इन्होंने पिछड़े वर्ग व महिलाओं की शिक्षा के लिए काम किया, लेकिन अधिकतर लोग इन्हें भूल चुके हैं। इन्होंने आधुनिक भारत के सबसे बड़े शिक्षा आंदोलनों में से एक को, फलने-फूलने की ज़मीन दी, लेकिन आज लोगों को उनका नाम भी नहीं पता। इन्हें भारत की पहली मुस्लिम महिला अध्यापिका कहा जाता है, क्या आप इन्हें जानते हैं?
हम बात कर रहे हैं — फ़ातिमा शेख की। जिन्होंने श्री ज्योतिबा व श्रीमती सावित्रीबाई फुले के शिक्षा आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी।
फ़ातिमा शेख की सावित्रीबाई जी से दोस्ती तब हुई जब दोनों ने अमेरिकी मिशनरी 'सिंथिया फर्रार' के एक शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया था।
कार्यक्रम में रहते हुए, दोनों ने उन लोगों को शिक्षित करने के लिए काम करने का ठाना, जिन्हें पारंपरिक रूप से ज्ञान और शिक्षा से वंचित किया गया था।
फ़रार, जो उस समय अहमदनगर में रहती थीं, उनकी मदद से सावित्रीबाई और फ़ातिमा ने वहाँ लड़कियों के एक छोटे समूह को पढ़ाने का काम संभाला। आगे जाकर उन्होंने दलितों और महिलाओं के लिए और भी स्कूल खोले।
उस वक्त फातिमा और सावित्रीबाई शहरभर में घूम-घूमकर लोगों को मनाया करती थीं, जिससे वे अपने बच्चों को स्कूल भेजने लगें।
हालाँकि, मराठी संस्कृति और परंपरा के गढ़ रहे पुणे में, उनकी शिक्षित करने की कोशिश से ही हंगामा मच गया।





