





तो शादी से पहले तो तुम ख़ुद ही सच्चाई को पर्दे में रखते हो। तुम ख़ुद ही एक दूसरे के सामने सभ्यता का, शालीनता का, भलाई का मुखौटा पहन कर बैठते हो। “नहीं, नहीं तुम बैठो! पॉपकॉर्न मैं ले आता हूँ।“
“नहीं, नहीं तुम क्यों खर्च करोगी, मैं कर रहा…

यह एक बड़ा भ्रम कि जल्दी से शादी कर लो और शादी करने से दूसरा व्यक्ति ज़िम्मेदार हो जाएगा। जो माँ-बाप कहते हैं, “ये बड़ा उद्दण्ड है, लड्डू। गाँव भर में लुढ़कते फिरता है लड्डू। तो लड्डू को ज़िम्मेदार बनाने के लिए लड्डू की शादी कर देते हैं।” घर में…

सुबह उठते ही, "जानू उठ गई? जानू टट्टी कर ली, ब्रश कर लिया? नाश्ते में क्या खा रही हो? क्यों खा रही हो? खा ही क्यों रही हो, पी क्यों नहीं रही? जानू पैरों से चल रही हो? सर के बल क्यों नहीं चल रही?"
अभी हॉट है मामला भई!…

लड़के अगर बेरोज़गार हों और शादी के लिए लालायित हो जाएँ तो तुम कहोगे, “छी! कमाता ना धमामा, शादी करने चला है!”
और लड़कियों से यह बात तुम बोलते नहीं। क्योंकि लड़कियाँ तो गाय हैं, उन्हें कमाना-धमाना थोड़े ही है। उन्हें तो घर में बैठकर बछड़े जनने हैं।
जब बहन…

बहुत सारा मेडिटेशन वगैरह वही है जो आपको झटका नहीं खाने देगा। ज़िन्दगी बर्बाद चल रही है, सबकुछ आपका ग़लत है, लेकिन सुधरने की कोई ज़रूरत नहीं। आधे-एक घण्टे बैठ करके गाइडेड मेडिटेशन कर लो, वहाँ तुमको गुरुजी कान में बता देंगे कि तुम एक सरोवर के किनारे बैठे हो,…

हिंदुस्तान में अभी भी दो जगह हैं जहाँ पर लडकियाँ बहुत कम पायी जाती हैं – लड़कियाँ, स्त्रियाँ सब – एक, श्मशान घाट, दूसरा, सत्संग। दोनों ही जगहों पर सच दिख जाता है न, और दोनों ही जगहों पर देह की नश्वरता दिख जाती है न। समाज नहीं चाहता है…

लड़की होगी वो चाहे गुड़गाँव में काम कर रही हो, चाहे बंबई में, चाहे बेंगलुरु में, उसकी दो ज़िंदगियाँ होती हैं। एक जो दफ्तर में होती है, दफ्तर में हो सकता है मैनेजर हो, पंद्रह लोग उसको रिपोर्ट करते हों, पंद्रह लोग उसके अधीनस्थ हों। और वहाँ पर वो एक…

किसी भी आम लड़के से पूछ लो वो किसलिए विवाह करता है; सम्मानजनक काम करने के लिए तो वो भी विवाह करता नहीं, काम वह सारे ऐसे ही करता है जो विवाह के बिना करदे तो तुम कहोगे 'ज़लील, लुच्चे, लफ़ंगे! गायब हो जा यहाँ से!'
तो तुम जो अपना…

सब प्रेमियों की निशानी है – दो-दो, चार-चार घण्टे लगे हुए हैं फ़ोन पर। और फ़ोन पर नहीं तो आमने-सामने बैठकर एक-दूसरे का भेजा चबा रहे हैं। और मजाल है कि उधर से कचरा फेंका जा रहा है और तुम इधर से फ़ोन काट दो। बेवफ़ा कहलाओगे। कितना मज़ा आता…

प्रश्नकर्ता: सर, लोग दहेज क्यों लेते हैं?
आचार्य प्रशांत: कोई किसी का साथ पैसे लेकर के करेगा तो मैं कैसे बोलूँ इस पर? मैं मुश्किल पाता हूँ इस बात को कल्पित करना, उस आदमी की शक्ल को चित्रित करना जो कह रहा है कि, “मैं किसी के साथ हो सकता…

