प्रत्येक कृत्य में जोश रहे || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2013)

वक्ता: अभय (श्रोता को इंगित करते हुए) का सवाल है कि मैं बी. टेक तो कर रहा हूँ, लेकिन मेरी रुचि कविताएँ लिखने में है। ये कह रहे हैं कि इनका पैशन कविता लिखने में बहुत ज़्यादा है । ये अजीब स्तिथि हो गई है, दुविधा है। पूछ रहा है कि मैं सही काम कर भी रहा हूँ या नहीं? मैं जानना चाहता हूँ अभय, कि ये बात हमारे मन में कहाँ से आ गई कि जिंदगी एक वन ट्रैक अफ़ेयर है। हमने ये कैसे सोच लिया कि जीवन में बस एक ही रंग होता है, एक ही तरह के फूल खिलते हैं?
कुछ उदाहरण देता हूँ, तुमने कविताओं की बात करी। इस देश ने पिछले कुछ दो सौ सालों में जो कवि देखा है, वो है रविन्द्रनाथ टैगोर। क्या तुम जानते हो कि रविन्द्रनाथ अपनी पूरी पैतृक संपत्ति की देखभाल भी साथ में करते रहते थे। पूरा हिसाब-किताब भी देखते थे, इतने बड़े शांति निकेतन की स्थापना भी उन्होंने करी । और ये सारे काम याद रखना, प्रबंधकीय काम है। कागज़ लेकर के हिसाब किताब करना पड़ता है और रबिन्द्रनाथ हिसाब-किताब में भी बहुत प्रगाढ़ थे। कविता उनकी ऐसी थी कि पूरा सौन्दर्य बहे उसमें।
और हिसाब उनका ऐसा था कि उसमें एक पैसे की चूक हो नहीं सकती है। एक दूसरे कवि का उदाहरण लेता हूँ, कबीर का। दिन भर चरखा चलाते थे, कपड़ा बुनते थे। शाम को उसे बेचने भी जाते थे। पर क्या इससे कबीर की कविता पर, कबीर के काव्य पर कोई अंतर पड़ा? पड़ा क्या?
जिसे करना होता है, वोप्रत्येकस्तिथि में कर डालता है।
वो बहानों के पीछे नहीं छुपता। स्थितियाँ, उसको रोक नहीं पाती है। नानक देश भर में घूमते थे, विदेशों की भी इतनी यात्रायें की पर साल में कुछ महीनों के लिए अपने गाँव लौट कर आते थे और हल उठा लेते थे और लग जाते थे अपने काम पर और बाकी समय गाते रहते थे।छवि देखी होगी नानक की, दो उनके शिष्य थे- बाला, अम्बरदाना; गा रहे है नानक। काव्य है, पूरा-पूरा काव्य है, नानक की वाणी में पूरा काव्य है। पर क्या नानक ने ये कहा कि ये सब जो सांसारिक बातें हैं, दुनिया के बारे में जानना, इन सब को मैं परे रख दूंगा, क्या कबीर ने ऐसा कहा? क्या रविन्द्रनाथ ने ऐसा कहा? मैं समझता हूँ कि सिर्फ़ तुम्हारे ही नहीं ,यहाँ पर जिंदगी में सभी लोग ऐसे ही हैं जिनके बहुत गहरे पैशन होंगे ज़रूर। मैं पूछना चाहता हूँ कि क्या पैशन को पूरा करने के लिए ये ज़रूरी है कि संसार से नाता तोड़ लिया जाए? और कुछ करा ही ना जाए, दिन रात वही करा जाए।

