श्रोता: सर, मैंने अभी तक जितने ‘HIDP’ सेशन और संवाद अटेंड किये हैं, उनसे मुझे ऐसा लगता है कि कोई भी अल्टीमेट सोल्युशन किसी प्रॉब्लम का अगर होता है तो वो है वर्तमान में पूरे तरीके से जीनाl क्या ये सही है?
वक्ता: हाँ, सही हैl तुमने कहा कि इन सारी बातों से तुम्हें यही समझ में आया है कि वर्तमान में जियोl वर्तमान में बेशक जियो पर इस वाक्य का आंशिक अर्थ मत निकाल लेना। क्योंकि आंशिक अर्थ हम अपनी सुविधा के अनुसार निकाल लेते हैं और फिर उसको पकड़ के बैठ जाते हैंl मैं बिलकुल बेहोश होकर इधर-उधर कूद रहा हूँ, मन बिलकुल उत्तेजित हैl और पूछा जा रहा है कि क्या कर रहे हो; तो जवाब आता है कि ‘मैं तो वर्तमान में जी रहा हूँ, मौज मना रहा हूँ, मुझे आगे की कोई फिकर नहीं है’l वर्तमान में जीने का ये अर्थ नहीं हैl ये जो शब्द तुमने लिया ‘वर्तमान’, ये बड़ी दूर तक जाता है, इसको समझनाI
हम आमतौर पर जब वर्तमान कहते हैं तो हमारा आशय होता है कि पास्ट है, भूत और फिर वर्तमान है और फिर भविष्यlहमारा आशय ये होता है कि इसको छोड़ो, इसको छोड़ो और वर्तमान में जियोl हमारा आशय ऐसा होता है कि तीन हैंl इसमें से दो को त्यागो और वर्तमान में जियोl दो कौन? भूत और भविष्य l बात ये बिलकुल भी नहीं हैl वर्तमान समय का हिस्सा नहीं हैl वर्तमान का अर्थ ये नहीं है कि भूत नहीं या भविष्य नहींl वर्तमान का अर्थ है कि जो कुछ है, ‘अभी है’l भूत और भविष्य इसी वर्तमान में ही समाये हुए हैंl जब कहा जाता है कि वर्तमान में जियो तो कहा जाता है कि पूरे में जियो क्योंकि जो कुछ है, वर्तमान ही हैl पूरा वर्तमान है l वर्तमान के अलावा और कुछ है ही नहींl अंश नहीं किये जा रहे, टुकड़े नहीं किया जा रहे | ये नहीं कहा जा रहा कि वर्तमान में जियो और अतीत में ना जियोl ये भी नहीं कहा जा रहा कि वर्तमान में जियो और भविष्य में ना जियोl किसी भी चीज़ को नकारा नहीं जा रहाl भूत और भविष्य की कोई मनाही नहीं हैl वर्तमान में जीने का अर्थ है कि जो है, वर्तमान है और इसी को पूर्णता से जियोl
तुम कहाँ और जी सकते हो, मुझे ये बताओ? तुममें से कोई है जो भूत में जी सकता है? कोई है, जो भविष्य में जी सकता है? कोई है, जो अतीत में जाकर साँसें लेगा? तुम उनकी बस कल्पना कर सकते होl अतीत बस स्मृतियों में हैlजो है वो यही हैl तुम कब कह रहे हो कि मेरा एक अतीत है? कब कहते हो? वर्तमान में ही तो कहते हो! यदि वर्तमान ना हो तो क्या अतीत भी हो सकता है? तुम भविष्य के सपने कब लेते हो? वर्तमान में ही तो लेते हो ना? वर्तमान में सब समाया हुआ हैl वर्तमान पूरा हैl लेकिन इस पूरे को य़ा तो जाना जा सकता है या अनभिज्ञता में जिया जा सकता हैl जब कहा जाता है कि वर्तमान में जियो तो उससे आशय होता है कि जागने में जियो, सोने में नहींl इतना हीl समझ रहे हो बात को? गलत मत ले लेनाl क्योंकि हमारे लिए बड़ा सुविधाजनक वाक्य बन सकता है कि मैं तो अतीत की परवाह नहीं करताl ‘अतीत है’ और तुम्हें परवाह करनी होगीl हम सब यहाँ जो बैठे हुये हैं, सारे अतीत के साथ ही बैठे हुये हैंl सच तो ये है कि तुम नहीं बैठे हो, तुम्हारा अतीत ही तो बैठा हुआ हैl एक अर्थ में इसको देखनाl ये जो कपड़े तुमने पहने हुये हैं, ये अतीत से आ रहे हैंl ये जो तुम्हारा शरीर है, ये

