प्रश्नकर्ता: अगर हमनें बच्चों से ये कह दिया कि जो अच्छा है उसमें अभी उतरो तो बच्चों को तो यही अच्छा लगता है कि टीवी देखें या मनोरंजन या इधर-उधर की कूद-फाँद तो फिर इसका क्या करेंगे?
आचार्य प्रशांत: कहानी पूरी देखिए - कोई बच्चा क्यों टीवी में, या इंटरनेट में, या धमाचौकड़ी में इतना उत्सुक हो जाता है। चलिए मैं आपसे पूछता हूँ, आप अपने-आप को देख लेंगे तो आप बच्चे का मन भी समझ पाएँगे। हम में से कई लोग होंगे जो वीकेंड (सप्ताहांत) पर घूमने-फिरने जाते होंगे। बाज़ारों में सबसे ज़्यादा चहल-पहल होती है, सिनेमा में टिकट मिलना मुश्किल हो जाता है। हमें मनोरंजन की इतनी ज़रूरत क्यों महसूस होती है हफ्ते के आखिरी दो दिनों में?
आप दफ़्तर से लौटकर आते हैं और दफ़्तर से लौटकर आते ही हममें से कईयों के लिए ये आवश्यक हो जाता है कि टीवी खोलकर बैठ जाएँ या इधर-उधर की चर्चा करें या किसी किस्म का मनोरंजन करें। अपने-आपको किसी तरीके से कोई उत्तेजना दें। कोई बाहर खाने चला जाता है, कोई कहता है कि थोड़ी व्हिस्की चलेगी। ये सब हमारे लिए ज़रूरी क्यों हो जाता है? छुट्टियाँ आते ही पर्वतीय स्थलों में, हिल-स्टेशंस में होटल का एक कमरा मिलना भी क्यों मुश्किल हो जाता है? आप कोशिश करिए बुकिंग करने की, मिलेगा ही नहीं। लॉन्ग वीकेंड (लम्बा सप्ताहांत) आया नहीं कि किसी शुक्रवार को या सोमवार को अगर छुट्टी पड़ जाए, आप शिमला में या मसूरी में जाकर के देखिए कि वहाँ हालत क्या है। ऐसा क्यों होता है? हम अपने-आपको समझ रहे हैं ताकि हम बच्चे को समझ सकें। मन एक है। कहिए ऐसा क्यों होता है?
प्र: क्योंकि हमें हमारी नौकरी में आनंद नहीं आ रहा है।


