सकारात्मक सोच- मात्र भ्रम || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2014)

श्रोता: सर, कहीं ऐसा पढ़ा था कि एक दिन में 60,000 से ज्यादा विचार मन में आते हैं और इसमें कुछ विचार सकारात्मक होते हैं और कुछ नकारात्मक भी होते हैं । तो मुझे ये जानना है कि नकारात्मक विचारों पर कैसे काबू किया जाए?
वक्ता: (व्यंग्य कसते हुए) “मीठा-मीठा गप्प, कड़वा-कड़वा थू”
(सभी हँसते हैं)
सकारात्मक विचार आओ-आओ, नकारात्मक विचार जाओ-जाओ । सकारात्मक सब मिल जाये, नकारात्मक चाहिये नहीं । और मन का नियम ये है कि बिना नकारात्मक के सकारात्मक होता नहीं ।
तुम्हारा छठा सेमेस्टर अब चल रहा है, तो पाँच सेमेस्टर का अनुभव अब ले चुके हो । कभी एग्जाम में बैक लगी है आज तक?
श्रोता: सर, एक भी नहीं ।
वक्ता: अच्छा, कभी बैक लगने की संभावना बनी थी कि, “इस विषय में पता नहीं पास हों न हों” ?