किसी ने आपसे पूछा, “अरे! तुमने मुझे पाँच दिन से फ़ोन नहीं किया, तुम्हें मेरी याद नहीं आयी?” आप कहते हैं, “अगर मैं इसको सच बता दूँ तो इस बेचारे के दिल को चोट लगेगी, ये दुख जाएगा।“ तो आप कहते हैं, “नहीं याद तो बहुत आयी, वो नेटवर्क नहीं…

पूछो किसी से, “विवाह क्यों कर रहे हो?” तो सीधे थोड़े ही बता देगा कि, “इसलिए कर रहे हैं...” क्योंकि नर खरगोश मादा खरगोश के पास क्यों जाता है? प्रकृति चाहती है कि नन्हे-मुन्ने खरगोश आएँ, बस इतनी सी बात, इसलिए जाता है।
यही विवाह के वक़्त स्त्री और पुरुष…

बहुत मोटी मार पड़ती है ठीक तब जब तुम्हें ज़रा भी अंदेशा नहीं होता कि मार खाने वाले हो। माया भी कोई छोटी-मोटी खिलाड़न थोड़े ही है। बेहोशों को छोड़ देती है, वह कहती है, “यह तो पहले ही गिरा हुआ है इसको क्या गिराएँ? शू!” वह भी पसंद करती…

ये सब भी पिक्चरों में होता है कि वहाँ जाकर पूछा जाता है कि, “*टी और कॉफी? योर प्लेस ऑर माय प्लेस?*” (चाय या कॉफ़ी? तुम्हारे घर या मेरे घर?)
हिंदुस्तान में तो ऐसे पूछते हैं, “जात बताएगी?” फिर जैसे ही जात मिली...
”गोत्र बता, गोत्र?”

तुम अभी नये-नये किसी नौकरी में लगे हो और जहाँ तुम्हारी कोई हैसियत नहीं, औकात नहीं, आमदनी नहीं, तुमने अभी कुछ सीखा नहीं, कोई तरक्की नहीं करी, कोई पहचान नहीं बनायी, ना ज्ञान अर्जित किया। ना तुम अभी सामाजिक दृष्टि से कुछ हो, ना आंतरिक, आध्यात्मिक दृष्टि से कुछ हो…

जब शरीर का कोई हिस्सा बड़ी माँग करने लगे किसी भी तरीके से, पेट माँग करता है कि, ‘मुझे भोजन दो’, कहीं दर्द हो गया तो वो जगह माँग करती है कि, ‘मुझे आराम दो, दवा दो।‘
कामोत्तेजना चढ़ने लगी तो जननांग माँग करते हैं कि, ‘हमपर ध्यान दो’, तो…

शादी का ही उत्सव ऐसा करा था जिसमें न-जाने कितना प्रदूषण फैला दिया। और प्रदूषण फैलाने को नहीं मिल रहा आजकल कोरोना के कारण, तो बड़े दिल टूट रहे हैं। कह रहे हैं, “सिर्फ़ पचास ही लोग आएँगे क्या? हमें वातावरण तबाह करने का मौका नहीं दोगे, प्लीज़ प्लीज़ प्लीज़…

प्रश्नकर्ता: ज़िंदगी में कोई प्रिय है, जिसे हम बहुत ज़्यादा चाहते हैं, उसे हम खो देते हैं – तो वो अच्छा कैसे हो सकता है फिर? आचार्य प्रशांत: वो आपको बताएगा कि आपको जो दुःख हो रहा है, वो आपके प्रिय के साथ आपका जो रिश्ता था, उसकी अपूर्णता का…

हज़ार में से नौ-सौ-निन्यानवे लोगों के पास कोई ऐसा ऊँचा लक्ष्य, मकसद नहीं होता जिसको वह अपनी ज़िंदगी क़ुर्बान कर सकें, तो उनको शादी कर लेनी चाहिए। क्योंकि शादी नहीं करेंगे तो बड़ा उपद्रव करेंगे। उनके मन में ये शिक़ायत रह जाएगी कि, “बाकी दुनिया को तो कुछ खास मिल…

