श्रोता: मैं जब बारहवीं क्लास में था तो उस समय मैंने पढाई में दिलचस्पी नहीं रखी, न ही परिवार से बहुत मतलब रखा। मतलब उस समय मैं कुछ भी नहीं सोचता था। जो मन में आता था वो करता था। और उस समय मुझे लगता था कि सब लोग मुझे कुछ कह रहे हैं, मैं उस पीरियड को कभी डिफाइन नहीं कर पाया। उस समय की वजह से मुझे नुकसान हुआ है। चाहे पढाई हो या दोस्त हो हर जगह नुकसान हुआ ही है। तो सर ,मैं उस समय को आज तक जान नहीं पाया हूँ कि वो हुआ क्या था मुझे ?
वक्ता: कहाँ बैठे हो ?
श्रोता: कुर्सी पर।
वक्ता: बगल में कौन है ?
श्रोता: मेरा दोस्त।
वक्ता: हाथ में क्या है ?
श्रोता: पेन।


