ता: तो फिर मन में कहाँ से आते हैं?श्रोता: हमारी दिन-प्रतिदिन कि गतिविधियों से।वक्ता: इसको थोड़ा और गहरे देख कर ही आप समझ पाओगे कि विचार और कार्य कैसे सम्बंधित हैं। कार्य का जन्म विचार से ही होता है, जो बहुत अच्छी बात है। पर क्या आप उसे गहराई से जान सकते हैं जहाँ से विचार आते हैं?श्रोता: जो भी हम देखते हैं।श्रोता: कल्पना से।
वक्ता: सोचो कि आप हिंदी में बात कर रहे हो। सोच सकते हो न? आसान है! अब यह सोचिए कि आप अंग्रेज़ी में बात कर रहे हो। अब यह सोचिए कि आप रूसी भाषा में बात कर रहे हो। क्या आप कर सकते हो इसकी कल्पना?
सभी श्रोता: नहीं, सर।
वक्ता: तो फिर विचार आते कहाँ से हैं? आपके अतीत के अनुभवों से। जो आपके अतीत में नहीं आया है ,वो आपके विचारों में भी नहीं आ सकता। आप अपने अतीत के बिना कुछ सोच ही नहीं सकते। उस हिसाब से आपकी सारी कल्पना मात्र अतीत है।कल्पना विचार है। सही? सारी कल्पना विचार के अलावा कुछ नहीं है।तो लोगों ने कहा है कि विचार सत्य नहीं है। बिलकुल सही कहा है क्यूँकी सत्य तो अभी है। विचार कहाँ हैं?




