श्री प्रशांत: कम्युनिकेशन (संचार) की ज़रुरत हमेशा से बरकरार रही है। टेलीग्राम (तार), वायरलेस फ़ोन, और जानकारी एक जगह से दूसरी जगह भेजने का, इन सबसे ज़्यादा सुविधाजनक तरीका तो इन्टरनेट हो गया है।
बदला क्या है?
‘द नीड टू कम्यूनिकेट’ (संवाद करने की ज़रुरत) तो वही की वही है।
इन्टरनेट कम्युनिकेशन के अलावा और क्या है?
श्रोता: पर व्यक्ति भी तो बदलता है समय के साथ।
वक्ता: कैसे? क्या बदल रहा है? एक आपका कंप्यूटर सिस्टम होता है, ध्यान से देखिएगा इस बात को, उसमें एक हार्डवेयर है। उस हार्डवेयर के ऊपर एक परत बैठी होती है सॉफ्टवेयर की, और उसमें एक मेमोरी होती है, जो बहुत ही टेम्पररी मेमोरी होती है। और जो हार्डवेयर है वो पूरी तरह प्रोग्राम्ड है।