दुनिया अगर ताक़त की भाषा समझती है तो ताक़त अर्जित करो। दुनिया अगर पैसे की बात सुनती है तो पैसा होना चाहिए तुम्हारे पास। हाँ, शर्त बस एक है कि तुम्हारी बात सदा सच्ची रहे। यह ना हो कि पैसा आ गया तो बात में झूठ आ गया।
जितना तुम्हारी…

ये मेडिटेशन चीज़ क्या है? मैं बताता हूँ यह चीज़ क्या है, यह फ़र्ज़ी चीज़ है, यह फ़रेब है, यह आत्म-प्रवंचना है, ख़ुद को धोखा है। यह जीवन के आमूलचूल बदलाव का तरीका नहीं है, यह कुछ समय का आध्यात्मिक मनोरंजन है। यह आपको आपकी गंदी दिनचर्या के तनाव से…

सेक्स अगर तुम्हें शांत कर सकता होता, दो बार, चार बार में कर गया होता न? यहाँ तो लोग अपने जीवन काल में हज़ारों बार कर जाते हैं और उसके बाद भी लालायित रहते हैं, प्यास ही नहीं बुझती।
अधेड़ हो गए, साठ के हो गए, अस्सी के हो गए,…

मैं जितने भी कपटी लोगों से मिलता हूँ, उनकी धूर्तता की कोई सीमा नहीं। उनका दिमाग चल रहा है। वो महत्वकांक्षी हैं। वो कुछ भी कर दिखाने को तैयार हैं। उनमें ऊर्जा पूरी है, वो दुनिया पर छा जाने के लिए हौसला रख रहे हैं। उनका आत्मविश्वास देखो!
और मैं…

माया एक औसत ज़िंदगी का नाम है।
उफ्! कैसे पकड़ोगे?
द एवरेज लाइफ़!
माया, वो चेहरा है जिसमें कुछ खास नहीं। तुम उसे याद ही नहीं रख सकते, इतना साधारण चेहरा है माया। माया जीवन के उन दिनों, उन घण्टों, उन हफ़्तों, उन पलों का नाम है जिनमें कुछ खास

अध्यात्म यह नहीं कहता कि तुम स्त्री को त्याग ही दो। अध्यात्म इस बात की अक्ल देता है कि कैसी स्त्री की संगति करनी है।
किसने कह दिया कि अध्यात्म ने पाबंदी लगा रखी है स्त्री सहवास पर? कृष्ण को नहीं देखा? राम को नहीं देखा? इतने ऋषि-मुनि थे, इनकी…

विवाह के दिन हर लड़का, चाहे वह कितना भी बड़ा... (मूर्ख हो), घोड़ी पर तो चढ़ लेता है न? नहीं तो ऐसे तो उसको टट्टू भी अनुमति ना दे। टट्टू भी बोलेगा, “मैं तुझ पर चढूँ वो ज़्यादा शोभा देगा!” विवाह के दिन, एक-से-एक मूर्खानंद घोड़ी चढ़ने को पा जाते…

तुम्हें लगता है, “वाह! मज़ा आ गया। लाइन दे दी उसने।“
अरे! तुझे लाइन नहीं दे दी है। सेंटेंस लिख दिया है, मृत्युदंड!
जब किसी को मृत्युदंड दिया जाता है जानते हो क्या लिखता है जज? “टू बी हैंगड टिल डेथ!"

बहुत सारी लड़कियों को शादी का आकर्षण इसलिए रहता है कि, ‘उसके बाद किसी की आमदनी मेरी हो जाएगी। पति घर लाएगा और मेरे हाथ मैं तनख़्वाह रख देगा।‘ क्षमा माँगते हुए कह रहा हूँ, ये वैश्यावृति है।
बड़ी साधारण योग्यता की कोई लड़की अगर पा जाए कोई ऊँचे पद…

जो लोग दस दरवाज़ों पर खटखटा रहे होते हैं न उन बेचारों की त्रासदी यही होती है, वह ऐसे होते हैं जैसे कि कोई दस जगह गड्ढा खोदे।
यह ग्रंथों का अपमान है कि उनको एक बार पढ़ कर के किनारे रख दो। “मैंने गीता पढ़ ली!” कि, “मैंने बाइबल…

