आचार्य प्रशांत: विश्व है, पूरा ब्रह्मांड ही है — ऐसा किसको लगता है? विश्व है भी इसका प्रमाण, या गवाह, या अनुभोक्ता कौन है? अहं है और मात्र अहं है उसके अलावा कोई नहीं है। आप ही हैं जिसके लिए ये विश्व है। यह तो छोड़िए कि आप नहीं रहेंगे तो भी दुनिया रहेगी क्या, आपकी ही अगर स्थिति बदल जाती है तो विश्व आपके लिए बदल जाता है, बल्कि लुप्त भी हो जाता है।
यह तो बहुत दूर की बात है कि अगर अहं नहीं है तो भी क्या संसार है, अहं की ही स्थिति बदल जाती है जब तो दुनिया बदल जाती है। आपको प्यास लगी हो आप पानी पी लीजिए, आपके लिए इन दीवारों का रंग बदल जाएगा। और अभी तो मैंने बहुत छोटे बदलाव की बात करी है। आप बाहर खड़े हों और कोई खुशखबरी आ जाए, आपके लिए पेड़ों के पत्ते ज़्यादा हरे हो जाएँगे। और जिस दिन मन ख़राब होता है, देखा है उस दिन पूरी दुनिया ही कितनी ख़राब लगती है। जो कुछ है आप ही के लिए है। और देखा है थोड़ा सा नशा कर लें तो दुनिया कैसे नाचने लगती है। और देखा है जब नींद बहुत आ रही हो तो घड़ी में ठीक से समय भी नहीं देखा जाता। जैसे घड़ी ही डोल रही हो। और देखा है कैसे जब सो जाते हैं तो संसार पता नहीं कहाँ जाता है। दुनिया जैसी भी है अहं के लिए है। यह बात साफ़-साफ़ समझिए और इस बात को अपने लिए जितनी बार दोहराएँ उतना कम है।
दुनिया का अपने-आपमें कोई अलग, निरपेक्ष, स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है। हमारी भाषा, हमारी धारणा ऐसी रहती है कि हमें लगता है दुनिया थी, और उस दुनिया में एक दिन हम पैदा होकर के आ गए। जैसे रेल का डब्बा था और उसमें एक दिन आप चढ़ गए। आपके चढ़ने से पहले भी वो रेल का डब्बा था, उस रेल के डब्बे की यात्रा थी, और उस रेल के डब्बे में सवारियाँ थीं। हमारे मन में कुछ ऐसा ही नक्शा रहता है। रहता है न? कि दुनिया पहले से थी, लोग पहले से थे, उसमें एक दिन मैं भी चढ़ गया रेल के डब्बे में। और फिर एक दिन उस रेल के डब्बे से मैं उतर जाऊँगा। मैं उतर जाऊँगा तो फिर डब्बा भी रहेगा, सवारियाँ भी रहेंगी और उनकी यात्रा भी रहेगी। हमारे मन में ऐसा नक्शा रहता है और यह बात हमको बहुत सीधी और प्रमाणित लगती है।
हमको लगता है ऐसा ही तो है। कैसे लगता है? कहते हैं — देखो, मैंने अभी देखा कि दुनिया चल रही है, चल रही है, और एक दिन मेरे भाई के घर में नया बच्चा आ गया। इससे क्या पता चलता है? कि बच्चे के पैदा होने से पहले भी तो दुनिया थी, और वो जो दुनिया पहले से थी, उसी में तो बच्चा आ गया न? वो जो दुनिया बच्चे के पैदा होने से पहले से थी, किसके लिए थी? बच्चे के लिए? आपके लिए थी न। और आप जिस दुनिया की बात कर रहे हैं वह आपके लिए किस दिन से शुरू हुई है? आपके पास कोई प्रमाण नहीं है कि आपसे पहले भी दुनिया थी। आपके पास जो भी प्रमाण हैं कि आपसे पहले दुनिया थी वह प्रमाण भी आपको आपके होने के कारण मिले हैं। आप ना हों तो वो प्रमाण भी कहाँ से मिलेंगे?

