

हम कहते हैं कि अब कुछ नया करते हैं, फ़ूड योगा , मूड योगा * । कोई ऐसा शब्द नहीं है जो अब * योगा के साथ नहीं जोड़ दिया गया है। नई-नई क्रियाएँ निकल रही हैं, नई-नई प्रक्रियाएँ निकल रही हैं। ये मुद्रा, ये आसान, ये करते हैं, वो करते हैं, और करना कुल कितना है? (तौलिया उठाते हुए) करना ये है, लेकिन बेईमान हैं, ये करने का इरादा ही नहीं है। न अपनी वर्तमान स्थिति के प्रति पीड़ा है और न ही मुक्ति से प्रेम है। तो ये नहीं करना चाहते। आडम्बर करना है ताकि अपने-आप को ये दिलासा दिए रहें कि हम भी आध्यात्मिक हैं, हम भी देखो न मुक्ति के लिए कुछ कर ही रहे हैं। तो एक बड़ा ज़बरदस्त निशानेबाज़ मँगाया गया है।