आपका साथी कैसा है, वो आपको नहीं पता चलेगा जब तक वह आपके साथ है। उसको जानना चाहते हैं तो उस दिन जानिएगा जिस दिन वह आपको छोड़ता है। फिर देखिएगा उसका चेहरा!
जब किसी का आपसे कोई स्वार्थ ना बचे और फिर भी वह आप के प्रति सद्भावना रखे,…

सिकंदर दुनिया में सिर्फ़ एक ही है असली; कौन? जो घड़ी को हरा दे। वरना बहुत बड़े-बड़े बादशाह हो गए, सब से जीत लेते हैं, किससे हार जाते हैं? घड़ी से; घड़ी से जीत कर दिखाओ तो बात है! समझ में आ रही बात?
वो टिक-टिक लगातार याद रहे। कलाई…

तुम कर लो विवाह, पर यह उम्मीद मत रखना कि उससे अकेलापन कम हो जाएगा। संभोग इत्यादि के अवसर खूब उपलब्ध हो जाएँगे, वह सब हो जाएगा। बच्चे वगैरह हो जाएँगे, घर-खानदान खड़ा हो जाएगा, माता-पिता इत्यादि अगर तुमसे उम्मीदें कर रहे होंगे तो वो उम्मीदें पूरी हो जाएँगी। वह…

एवं देहद्वयादन्य आत्मा पुरुष ईश्वरः। सर्वात्मा सर्वरूपश्चसर्वातीतोऽहमव्ययः।।
इस प्रकार आत्मा पुरुष या ईश्वर स्थूल एवं सूक्ष्म दोनों प्रकार के शरीरों से भिन्न है। अतः मैं सर्वात्मा, सर्वरूप, अविनाशी और सबसे परे हूँ।
~ अपरोक्षानुभूति (श्लोक ४०)

यत्राज्ञानाद्भवेद्दवैतमितरस्तत्र पश्यति। आत्मत्वेन यदा सर्वं नेतरस्तत्र चाण्वपि।।

अहंशब्देन विख्यात एक एव स्थित: पर:। स्थूलस्त्वनेकतां प्राप्त: कथं स्याद्देहक: पुमान्।।
“ ‘अहं’ शब्द से प्रसिद्ध परमात्मा एकमात्र स्थित है, अर्थात् वह अनेक तत्वों का संघात नहीं है। फिर जो स्थूल है और अनेक भावों को प्राप्त हो रहा है, वह देह पुरुष कैसे हो सकता है?”
~अपरोक्षानुभूति (श्लोक ३१)

हरि है खांड रेत मांहि बिखरी, हाथी चुनी न जाई। कहैं कबीर गुरु भली बुझाई, चींटी होय के खाई।। ~ संत कबीर
आचार्य प्रशांत: (प्रश्न पढ़ते हुए) कबीर साहब का एक श्लोक भेजा है, कह रहे हैं कि इसका अर्थ बताएँ। और कहते हैं कि “इन्होंने भी नित्य और अनित्य…

आचार्य प्रशांत: आपका साथी कैसा है, वो आपको नहीं पता चलेगा जब तक वह आपके साथ है। उसको जानना चाहते हैं तो उस दिन जानिएगा जिस दिन वह आपको छोड़ता है। फिर देखिएगा उसका चेहरा!
जब किसी का आपसे कोई स्वार्थ ना बचे और फिर भी वह आप के प्रति…

योऽन्तःसुखोऽन्तरारामस्तथान्तर्ज्योतिरेव यः। स योगी ब्रह्मनिर्वाणं ब्रह्मभूतोऽधिगच्छति।।
जो पुरुष अंतरात्मा में ही सुखवाला है, आत्मा में ही रमण करने वाला है तथा जो आत्मा में ही ज्ञान वाला है, वह सच्चिदानंदघन परब्रह्म परमात्मा के साथ एकीभाव को प्राप्त सांख्य योगी शांत ब्रह्म को प्राप्त होता है। —श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय ५, श्लोक २४…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी प्रणाम। कुछ चीज़ें हमें साफ़-साफ़ पता चलती हैं कि हम ग़लत कर रहे हैं। लेकिन कुछ ऐसी चीज़ें होती हैं जो व्यर्थ होती हैं लेकिन जब हम उस काम में मशगूल रहते हैं तो पता नहीं चलता कि व्यर्थ है, जैसे हम हँसी-मज़ाक और गपशप करते रहते…

