प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, अभी डर की बात हो रही है। मेरा बच्चा चार साल का है। अभी कुछ समय से वो किसी अँधेरे कमरे में जाने से, या अँधेरा हो जाने पर, बहुत डरने लगा है। कोई वजह नहीं बताता है, पर बहुत डरने लगा है।
ऐसा क्यों?
आचार्य प्रशांत: वो पुराना डर है। एक लाख साल पहले का। हम जंगल में रहते थे न, हमारी आँखें रात में नहीं देख सकतीं। और रात के जो शिकारी होते हैं, उनकी आँखें रात में…
प्र: देख सकती हैं।
आचार्य: तो जब हम जंगल में रहते थे, रात में हमारा शिकार हो जाता था। और वो शिकार हमारा लाखों साल तक ऐसे ही होता रहा। चीता कब शिकार करता है? बाघ कब शिकार करता है? रात में। बहुत सारे हिंसक पशु हैं, जो रात में शिकार करते हैं, और आदमी को रात में छुपना पड़ता है। इसीलिए आदमी के लिए रात हमेशा से ही खौफ़नाक रही है। और वो डर आदमी के साथ लाखों साल रहा। लाखों साल तक हमारी यही दुर्दशा होती रही, कि रात में हमारा शिकार होता था।
तो हमारे शरीर के भीतर समा गया है वो डर। वो डर हमारे मस्तिष्क में बैठ गया है, वो डर हमारी कोशिकाओं में बैठ गया है। हम हार्डवायर्ड हो गए हैं। अभी भी, और हज़ार, दो-हज़ार साल बाद भी जो बच्चा पैदा होगा, वो अँधेरे से घबराएगा। आप उसे अँधेरे को लेकर कोई शिक्षा मत दो, तब भी वो घबराएगा। कोई भूल नहीं है। लड़का हो लड़की हो, भारत में हो, यूरोप में हो, अँधेरे से घबराएगा-ही-घबराएगा।

