वक्ता: उस्मान, धर्म कभी अलग-अलग हो ही नहीं सकते | धर्मों के नाम अलग-अलग हो सकते हैं, पर धर्म कभी अलग नहीं हो सकते | तुमने सवाल पूछा है की अगर ये हिंदू, मुस्लिन, सिख, ईसाई ये सब भाई-भाई हैं तो धर्म अलग-अलग क्यों है?
बड़ा संजीदा सवाल पूछा है और अगर समझना चाहते हो तो उतने ही ध्यान से सुनना भी पड़ेगा | इस बात को ध्यान से समझना | अभी सामने आप लोग बैठे हैं इसमें कम से कम ३-४ अलग-अलग धर्मों के लोग होंगे |
धर्म अलग-अलग हो ही नहीं सकते, धर्म सिर्फ एक है, उसके नाम अलग-अलग हो सकते हैं |
होता क्या है की धर्म सिर्फ रौशनी की तरह है, लेकिन वो रौशनी कभी इस CFL से निकलती है, कभी दिये से निकलती है और दीयों का प्रकार भी १००० तरीकों का होता है,कभी सूरज से निकलती है, कभी कहीं और से | जब तक रौशनी रहती है तब तक तो ये स्पष्ट होता है कि ये रहा दिया और ये रही उसकी ज्योति और इससे आ रही थी रौशनी और सबको स्पष्ट होता है की प्राथमिक रौशनी है लेकिन एक दिन ऐसा भी आता है उस्मान जिस दिन रौशनी बुझ जाती है, तब बचता है सिर्फ वो……
सभी छात्र एक साथ: दिया |
वक्ता: और बाद के लोग सब ये ही समझने लगते हैं कि ये दिया ही प्राथमिक है, कि जैसे इस दिये में ही कोई बड़ी बात थी | अब एक गाँव के लोग एक प्रकार के दिये से रौशनी लेते हैं और दुसरे गाँव के लोग दुसरे तरीके के दिये से रौशनी लेते हैं |