प्रश्नकर्ता: इगो (अहंकार) में और सत्य में क्या अंतर है?
आचार्य प्रशांत: जितने अंतर हैं वह सब इगो में ही हैं। अंतर कुछ कर लो, समानताएँ और अंतर यह सब मानसिक परिकल्पनाएँ हैं। आत्मा में ना कोई भेद होता है, ना अभेद होता है। तुम अगर पूछोगे कि, "अहंकार और…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, बताया तो बहुत गया है कि विषम परिस्थितियों में भी व्यवहार कैसा करें पर जब वैसी विपरीत या विषम परिस्थितियाँ सामने आती हैं, तब सारा ज्ञान हिरा जाता है (खो जाता है) और आदमी अपना आपा खो बैठता है।
आचार्य प्रशांत: वह तो होगा ही, ज्ञान से…

प्रश्नकर्ता: शिवमय होना क्या है?
आचार्य प्रशांत: बहुत मुस्कुरा रहे हो बेटा! यही होता है शिवमय होना। पूछ रहे हैं कि “शिवमय होना क्या होता है?” यही है, सोमस्त हो जाओ। सोम जानते हो न क्या होता है, क्या होता है? ख़ुमार; सोमस्त हो जाओ, यही होता है शिवमय होना।…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, आपको सुनने से पहले मैं एक भजन सुनता था उसमें बोलते थे कि "सिर से तेरी बहती गंगा, काम मेरा हो जाता चंगा, नाम तेरा जब लेता।" तो भजन सुनते-सुनते मुझे लगता था कि मैं महादेव के कुछ नज़दीक हो गया हूँ और अब मेरा काम चंगा…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी प्रणाम, कभी-कभार संसार निरर्थक लगता है लेकिन ज़्यादा समय संसार ही सच लगता है। दिल है कि मानता नहीं, क्या करें? आपके चरणो में आश्रय दो।
आचार्य प्रशांत: संसार सच लगता है तो कोई ग़लती नहीं हो गई। झूठ भी नहीं है संसार। बात सच-झूठ की नहीं…

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मैं लोगों से बहुत जल्दी आसक्त हो जाती हूँ। पहले पिता से बहुत आसक्ति थी, फिर पति से, और अब बेटे से आसक्त हूँ, ‘हुक ’ (अंकुड़ा) की तरह फँस जाती हूँ।
पहले मुझे लगता था कि ग़लती दूसरों की है, लेकिन आपको सुना तो जाना…
लड़की को पढ़ाई के लिए दो-सौ किलोमीटर दूर भेजना हो तो यही माँ-बाप और भाई कन्नी काट जाते हैं, और ब्याह कर वो दो-हज़ार किलोमीटर दूर जा रही हो इन्हें कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा। और पढ़ाई के लिए जाएगी तो किसी यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में रहेगी, सुरक्षा में रहेगी, हॉस्टल…
श्रद्धावान् लभते ज्ञानं तत्पर: संयतेन्द्रिय: | ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति || ४, ३९ || जितेन्द्रिय, साधनापरायण और श्रद्धावान मनुष्य ज्ञान को प्राप्त होता है तथा ज्ञान को प्राप्त होकर वह बिना विलम्ब के तत्काल ही भगवत्प्राप्तिरूप शान्ति को प्राप्त हो जाता है। —श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय ४, श्लोक ३९प्रश्नकर्ता: आचार्य जी,…
आचार्य प्रशांत: (प्रश्न पढ़ते हुए) शंकराचार्य के श्लोक को उद्धृत किया है, “आत्मा स्थूल…
~अपरोक्षानुभूति (श्लोक ५३)
यस्मिन्सर्वाणि भूतानि ह्यात्मत्वेन विजानतः। न वै तस्य भवेन्मोहो न च शोकोऽद्वितीयतः।।
“उस अवस्था में सम्पूर्ण…